अरुणाचल प्रदेश में तवांग जाने वाले मार्ग पर बसे बाईसाखी के पास 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर हुए सड़क हादसे में घायल दो नागरिकों की मदद के लिए गजराज कोर के सेला वारियर्स आगे आए। सैनिकों की त्वरित और पेशेवर प्रतिक्रिया ने एक बार फिर भारतीय सेना की “सेवा पहले, स्वयं बाद में” की भावना को सामने रखा।
यह दुर्घटना दुर्गम और ऊंचाई वाले ऐसे क्षेत्र में हुई, जहां कठिन भू-भाग और कड़ी मौसम परिस्थितियों के कारण तुरंत चिकित्सा सहायता मिलना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। घटना की सूचना मिलते ही भारतीय सेना के जवान बिना देर किए मौके पर पहुंचे और घायलों को जीवनरक्षक सहायता देने में जुट गए।
चिकित्सा सहायता का नेतृत्व रेजिमेंटल मेडिकल अधिकारी ने किया। उनके साथ युद्धक्षेत्र नर्सिंग सहायक भी मौजूद रहे और उन्होंने घटनास्थल पर गंभीर आपात चिकित्सा देखभाल दी। उनकी तेज़ कार्रवाई से गंभीर रूप से घायल चालक की हालत स्थिर करने में मदद मिली और उसे तत्काल उपचार के लिए तैयार किया गया।
जरूरी आपात देखभाल देने के बाद सेना की टीम ने घायल चालक को सुरक्षित रूप से सिविल अस्पताल, तवांग पहुंचाया, जहां उसे आगे के इलाज के लिए सौंप दिया गया। समय पर मिली चिकित्सा सहायता से घायल नागरिक के बचने और स्वस्थ होने की संभावना बेहतर हुई।
इस बचाव अभियान ने देश के कुछ सबसे कठिन इलाकों में आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की भारतीय सेना की क्षमता को फिर साबित किया। अरुणाचल प्रदेश के सामरिक और पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात सेना की इकाइयां केवल परिचालन दायित्वों के लिए ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर मानवीय सहायता देने के लिए भी तैयार रहती हैं।
सेला वारियर्स की यह कार्रवाई स्थानीय समुदायों की मदद करने की भारतीय सेना की लंबे समय से चली आ रही परंपरा को दर्शाती है। खासकर दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में, सेना की इकाइयां अक्सर प्राकृतिक आपदाओं, हादसों और चिकित्सकीय आपात स्थितियों में सबसे पहले पहुंचने वालों में होती हैं।
तवांग के पास हुआ यह सफल बचाव अभियान इस बात का एक और प्रमाण है कि भारतीय सेना युद्धक्षेत्र से बाहर भी जीवन की रक्षा के लिए उतनी ही प्रतिबद्ध है। तेज कार्रवाई, पेशेवर दक्षता और करुणा के माध्यम से सेला वारियर्स ने फिर यह स्पष्ट किया कि “सेवा पहले, स्वयं बाद में” की भावना हर मिशन का मार्गदर्शन करती है।