राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के दिनों की जनरल धीरज सेठ और एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित की एक तस्वीर ने देश भर के रक्षा प्रेमियों का ध्यान खींचा है। यह तस्वीर लगभग चार दशक पुराने उस सफर की झलक देती है, जिसकी शुरुआत 1986 के दिसंबर में हुई थी।
सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की जा रही यह तस्वीर कथित तौर पर दोनों युवा अधिकारियों को दिसंबर 1986 में एनडीए से एक साथ निकलते हुए दिखाती है। उस समय उनकी उम्र लगभग 19 या 20 वर्ष रही होगी और वे अपने सैन्य जीवन की शुरुआत कर रहे थे।
तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि लगभग 40 वर्ष बाद यही दो सहपाठी भारत के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च पदों तक पहुंचेंगे। एक भारतीय सेना का नेतृत्व करेगा और दूसरा भारतीय वायु सेना की कमान संभालने की तैयारी में होगा।
जनरल धीरज सेठ ने 30 जून, 2026 को सेना प्रमुख का 31वां पदभार संभाला। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र रहे जनरल सेठ को दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने अभियानगत कमान, आतंकवाद-रोधी दायित्वों, रणनीतिक नियुक्तियों और वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाओं में लंबा और विशिष्ट करियर बनाया।
उसी पुरानी तस्वीर में उनके साथ दिखाई दे रहे एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित भी उसी पीढ़ी के एनडीए पूर्व छात्र हैं। उन्हें 6 दिसंबर, 1986 को भारतीय वायु सेना के लड़ाकू धारा में कमीशन मिला था। वे प्रायोगिक परीक्षण पायलट और योग्य उड़ान प्रशिक्षक रहे हैं तथा मिराज-2000, मिग श्रेणियों, जगुआर, हॉक और तेजस सहित विभिन्न विमानों पर 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव रखते हैं।
6 अक्टूबर, 2026 को सरकार ने एयर मार्शल दीक्षित को वायु सेना प्रमुख का 29वां पदनामित प्रमुख नियुक्त किया। वे एयर चीफ मार्शल का पद ग्रहण करेंगे और 31 अक्टूबर को भारतीय वायु सेना की कमान संभालेंगे। वे एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लेंगे।
इसी कारण यह पुरानी एनडीए तस्वीर और भी असाधारण प्रतीत होती है।
एक समय दो युवा कैडेट एक ऐसी संस्था के द्वार से साथ-साथ निकले थी, जिसका उद्देश्य सैन्य नेतृत्व तैयार करना था। दशकों बाद एक भारतीय सेना की कमान संभाल रहा है और दूसरा कुछ ही सप्ताह में भारतीय वायु सेना की कमान संभालने वाला है।
हालांकि उनकी यात्राएं केवल एक तस्वीर या किसी संयोग पर आधारित नहीं थीं। ये यात्राएं लगभग चार दशक की सेवा, चुनौतीपूर्ण नियुक्तियों, पेशेवर सैन्य शिक्षा, परिचालन अनुभव, कमान की जिम्मेदारियों और सार्वजनिक नजरों से दूर लिए गए हजारों निर्णयों से बनी हैं।
जनरल सेठ ने बख्तरबंद कोर में आगे बढ़ते हुए बख्तरबंद रेजिमेंट और ब्रिगेड से लेकर एक आतंकवाद-रोधी बल और उच्चतर संरचनाओं तक की कमान संभाली। सेना प्रमुख बनने से पहले उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया और बाद में उप सेना प्रमुख के रूप में कार्य किया।
एयर मार्शल दीक्षित का करियर आकाश में आगे बढ़ा। एक लड़ाकू पायलट, परीक्षण पायलट और प्रशिक्षक के रूप में उन्होंने ऑपरेशन सफेद सागर और ऑपरेशन रक्षक सहित अभियानों में भाग लिया। बाद में उन्होंने वरिष्ठ कमान और स्टाफ नियुक्तियों में काम किया। वे केंद्रीय वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी, और फिर वायु उप प्रमुख रहे।
इस प्रकार दोनों के करियर एक बार फिर भारत के सैन्य नेतृत्व के सर्वोच्च स्तर पर मिल गए।
युवा एनडीए कैडेटों और रक्षा सेवाओं में आने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह तस्वीर एक गहरा संदेश देती है।
जब कोई कैडेट राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश करता है, तब कोई नहीं जानता कि यह यात्रा उसे कहां ले जाएगी। आपके साथ स्क्वाड्रन की तस्वीर में खड़ा व्यक्ति, ड्रिल मैदान पर आपके साथ कदमताल करने वाला सहपाठी या प्रशिक्षण की कठिनाइयां साझा करने वाला साथी, भविष्य में हजारों सैनिकों, नौसैनिकों या वायु योद्धाओं की कमान संभाल सकता है।
इस तस्वीर की सबसे बड़ी सीख यह है कि सैन्य नेतृत्व किसी एक चमकदार क्षण का परिणाम नहीं होता। यह वर्षों तक बनी अनुशासन की आदत, बार-बार सिद्ध की गई पेशेवर क्षमता, निभाई गई जिम्मेदारियों और तब भी मानक बनाए रखने का परिणाम होता है जब कोई देख नहीं रहा होता।
दिसंबर 1986 में धीरज सेठ और अशुतोष दीक्षित सिर्फ वर्दी में अपने करियर की शुरुआत कर रहे दो युवा थे।
2026 में जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित भारतीय वायु सेना की कमान संभालने की तैयारी में हैं।
इन दोनों क्षणों के बीच चालीस वर्षों का अंतर है।
वर्दी पहनने का सपना देखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यही बात इस तस्वीर को प्रेरक बनाती है कि यात्रा शुरू होते समय यह कोई नहीं जान सकता कि वह कितनी दूर तक जाएगी।
कभी-कभी आज साथ चल रहा कैडेट, दशकों बाद फिर आपके साथ खड़ा हो सकता है, इस बार भारत के सशस्त्र बलों के शीर्ष पर।