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डिफेन्स न्यूज़

भारतीय नौसेना ने GRSE में अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत ‘श्रुति’ लॉन्च किया

SSBCrack News Desk
Last updated: अगस्त 13, 2026 5:15 पूर्वाह्न
SSBCrack News Desk
Published: अगस्त 13, 2026
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INS Shruti

भारतीय नौसेना के बेड़े को मंगलवार को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड में अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत ‘श्रुति’ के जलावतरण से बड़ी मजबूती मिली।

स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित ‘श्रुति’ को नौसेना के मौजूदा अपतटीय गश्ती पोत बेड़े को सुदृढ़ करने के लिए तैयार किया गया है। यह समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों तथा समुद्री डकैती-रोधी अभियानों सहित कई क्षेत्रों में काम करेगी।

उप एडमिरल संजय साधू की पत्नी मणिका साधू ने युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण नियंत्रक की उपस्थिति में इस पोत को औपचारिक रूप से जल में उतारा। इस अवसर पर भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और जीआरएसई के अधिकारी मौजूद रहे।

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जलावतरण समारोह में उप एडमिरल संजय साधू ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा से आगे भारतीय नौसेना की व्यापक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नौसेना की भूमिका समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा करने और भारत से तथा भारत तक ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही में मदद करने की भी है।

उन्होंने देश में मजबूत और तकनीकी रूप से उन्नत घरेलू रक्षा निर्माण तथा जहाज निर्माण तंत्र के विकास में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उप एडमिरल साधू ने भारतीय नौसैनिक जहाज निर्माण में जीआरएसई के लंबे योगदान की सराहना की।

नौसेना के अनुसार, जीआरएसई ने कई दशकों में भारतीय नौसेना को 110 से अधिक युद्धपोत सौंपे हैं। इसके अलावा उसने भारतीय तटरक्षक बल, निर्यात ग्राहकों और अन्य देशों के लिए 800 से अधिक जहाजों और मंचों का निर्माण किया है।

‘श्रुति’ का जलावतरण जीआरएसई द्वारा 20 मई को ‘संगमित्रा’ नामक एक अन्य पोत के जलावतरण के तीन महीने से भी कम समय बाद हुआ है। अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों का निर्माण कोलकाता में जीआरएसई और गोवा में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा समानांतर रूप से किया जा रहा है।

जीआरएसई भारतीय नौसेना के 11-जहाजों वाले अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत कार्यक्रम के तहत चार एनजीओपीवी बना रहा है। यह कार्यक्रम लंबी अवधि तक चलने वाले समुद्री अभियानों, विशेषकर लंबे समय तक तैनाती और लचीले उपयोग की आवश्यकता वाले मिशनों में नौसेना की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से है।

अगली पीढ़ी के ये पोत पहले के अपतटीय गश्ती पोतों की तुलना में काफी बड़े और अधिक सक्षम हैं। ‘श्रुति’ और इस श्रेणी के अन्य जहाज लगभग 113 मीटर लंबे और 14.6 मीटर चौड़े हैं तथा इनका विस्थापन करीब 3,000 टन है।

इन पोतों को 23 नॉट तक की गति हासिल करने के लिए डिजाइन किया गया है और 14 नॉट की क्रूज़िंग गति पर इनकी सहनशीलता लगभग 8,500 समुद्री मील है। बढ़ी हुई सहनशीलता, उन्नत सेंसर और उपकरण लंबी समुद्री तैनाती के दौरान अधिक संचालनगत लचीलापन प्रदान करने में मदद करेंगे।

जीआरएसई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर पी.आर. हरि, आईएन (सेवानिवृत्त), ने कहा कि ये नए पीढ़ी के पोत पहले की सुखन्या-श्रेणी और सरयू-श्रेणी के अपतटीय गश्ती पोतों की तुलना में काफी बड़े हैं। उन्होंने इनमें लंबी सहनशीलता, उन्नत उपकरणों और सेंसर तथा बेहतर हथियार संयोजन को रेखांकित किया।

‘श्रुति’ का जलावतरण भारत में स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के विस्तार और नौसैनिक मंचों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक और मील का पत्थर है। यह परियोजना सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहलों के अनुरूप है।

लंबी सहनशीलता, आधुनिक सेंसर, बेहतर संचालन क्षमता और बहुउद्देशीय मिशन स्वरूप के साथ ‘श्रुति’ से समुद्री सुरक्षा, निगरानी और समुद्र में भारत के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

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