रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति को बताया है कि मंत्रालय फ्रांस के नेतृत्व वाले छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम, फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम, से जुड़ने के लिए समन्वित प्रयास शुरू कर चुका है।
संसद में 7 अगस्त 2026 को प्रस्तुत कार्यवाही प्रतिवेदन में मंत्रालय ने कहा कि वह फ्रांस सरकार के नेतृत्व वाले इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए संगठित तरीके से प्रयास कर रहा है। यह प्रतिवेदन मंत्रालय की अनुदान मांगों पर पहले दिए गए सिफारिशों की प्रगति की समीक्षा से संबंधित था।
समिति ने इस कदम का स्वागत करते हुए छठी पीढ़ी के विमानों के विकास और अधिग्रहण की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी है। साथ ही उसने तैयार किए गए किसी भी खाके और संभावित समय-सीमा की जानकारी भी तलब की है।
समिति ने यह भी कहा है कि जब मंत्रालय अगला कार्यवाही विवरण प्रस्तुत करे, तब उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान यानी एएमसीए कार्यक्रम पर भी अद्यतन जानकारी दी जाए।
दो अंतरराष्ट्रीय गठबंधन और पीछे न रहने की चिंता
समिति को पहले बताया गया था कि छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर काम कर रहे दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गठबंधन हैं। इनमें एक संयुक्त सामरिक वायु कार्यक्रम के तहत ब्रिटेन, इटली और जापान का गठजोड़ है, जबकि दूसरा फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम के तहत फ्रांस और जर्मनी से जुड़ा रहा है, जिसमें शुरू में स्पेन भी शामिल था।
समिति के अनुसार, भारतीय वायु सेना इनमें से किसी एक गठबंधन से जुड़ना चाहती है और जल्द से जल्द छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर विचार शुरू करना चाहती है, ताकि भारत उन्नत हवाई युद्ध क्षमताओं के अधिग्रहण में पीछे न रह जाए।
समिति ने कहा कि लड़ाकू विमानों में तेज तकनीकी बदलाव और मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए युद्धक बेड़े का तकनीकी उन्नयन सर्वोच्च प्राथमिकता है। उसने मंत्रालय से स्पष्ट दिशा तय करने और छठी पीढ़ी के विमानों के विकास तथा अधिग्रहण की योजना को तेज करने की सिफारिश की है, ताकि आज के अत्यधिक वायु-केंद्रित आधुनिक युद्ध में भारत की हवाई क्षमता मजबूत हो सके।
एफसीएएस में फ्रांस के नेतृत्व वाली संभावना
फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम की शुरुआत 2017 में फ्रांस, जर्मनी और बाद में स्पेन की भागीदारी के साथ एक संयुक्त पहल के रूप में हुई थी। इसका उद्देश्य अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, दूर से संचालित सहयोगी प्रणालियों और नेटवर्क आधारित अभियानों के लिए एक युद्धक मेघ विकसित करना था।
इस कार्यक्रम का लक्ष्य लगभग 2040 तक फ्रांस के राफेल और यूरोफाइटर टाइफून के उत्तराधिकारी को तैयार करना था, जिसमें मानव-रहित और मानव-चालित प्लेटफॉर्म का संयुक्त उपयोग, उन्नत संवेदक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च स्तर की संपर्क-क्षमता शामिल होनी थी।
लेकिन नेतृत्व, कार्य-विभाजन, बौद्धिक संपदा और डिजाइन दर्शन को लेकर फ्रांस की दसॉ एविएशन और एयरबस के बीच औद्योगिक मतभेद लगातार बाधा बनते रहे। जून 2026 में जर्मनी ने एफसीएएस के मुख्य लड़ाकू घटक से औपचारिक रूप से अलग होने का निर्णय लिया, जिसके बाद फ्रांस के नेतृत्व में इस हिस्से को आगे बढ़ाने की स्थिति बनी। इससे नए साझेदारों के लिए संभावना भी खुली है।
भारत और फ्रांस के बीच गहरे रक्षा संबंधों को देखते हुए यह रास्ता विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फ्रांस लंबे समय से भारतीय वायु सेना को युद्धक विमान उपलब्ध कराता रहा है, जिसमें ऊरागां/तोफानी से लेकर मिराज 2000 और राफेल तक की कड़ी शामिल है।
