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डिफेन्स न्यूज़

लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल तोडकर के नेतृत्व में MCTE टीम ने जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय रेजिलिएंट एआई चुनौती जीती

News Desk
Last updated: July 17, 2026 12:56 pm
News Desk
Published: July 17, 2026
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Lt Col Amol Todkar

सैन्य दूरसंचार अभियांत्रिकी महाविद्यालय की एक टीम ने लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल तोंडकर के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय रेजिलिएंट एआई चुनौती में वैश्विक विजेता बनकर भारतीय सेना को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

Contents
  • ऑडियो-से-टेक्स्ट मॉडल संपीड़न में सफलता
  • अंतरराष्ट्रीय रेजिलिएंट एआई चुनौती
  • एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट में सम्मान
  • भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
  • ऊर्जा-कुशल कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व
  • जिम्मेदार एआई विकास में भारत की बढ़ती भूमिका
  • भारतीय सैन्य नवाचार का प्रदर्शन

टीम ने ऑडियो-से-टेक्स्ट मॉडल संपीड़न वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया। उसने मिस्त्राल एआई मॉडल का सबसे अच्छा संकुचित संस्करण विकसित किया, जिसने ऊर्जा दक्षता और सटीकता के बीच बेहतर संतुलन दिखाया तथा दुनिया भर के प्रतिभागियों की प्रविष्टियों को पीछे छोड़ दिया।

विजेताओं की घोषणा 8 जुलाई 2026 को स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में आयोजित एक समारोह में की गई। यह कार्यक्रम एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट का हिस्सा था, जिसे अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ ने 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र सहयोगियों के साथ मिलकर आयोजित किया था।

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ऑडियो-से-टेक्स्ट मॉडल संपीड़न में सफलता

ऑडियो-से-टेक्स्ट मॉडल संपीड़न श्रेणी में टीम को एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल को छोटा और अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने की चुनौती दी गई थी, जबकि बोले गए ऑडियो को लिखित पाठ में सटीक रूप से बदलने की क्षमता बनी रहे।

भारतीय सेना की इस टीम ने प्रतियोगिता में सबसे मजबूत संकुचित मिस्त्राल एआई मॉडल प्रस्तुत किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्नत एआई प्रणालियों को कम संगणनात्मक और ऊर्जा संसाधनों में भी प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।

सेना प्रशिक्षण कमान के अनुसार, टीम का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल तोंडकर ने किया और वह अपनी श्रेणी में वैश्विक विजेता बनी।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़े एआई मॉडल सामान्यतः अधिक कंप्यूटिंग शक्ति, मेमोरी और बिजली की मांग करते हैं। ऐसे मॉडलों का संपीड़न उन्हें सीमित प्रसंस्करण क्षमता वाले उपकरणों और प्रणालियों पर भी चलाने में मदद कर सकता है।

मॉडल के आकार और संगणनात्मक मांग को कम करके उसकी ऊर्जा खपत घटाई जा सकती है, प्रसंस्करण गति बढ़ाई जा सकती है और उसकी पहुँच का दायरा भी बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय रेजिलिएंट एआई चुनौती

अंतरराष्ट्रीय रेजिलिएंट एआई चुनौती का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों को अधिक टिकाऊ, अधिक कुशल और अधिक सुलभ बनाने के लिए नवाचारी तरीकों को प्रोत्साहित करना था।

यह पहल भारत और फ्रांस की सरकारों, संयुक्त राष्ट्र और इंडियाएआई मिशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी। इसमें गूगल, मिस्त्राल एआई और सरवम एआई जैसी प्रौद्योगिकी संस्थाओं का सहयोग और समर्थन भी शामिल था।

प्रतियोगिता का ध्यान बढ़ती हुई शक्तिशाली एआई प्रणालियों से जुड़े पर्यावरणीय और संगणनात्मक खर्च को कम करने की आवश्यकता पर केंद्रित था। प्रतिभागियों से अपेक्षा की गई थी कि वे चुने गए एआई मॉडलों को इस तरह अनुकूलित करें कि उनकी सटीकता और व्यावहारिक प्रदर्शन उच्च स्तर पर बना रहे।

टीम की विजयी समाधान ने ऑडियो-से-टेक्स्ट मॉडल संपीड़न वर्ग में ऊर्जा दक्षता और मॉडल सटीकता के बीच सर्वोत्तम संतुलन स्थापित किया।

एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट में सम्मान

जिनेवा में एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट के दौरान विजेता टीमों को सम्मानित किया गया। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के प्रमुख मंचों में से एक है।

यह समिट अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के नेतृत्व में आयोजित होता है और सरकारों, उद्योग, शिक्षा जगत, नागरिक समाज तथा अंतरराष्ट्रीय तकनीकी समुदाय के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाता है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि एआई सतत विकास में कैसे योगदान दे सकती है।

रेजिलिएंट एआई चुनौती के विजेताओं में भारत, फ्रांस और चीन की तीन टीमें शामिल रहीं। इनमें फ्रांस की वावस्टोन वेवलेट्स, भारत की एमसीटीई टीम और चीन की टीम लाइटमाइंड शामिल थीं।

