पूर्व थल सेनाध्यक्ष और जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स तथा लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंट के मानद कर्नल जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम (सेवानिवृत्त) ने 16-17 जुलाई 2026 को प्रतिष्ठित “डबल फर्स्ट” बटालियन का दो दिवसीय दौरा किया। इस यात्रा ने भारतीय सेना की उन परंपराओं को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जो सैनिकों की नई पीढ़ी को उच्चतम मानकों पर खरा उतरने के लिए प्रेरित करती हैं।
अपने दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर, अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों और सैनिकों से विस्तार से बातचीत की। उन्हें इकाई की परिचालन जिम्मेदारियों, प्रशिक्षण पहलों और तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी गई, जिससे बटालियन की युद्ध तत्परता और व्यावसायिक उत्कृष्टता बनाए रखने के प्रयासों की झलक मिली।
कार्यक्रम के तहत पूर्व थल सेनाध्यक्ष ने “सर्वश्रेष्ठ एक्कीस” बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर और “ज़ोरावर” बटालियन के सैनिकों से भी मुलाकात की। इस बातचीत ने सैनिकों को भारतीय सेना के एक सम्मानित सैन्य नेता से जुड़ने का अवसर दिया, जिनका करियर जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स से गहराई से जुड़ा रहा है। जनरल द्विवेदी ने अपने सैन्य सेवा के दशकों के अनुभव साझा करते हुए नेतृत्व, अनुशासन, टीम भावना और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण के महत्व पर बल दिया।
अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने रेजिमेंट के प्रिय मूल्यों, समृद्ध परंपराओं और गौरवशाली विरासत को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने हर सैनिक से अपेक्षा की कि वह सैन्य सेवा के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध रहे और व्यावसायिकता, साहस तथा निःस्वार्थ सेवा के माध्यम से रेजिमेंट का ध्वज ऊंचा रखे। उनके शब्दों ने यह संदेश दिया कि रेजिमेंट की शक्ति केवल उसके युद्धक्षेत्र के उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उसके सैनिकों के चरित्र और समर्पण में भी निहित है।
जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स से उनके लंबे जुड़ाव को देखते हुए इस यात्रा का विशेष महत्व रहा। 1984 में इसी रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त करने वाले जनरल द्विवेदी ने अपने विशिष्ट सैन्य करियर में कई स्तरों पर कमान संभाली है और रेजिमेंट के साहस, सम्मान और बलिदान के मूल भाव को निरंतर आगे बढ़ाया है। थल सेनाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्ति के बाद भी वे मानद कर्नल के रूप में रेजिमेंट से जुड़े हुए हैं और उसकी बटालियनों तथा कर्मियों के साथ निकट संबंध बनाए रखते हैं।
दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने इकाइयों के उच्च प्रशिक्षण मानकों, परिचालन तैयारी और रेजिमेंटीय भावना की सराहना की। उन्होंने सैनिकों को नई चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने और उन शाश्वत सैन्य मूल्यों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया, जिन्होंने जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स को भारतीय सेना के इतिहास में विशिष्ट स्थान दिलाया है।
यह मुलाकात प्रेरणादायक माहौल में समाप्त हुई, जिसमें अधिकारियों और सैनिकों ने पूर्व थल सेनाध्यक्ष के विचारों और नेतृत्व से प्रेरणा ली। इस यात्रा ने रेजिमेंट की परिचालन उत्कृष्टता, व्यावसायिक दक्षता और उन स्थायी परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत किया, जो जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंट की विरासत को परिभाषित करती हैं।