भारतीय नौसेना ने अपने स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम में एक और उपलब्धि दर्ज करते हुए डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट परियोजना के पाँचवें और अंतिम पोत डीएससी ए24 का 1 अगस्त 2026 को कोलकाता के टिटागढ़ में जलावतरण किया। इस अवसर पर श्रीमती कमल सिंह ने पोत को जल में उतारा। समारोह में वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह, कार्मिक प्रमुख, भी उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम पूर्ण नौसैनिक परंपराओं और औपचारिक भव्यता के साथ आयोजित किया गया। इसमें भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और एम/एस टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड के प्रतिनिधि मौजूद थे। यही कंपनी परियोजना के तहत सभी पाँच डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट के निर्माण के लिए जिम्मेदार है।
भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग के नौसेना नियमों और विनियमों के अनुरूप तैयार और निर्मित डीएससी ए24 कटमरैन-हुल डिजाइन वाला पोत है, जिसका अनुमानित विस्थापन 300 से 400 टन के बीच है। दोहरे पतवार वाला यह विन्यास बेहतर स्थिरता, अधिक कार्य-डेक क्षेत्र और उन्नत समुद्री क्षमता प्रदान करता है।
यह पोत गहरे और चुनौतीपूर्ण डाइविंग तथा जलमग्न सहायता अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है। डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट को डाइविंग सहायता, जलमग्न निरीक्षण, बचाव सहायता और तटीय परिचालन तैनाती जैसे अनेक विशेष कार्यों के लिए बनाया गया है।
इन पोतों के नौसेना में शामिल होने से जलमग्न रखरखाव, नौसैनिक संपत्तियों के निरीक्षण, बंदरगाह सहायता और समुद्री बचाव अभियानों में भारतीय नौसेना की क्षमता काफी बढ़ेगी। पाँच पोतों वाली इस परियोजना का पूरा होना नौसेना के जलमग्न सहायता ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इन विशेष पोतों से डाइविंग अभियानों, जलमग्न मरम्मत कार्यों, बचाव कार्यों और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभियानों में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। इससे बेड़े की परिचालन लचीलापन भी बढ़ेगा। परियोजना की एक बड़ी विशेषता इसका स्वदेशी निर्माण पर जोर है।
पोत पर लगाए गए मुख्य और सहायक उपकरणों में से लगभग 70 प्रतिशत भारतीय निर्माताओं से प्राप्त किए गए हैं। यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डीएससी ए24 का सफल जलावतरण भारत के घरेलू जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता को भी रेखांकित करता है। एम/एस टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड द्वारा निर्मित यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय शिपयार्ड अब भारतीय नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष नौसैनिक प्लेटफॉर्म तैयार करने में सक्षम हो रहे हैं।
पाँचवें और अंतिम डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट के जलावतरण के साथ भारतीय नौसेना ने अपनी जलमग्न परिचालन क्षमता को और मजबूत किया है। यह परियोजना रक्षा उत्पादन और समुद्री क्षमता विकास में आत्मनिर्भरता की दीर्घकालिक दृष्टि की दिशा में भी एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।