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डिफेन्स न्यूज़

IAF की 14वीं स्क्वाड्रन ‘बुल्स’ ने मनाया प्लेटिनम जयंती, 75 वर्षों की वीरता को किया नमन

SSBCrack News Desk
Last updated: सितम्बर 20, 2026 12:15 अपराह्न
SSBCrack News Desk
Published: सितम्बर 20, 2026
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Officer Shaking Hands

भारतीय वायु सेना की नंबर 14 स्क्वाड्रन, जिसे “बुल्स” के नाम से जाना जाता है, ने पश्चिमी वायु कमान के अधीन एक अग्रिम ठिकाने पर अपना प्लैटिनम जयंती समारोह मनाया। यह आयोजन 75 वर्षों की सेवा, परिचालन उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।

1951 में गठित इस स्क्वाड्रन ने अपनी लंबी परिचालन यात्रा में लड़ाकू विमानों की चार पीढ़ियों को देखा है। इसकी विमानन विरासत की शुरुआत प्रतिष्ठित स्पिटफायर से हुई और आगे चलकर यह विभिन्न युद्धक विमानों से होते हुए जगुआर डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट तक पहुँची।

प्लैटिनम जयंती के अवसर पर स्क्वाड्रन से जुड़े वर्तमान और सेवानिवृत्त एयर वारियर्स एक साथ आए। यह अवसर इकाई के गौरवपूर्ण इतिहास को स्मरण करने के साथ-साथ उन कर्मियों को याद करने का भी था, जिन्होंने राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

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इस स्मरणीय कार्यक्रम में उड़ान संचालन और युद्धक साजो-सामान का प्रदर्शन भी शामिल था। इसके माध्यम से सेवा में कार्यरत कर्मियों, पूर्व सैनिकों और अतिथियों को स्क्वाड्रन की परिचालन विरासत और वर्तमान क्षमताओं को देखने का अवसर मिला।

समारोह में नंबर 14 स्क्वाड्रन के शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी गई। सेवा के दौरान दिए गए उनके बलिदानों को याद करते हुए स्क्वाड्रन की संस्थागत पहचान और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा माना गया।

कार्यक्रम में पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल जॉर्ज थॉमस उपस्थित रहे। इसके साथ ही पूर्व वायुसेना प्रमुख, वीरता पुरस्कार प्राप्तकर्ता, वरिष्ठ सेवारत अधिकारी और स्क्वाड्रन के पूर्व सैनिक भी प्लैटिनम जयंती समारोह में शामिल हुए।

सेवारत और पूर्व एयर वारियर्स की यह उपस्थिति स्क्वाड्रन के ऐतिहासिक अतीत और वर्तमान पीढ़ी के कर्मियों के बीच एक सेतु के रूप में देखी गई। ऐसे अवसर किसी इकाई की स्मृतियों को संरक्षित रखने के साथ-साथ उसकी परंपराओं और मूल्यों को वर्तमान सेवा-रत कर्मियों तक पहुँचाने में सहायक होते हैं।

स्क्वाड्रन की चार पीढ़ियों के विमानों की यात्रा भारतीय सैन्य विमानन के पिछले 75 वर्षों के विकास को दर्शाती है। पिस्टन इंजन वाले स्पिटफायर युग से लेकर जगुआर तक, इस इकाई ने लड़ाकू तकनीक, रणनीति और परिचालन उपयोग में आए बड़े बदलावों को देखा और उनमें योगदान भी दिया।

विमानों की पीढ़ियों के बीच हुए बदलावों के साथ पायलटों और जमीनी कर्मियों की नई टोलियों को भी तकनीक और परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार स्वयं को ढालना पड़ा। इसलिए स्क्वाड्रन का इतिहास केवल विमानों की श्रृंखला नहीं, बल्कि उन पीढ़ियों की कहानी भी है जिन्होंने इसके परिचालन मानकों को बनाए रखा।

जगुआर डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट स्क्वाड्रन के युद्धक विमानन इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण रहा है। जगुआर से इसका जुड़ाव भारतीय वायु सेना के युद्धक बेड़े के आधुनिकीकरण के साथ स्क्वाड्रन की भूमिका और क्षमताओं के निरंतर विकास को भी दर्शाता है।

प्लैटिनम जयंती ने भारतीय वायु सेना में इकाई-भावना के स्थायी महत्व को भी रेखांकित किया। समय के साथ विमान, तकनीक और परिचालन परिवेश बदलते रहे, लेकिन साहस, व्यावसायिकता और समर्पण की परंपराएँ पीढ़ियों के बीच निरंतरता बनाए रखती हैं।

पूर्व वायुसेना प्रमुखों और वीरता पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की उपस्थिति ने इस स्मरणीय आयोजन को और विशेष बना दिया। इससे भारतीय वायु सेना के विभिन्न कालखंडों से जुड़े वरिष्ठ व्यक्तित्व, सेवारत कर्मी और स्क्वाड्रन के पूर्व सैनिक एक ही मंच पर आए।

पूर्व सैनिकों के लिए यह अवसर पुराने साथियों से फिर मिलने और उस इकाई की विरासत को दोबारा देखने का रहा, जिसमें उन्होंने सेवा की थी। वहीं वर्तमान एयर वारियर्स के लिए यह पिछली पीढ़ियों के अनुभव और बलिदानों से प्रेरणा लेने का अवसर बना।

स्क्वाड्रन की 75 वर्ष की यात्रा स्वतंत्रता के बाद के दौर से भारतीय वायु सेना के व्यापक परिवर्तन को भी दर्शाती है। स्पिटफायर जैसे विमानों से लेकर जगुआर जैसे उन्नत आक्रामक प्लेटफार्मों तक का सफर भारत की वायु शक्ति को आकार देने वाले तकनीकी और परिचालन बदलावों की झलक देता है।

इस प्रकार प्लैटिनम जयंती समारोह ने अतीत की स्मृति के साथ-साथ स्क्वाड्रन की परिचालन उत्कृष्टता के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को भी दोहराया। उड़ान संचालन और युद्धक साजो-सामान के प्रदर्शन ने इसकी ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान परिचालन पहचान के बीच संबंध को स्पष्ट किया।

समारोह में स्क्वाड्रन के ध्येय वाक्य “बालम जयाय” का भी उल्लेख रहा, जिसका अर्थ “शक्ति से विजय” है। यह वही भावना है जो “बुल्स” को साढ़े सात दशकों की सेवा के दौरान लगातार प्रेरित करती रही है।

नंबर 14 स्क्वाड्रन की 75 वर्षों की यात्रा चार पीढ़ियों के विमानों, साहस की अनगिनत कथाओं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी समर्पण का दस्तावेज है। प्लैटिनम जयंती ने इस विरासत का सम्मान करते हुए पश्चिमी वायु कमान के अधीन “बुल्स” की परंपराओं को और मजबूत किया।

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