इसके अलावा अतिरिक्त राफेल विमानों की बहु-भूमिका लड़ाकू विमान खरीद योजना, भविष्य के प्लेटफार्मों के लिए सफ्रान और भारत के जीटीआरई के बीच उन्नत इंजन विकास, तथा नौसैनिक विमानन सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा चल रही है। वर्ष 2026 में उच्च-स्तरीय भारत-फ्रांस रक्षा वार्ताओं में अगली पीढ़ी के सहयोग की संभावनाओं पर भी बात हुई है।
देशी एएमसीए कार्यक्रम पर समानांतर प्रगति
समिति को यह भी बताया गया कि उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान का डिजाइन तैयार हो चुका है और इसके उत्पादन को लेकर चर्चा जारी है। एएमसीए भारत का स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम है, जिसमें सुपरक्रूज़ क्षमता, आंतरिक हथियार कक्ष, कम दृश्यता और उन्नत संवेदक संलयन जैसी विशेषताएं होंगी।
हालिया प्रगति के तहत चयनित निजी क्षेत्र के गठबंधनों को प्रोटोटाइप विकास के लिए प्रस्ताव आमंत्रण जारी किए गए हैं। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत यह काम हो रहा है। इसके साथ ही एक समर्पित कोर एकीकरण और उड़ान परीक्षण केंद्र की आधारशिला रखी गई है।
महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों जैसे वायु प्रवेश प्रणाली, सामग्री और प्रणोदन पर भी काम जारी है। मौजूदा योजना के अनुसार प्रोटोटाइप का रोलआउट 2020 के दशक के उत्तरार्ध में, पहली उड़ान लगभग 2028 में और अंततः मध्य 2030 के दशक में सेवा में शामिल होने की संभावना है। समिति ने मंत्रालय से एएमसीए की विकास और उत्पादन स्थिति पर अद्यतन जानकारी देने को कहा है।
छठी पीढ़ी से जुड़े प्रयासों को एएमसीए के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पूरक दिशा के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे विमानों में अधिक संपर्क-आधारित संचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सहायतित निर्णय-क्षमता, उन्नत प्रभावक प्रणालियां, अनुकूलनीय इंजन और मानव-चालित विमानों का बड़ी संख्या में स्वायत्त प्रणालियों के साथ सहज एकीकरण जैसे गुणों पर जोर रहता है।
रणनीतिक आवश्यकता और आगे की प्रक्रिया
समिति का यह जोर युद्ध की बदलती प्रकृति को दर्शाता है, जिसमें वायु शक्ति, अंतरिक्ष-समर्थित नेटवर्क और बहु-क्षेत्रीय एकीकरण की भूमिका लगातार निर्णायक होती जा रही है। पड़ोसी और समकक्ष शक्तियां उन्नत लड़ाकू विमानन में बड़े निवेश कर रही हैं।
भारत की नीति स्वदेशी मंचों को समानांतर आगे बढ़ाने और तकनीकी सीमा पर चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय सहयोग तलाशने की है, ताकि दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्रभावित किए बिना क्षमता अंतर को कम किया जा सके।
अब मंत्रालय से अपेक्षा है कि वह फ्रांस के साथ चल रहे प्रयासों, प्रारंभिक चर्चाओं, संभावित कार्य-विभाजन या प्रौद्योगिकी-प्रवेश रूपरेखाओं और संभावित अधिग्रहण अथवा विकास समय-सीमा पर अधिक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दे। एएमसीए के उत्पादन नियोजन पर भी अलग से अद्यतन जानकारी मांगी जाएगी।
हालांकि किसी औपचारिक समझौते, कार्य-विभाजन आवंटन, वित्तीय प्रतिबद्धता या संयुक्त विकास अनुबंध की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन फ्रांस-नेतृत्व वाले एफसीएएस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए समन्वित प्रयास शुरू होने की आधिकारिक पुष्टि भारत की दीर्घकालिक लड़ाकू विमान योजना में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह छठी पीढ़ी के हवाई युद्ध की तैयारी की आवश्यकता और फ्रांस के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्राथमिकता दोनों को रेखांकित करता है।