इनके समाधान यह दिखाते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडलों को मजबूत परिचालन प्रदर्शन बनाए रखते हुए काफी अधिक ऊर्जा-कुशल बनाया जा सकता है।

भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि

यह वैश्विक जीत भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय उपलब्धि मानी जा रही है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, संचार प्रणालियों और उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियों पर बढ़ते जोर को भी रेखांकित किया गया है।

सैन्य दूरसंचार अभियांत्रिकी महाविद्यालय भारतीय सेना के प्रमुख तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। मध्य प्रदेश के महू में स्थित यह संस्थान सैन्य संचार, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, साइबर अभियानों और अन्य उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण देता है।

यह संस्थान उभरती प्रौद्योगिकियों के अध्ययन और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो सेना की भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं को समर्थन दे सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय एआई प्रतियोगिता में इस संस्थान की जीत यह दर्शाती है कि सैन्य तकनीकी संस्थाएँ केवल नई तकनीकों को अपना ही नहीं रही हैं, बल्कि उनके विकास और अनुकूलन में भी योगदान दे रही हैं।

ऊर्जा-कुशल कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीव्र विस्तार से अधिक बड़े और जटिल मॉडल विकसित हुए हैं। हालांकि ये मॉडल जटिल कार्य कर सकते हैं, लेकिन इनके लिए शक्तिशाली कंप्यूटिंग ढांचे और काफी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

मॉडल संपीड़न इस चुनौती का समाधान मॉडल के आकार और जटिलता को कम करके, उसकी मूल क्षमता को यथासंभव बनाए रखते हुए, खोजता है। संकुचित मॉडल कम मेमोरी लेते हैं, तेजी से परिणाम देते हैं और छोटे उपकरणों पर भी चल सकते हैं।

ऐसे मॉडल उन वातावरणों में भी तैनात किए जा सकते हैं, जहाँ बड़े डेटा केंद्रों या निरंतर उच्च क्षमता वाले नेटवर्क की उपलब्धता नहीं होती। सैन्य संगठनों के लिए यह क्षमता अग्रिम क्षेत्रों, मोबाइल कमांड केंद्रों, सामरिक प्लेटफार्मों और सीमित कंप्यूटिंग या संचार ढांचे वाले स्थानों में एआई प्रणालियों की तैनाती में सहायक हो सकती है।

ऑडियो-से-टेक्स्ट प्रणालियों का उपयोग प्रतिलेखन, आवाज-आधारित इंटरफेस, बहुभाषी संचार, सूचना प्रसंस्करण और बोले गए परिचालन इनपुट को खोज योग्य डिजिटल अभिलेखों में बदलने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।

एमसीटीई टीम के समाधान ने यह दिखाया कि ऐसी प्रणाली को व्यावहारिक उपयोग के लिए आवश्यक सटीकता खोए बिना अधिक कुशल बनाया जा सकता है।

जिम्मेदार एआई विकास में भारत की बढ़ती भूमिका

यह जीत ऐसे समय आई है जब भारत जिम्मेदार और समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक चर्चाओं में अपनी भागीदारी बढ़ा रहा है। इंडियाएआई मिशन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश एआई अनुसंधान, कंप्यूटिंग ढांचे, नवाचार, कौशल और राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जुड़ी अनुप्रयोगों के विकास को मजबूत कर रहा है।

सरकारों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और संयुक्त राष्ट्र संस्थानों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोगों से यह अपेक्षा की जा रही है कि एआई प्रणालियाँ न केवल शक्तिशाली, बल्कि टिकाऊ, सुलभ और विविध वातावरणों में काम करने में सक्षम बनें।

भारतीय सैन्य नवाचार का प्रदर्शन

लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल तोंडकर के नेतृत्व वाली टीम की सफलता ने एमसीटीई के तकनीकी शिक्षा और नवाचार के रिकॉर्ड में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि जोड़ी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों के सामने शीर्ष स्थान हासिल करके टीम ने मॉडल अनुकूलन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऊर्जा-कुशल कंप्यूटिंग में अपनी तकनीकी दक्षता दिखाई।

यह उपलब्धि भारतीय सेना में हो रहे उस व्यापक परिवर्तन को भी दर्शाती है, जिसके तहत वह डिजिटल प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा, संचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अपनी क्षमताएँ मजबूत कर रही है।

जिनेवा में टीम का प्रदर्शन सैन्य कर्मियों को उन्नत तकनीकी शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय नवाचार मंचों में भागीदारी के अवसर देने के महत्व को भी रेखांकित करता है।

एमसीटीई टीम की यह वैश्विक जीत केवल एक प्रतियोगिता परिणाम नहीं है। यह भारत की उस बढ़ती क्षमता का संकेत है, जिसके माध्यम से वह अधिक स्मार्ट, अधिक टिकाऊ और अधिक सुलभ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास में योगदान दे सकता है।

अपने वर्ग में सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाला संकुचित मॉडल तैयार करके लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल तोंडकर और उनकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है तथा वैश्विक मंच पर भारतीय सेना की तकनीकी क्षमता को सामने रखा है।

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