चंडीगढ़, 7 अक्टूबर 2026: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं यांत्रिक अभियंता कोर (ईएमई) के एक सूबेदार को लगभग 51.44 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के छह आरोपों पर जनरल कोर्ट मार्शल के समक्ष पेश किया जाएगा। यह जानकारी सितंबर 2026 में उन्हें सौंपे गए आरोपपत्र के आधार पर सामने आई है।
इन आरोपों को अभी केवल आरोप ही माना जा रहा है। कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं हुआ है और कनिष्ठ कमीशंड अधिकारी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
अधिकारी 304 फील्ड वर्कशॉप कंपनी, 671 ईएमई बटालियन में सूबेदार क्लर्क (भंडार प्रबंधन) के रूप में तैनात थे और उनका संबंध मुख्यालय 106 इन्फैंट्री ब्रिगेड से था। कथित अपराधों के समय वे 304 फील्ड वर्कशॉप कंपनी के तकनीकी भंडार अनुभाग के प्रभारी थे।
सभी छह आरोप सेना अधिनियम, 1950 की धारा 69 के तहत लगाए गए हैं। यह धारा ऐसे व्यक्ति को, जो अधिनियम के अधीन है, भारत में किए गए किसी दीवानी अपराध के लिए सैन्य न्यायालय में मुकदमे का पात्र बनाती है। आरोपपत्र में बताए गए दीवानी अपराध का स्वरूप धोखाधड़ी है।
कथित अपराध 28 सितंबर 2024 को सक्षम प्राधिकारी के संज्ञान में आए। जनरल कोर्ट मार्शल के जरिए मुकदमा चलाने के निर्देश मेजर जनरल एन. एस. सोहल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, 71 इन्फैंट्री डिवीजन ने अनुमोदित किए हैं।
विवरण में अप्रैल 2023 से फरवरी 2024 के बीच की छह अलग-अलग रसीदों का उल्लेख है। इनमें अप्रैल-मई 2023 में क्षेत्र में 3 लाख रुपये, मई 2023 में गुवाहाटी में 15 लाख रुपये, अगस्त-दिसंबर 2023 के दौरान 5.60 लाख रुपये, सितंबर-दिसंबर 2023 के दौरान 10.13 लाख रुपये, अगस्त-सितंबर 2023 के दौरान 3.50 लाख रुपये और दिसंबर 2023 से फरवरी 2024 के दौरान 14.19 लाख रुपये शामिल हैं।
प्रकाशित विवरण के अनुसार इन छह राशियों का योग 51.42 लाख रुपये बैठता है। हालांकि दोनों रिपोर्टों में कुल राशि लगभग 51.44 लाख रुपये बताई गई है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आरोप विवरण में न तो उन नागरिकों के नाम दिए गए हैं, न ही यह बताया गया है कि कितने लोग शामिल थे, और न ही यह दर्ज है कि पैसा किस प्रकार के प्रतिनिधित्व के आधार पर लिया गया होने का आरोप है।
इसलिए, यह दावा कि ये रसीदें फर्जी सेना नौकरी के प्रस्तावों से जुड़ी थीं, वर्तमान सार्वजनिक आरोप विवरण से समर्थित नहीं है। जब तक कोई और आधिकारिक या दस्तावेजी स्रोत सामने न आए, तब तक इसे तथ्य के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।
सेना अधिनियम के तहत जनरल कोर्ट मार्शल सर्वोच्च स्तर का सैन्य न्यायालय है और यह अधिनियम के अधीन किसी भी व्यक्ति का किसी भी ऐसे अपराध के लिए विचारण कर सकता है, जो सैन्य न्यायालय में विचारणीय हो। अब सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि आरोप सिद्ध होते हैं या नहीं।