गोरखपुर, 7 अक्टूबर 2026: सीआईएसएफ के जवान परमबीर यादव, उम्र 38 वर्ष, का शव रविवार देर रात गोरखपुर जिले के बघागाड़ा निवासी के रूप में कालेसर जीरो प्वाइंट पर बोकटा-बरवार तटबंध के पास बरामद किया गया। वह झारखंड के धनबाद में तैनात थे और छुट्टी पर घर लौट रहे थे, तभी उन्हें तटबंध के किनारे अचेत अवस्था में पाया गया। स्थानीय रिपोर्टों में उनका नाम परम्बीर और परमवीर यादव के रूप में भी दर्ज किया गया है, जबकि कुछ शुरुआती विवरणों में कर्मवीर यादव लिखा गया था।
रात करीब बारह बजे राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने उनकी जेब से मिले सीआईएसएफ पहचान-पत्र के आधार पर उनकी पहचान की और परिवार को सूचना दी। उनके भाई धर्मबीर के अनुसार, परमबीर रविवार को गांव के लिए निकले थे, लेकिन ट्रेन छूट जाने के बाद उन्होंने आगे की यात्रा के लिए एक वाहन किराये पर लिया था। वह घर नहीं पहुंच सके।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट के निशान दर्ज किए गए और मौत का कारण इन्हीं चोटों को बताया गया। उनके पिता दिनेश चंद्र यादव की लिखित शिकायत पर जीडीए पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की। क्षेत्राधिकारी आभा सिंह ने बताया कि रिपोर्ट में सिर की चोट से मौत की पुष्टि होने के बाद मामला दर्ज किया गया और घटनास्थल तथा मृतक के संपर्क में आए लोगों से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
पुलिस उस किराये के वाहन का पता लगाने में जुटी है, जिसमें वे धनबाद से निकले थे, साथ ही अन्य सवारियों की पहचान की जा रही है और रास्ते में पड़ने वाले पड़ावों की जांच की जा रही है। कालेसर और सड़क पर बने टोल प्लाज़ा के सीसीटीवी फुटेज भी देखे जा रहे हैं।
उनकी पत्नी प्रीति यादव ने मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि धनबाद से निकलने से पहले परमबीर ने फोन किया था, घर आने की बात कही थी और अपनी बेटी रिया से बात करने को कहा था, जो उस समय सो रही थी। उन्होंने कहा कि बाद में उन्होंने रात में उनके नंबर पर करीब 55 बार कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्हें अपने देवर के माध्यम से यह जानकारी मिली कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है। परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पोस्टमार्टम के बाद तिरंगे में लिपटा शव परिवार को सौंप दिया गया। पुलिस और सीआईएसएफ कर्मियों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके पिता ने चिता को अग्नि दी। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार अंतिम संस्कार मंगलवार रात किया गया।
मृत्यु के पीछे का कारण और इसमें शामिल लोगों की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच अभी जारी है और उसका केंद्र किराये का वाहन, मार्ग के सीसीटीवी फुटेज तथा तटबंध पर मिलने से पहले मृतक के संपर्क में आए लोग बने हुए हैं।