तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद के बोलारम स्थित भारतीय सेना की 20 मद्रास रेजिमेंट मुख्यालय से हथियारों और गोला-बारूद की सनसनीखेज चोरी का खुलासा कर दिया है। इस मामले में एक पूर्व हवलदार को गिरफ्तार किया गया है, और जांच के दौरान चोरी किए गए सभी हथियार, गोला-बारूद तथा अन्य सैन्य उपकरण बरामद कर लिए गए हैं।
यह चोरी 30 और 31 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि में हुई थी। चोरी गए सामान में चार एके-203 असॉल्ट राइफलें, एक इन्सास राइफल, सात पिस्तौल, पांच एके मैगजीन, तीन इन्सास मैगजीन, 13 पिस्तौल मैगजीन, एक रात्रि-दृष्टि दूरबीन और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद शामिल था।
आरोपी की पहचान मल्लेश उर्फ राजू के रूप में हुई है। वह भारतीय सेना का पूर्व हवलदार था और उसे 30 जून 2026 को सेवा से हटाया गया था। बताया गया है कि उसे अनुशासन और स्वास्थ्य संबंधी कारणों के आधार पर हटाया गया, हालांकि इन अनुशासनात्मक मुद्दों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
चोरी का पता चलने के बाद मलकाजगिरी विशेष कार्य दल, सैन्य खुफिया, तेलंगाना खुफिया और हैदराबाद सिटी पुलिस टास्क फोर्स की संयुक्त जांच शुरू की गई। जांचकर्ताओं ने शुरुआत में सुविधा के संवेदनशील क्षेत्रों तक सीधी पहुंच रखने वाले लगभग 16 प्रमुख संदिग्धों को चिन्हित किया।
बाद में जांच का दायरा बढ़ाकर त्वरित प्रतिक्रिया दल के कर्मियों, बाहरी कर्मचारियों, अनुशासनात्मक कार्रवाई झेल चुके लोगों और हाल ही में सेवानिवृत्त या सेवा से हटाए गए कर्मियों की भी जांच की गई। पुलिस के अनुसार, 8.5 लाख से अधिक मोबाइल नंबरों के डेटा, सीसीटीवी फुटेज, फिंगरप्रिंट और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया।
जांच आखिरकार मल्लेश तक पहुंची। पुलिस के अनुसार वह सेना की इस सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था से परिचित था। आरोप है कि उसने चोरी से दो दिन पहले 28 और 29 अगस्त को इलाके की रेकी की और उन अंधे स्थानों तथा हिस्सों की पहचान की, जहां सीसीटीवी की पर्याप्त कवरेज नहीं थी।
30 अगस्त की रात करीब 11 बजे मल्लेश ने कथित तौर पर इलाके में प्रवेश कर हथियार, मैगजीन, गोला-बारूद और अन्य उपकरण चुरा लिए। जांचकर्ताओं के अनुसार, उसने पहले चोरी का सामान मोटरसाइकिल से ले जाया और बाद में उसे अपनी मारुति सुजुकी ब्रेजा कार में स्थानांतरित कर दिया।
इसके बाद वह कथित तौर पर आचमपेट की ओर गया। अपने आवागमन को छिपाने और यात्रा को सामान्य दिखाने के प्रयास में उसने रास्ते में किराये के यात्री भी बैठाए, ऐसा पुलिस का कहना है।
अपने घर के पास पहुंचने के बाद पूर्व हवलदार ने कथित तौर पर चोरी किए गए हथियारों को घास और मिट्टी के नीचे छिपा दिया। जांच तेज होने पर वह समय-समय पर इस सामान को अलग-अलग जगहों पर स्थानांतरित करता रहा और अंततः उसे फिर से उसी जगह पर छिपा दिया।
जांच में निर्णायक मोड़ 10 सितंबर को आया, जब परिवार और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में पूछताछ के दौरान मल्लेश से सामना कराया गया। पुलिस के मुताबिक, उसने हथियार चोरी करने की बात स्वीकार की और उनके छिपाए जाने की जगह भी बता दी।
आरोपी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जांचकर्ताओं ने चोरी किए गए सभी हथियार और गोला-बारूद बरामद कर लिए। बरामद सामान में एके-203 राइफलें, इन्सास राइफल, पिस्तौल, मैगजीन, गोला-बारूद और सेना की सुविधा से गायब अन्य उपकरण शामिल हैं।
इस बरामदगी से सुरक्षा एजेंसियों को राहत मिली है, क्योंकि आशंका थी कि ये सैन्य-स्तर के हथियार अपराधियों के हाथ लग सकते थे। इस मामले में तेलंगाना पुलिस, राज्य खुफिया एजेंसियों और सैन्य खुफिया के बीच व्यापक समन्वय भी शामिल रहा।
अब आगे की जांच इस चोरी के पीछे के सटीक मकसद, यह जानने और यह तय करने के लिए जारी है कि क्या मल्लेश ने अकेले ही यह वारदात की थी। साथ ही हैदराबाद में सेना की सुविधा से जुड़ी इस गंभीर सुरक्षा चूक की पूरी कड़ी भी खंगाली जा रही है।