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डिफेन्स न्यूज़

आरएमएस धौलपुर ने भव्यता और देशभक्ति के साथ मनाया 64वां स्थापना दिवस

News Desk
Last updated: July 17, 2026 12:43 pm
News Desk
Published: July 17, 2026
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RMS Dholpur Celebrates 64th Raising Day with Grandeur and Patriotic Fervour

राष्ट्रीय सैन्य स्कूल, धौलपुर ने 16 जुलाई, 2026 को अपना 64वां स्थापना दिवस भव्यता, देशभक्ति के उत्साह और अनुशासित सैन्य नेतृत्व तथा जिम्मेदार राष्ट्रनिर्माताओं को तैयार करने के नये संकल्प के साथ मनाया। समारोह में कैडेट, संकाय सदस्य, अभिभावक, पूर्व छात्र, सेवा में रहे और सेवानिवृत्त सेना अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।

समारोह में प्रथम बैच के पूर्व छात्र मेजर जनरल सुरिंदर कुमार धवन, विशिष्ट सेवा पदक (सेवानिवृत्त), मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया और 1962 में स्थापना के बाद से स्कूल से जुड़े कैडेटों की पीढ़ियों के साथ इसके निरंतर संबंध को भी रेखांकित किया।

स्थापना दिवस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण 2026–27 शैक्षणिक सत्र के लिए निवेश समारोह रहा। चयनित कैडेटों को औपचारिक रूप से नेतृत्व की जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिससे स्कूल के आत्मविश्वास, अनुशासन, टीमवर्क और जवाबदेही विकसित करने के जोर को दर्शाया गया।

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नव-नियुक्त कैडेट नेताओं को ईमानदारी, निष्पक्षता और समर्पण के साथ अपने दायित्व निभाने तथा साथियों के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में भारत की समृद्ध विरासत और विविधता को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिनमें देशभक्ति और परंपरागत प्रस्तुतियों ने समारोह में रंग और उत्साह भर दिया।

अकादमिक, खेल, अनुशासन, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वार्षिक गृह पुरस्कार भी प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि, अधिकारियों, पूर्व छात्रों, संकाय सदस्यों, अभिभावकों और कैडेटों की उपस्थिति में केक काटने का समारोह भी आयोजित किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए मेजर जनरल सुरिंदर कुमार धवन ने राष्ट्र्रीय सैन्य स्कूल, धौलपुर में अपने आरंभिक वर्षों को याद किया और संस्थान के शुरुआती दिनों से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। स्कूल के प्रथम बैच के सदस्य के रूप में उन्होंने एक नवस्थापित संस्था से भारत के अग्रणी आवासीय सैन्य स्कूलों में से एक बनने तक की इसकी यात्रा पर अनोखा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

उन्होंने पिछले छह दशकों में आरएमएस धौलपुर के उल्लेखनीय रूपांतरण की सराहना की और बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढालते हुए मूल सैन्य मूल्यों को बनाए रखने के लिए संस्थान की प्रशंसा की। उन्होंने कैडेटों से अनुशासन, ईमानदारी, दृढ़ता और निस्वार्थ सेवा के शाश्वत मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया।

मेजर जनरल धवन ने कैडेटों को याद दिलाया कि सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि चरित्र की मजबूती, कर्तव्यबोध और दूसरों की सेवा करने की इच्छा से भी तय होती है। उन्होंने कहा कि स्कूल ने निरंतर ऐसे नेतृत्वकर्ता तैयार किए हैं जिन्होंने सशस्त्र बलों और कई अन्य क्षेत्रों में सम्मान के साथ देश की सेवा की है।

प्रधानाचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ) अमित शर्मा, विशिष्ट सेवा पदक, ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संस्थान के प्रगतिशील रूपांतरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्कूल ने अपनी लंबे समय से चली आ रही सैन्य अनुशासन, नेतृत्व और चरित्र निर्माण की परंपरा के साथ आधुनिक शैक्षिक पद्धतियों का सफलतापूर्वक समन्वय किया है।

अब पाठ्यक्रम में कौशल शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम, साहसिक गतिविधियां, सामुदायिक सेवा, अध्ययन भ्रमण और प्रौद्योगिकी-सक्षम कक्षा शिक्षण शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य कैडेटों का समग्र विकास सुनिश्चित करना और उन्हें भविष्य की शैक्षणिक, व्यावसायिक तथा सामाजिक चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

प्रधानाचार्य ने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल पुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कैडेटों को आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान, टीम में काम करने और तेजी से बदलती दुनिया के अनुरूप व्यावहारिक कौशल विकसित करने के अवसर मिलने चाहिए।

उन्होंने कहा कि साहसिक प्रशिक्षण और सामुदायिक सेवा गतिविधियां विद्यार्थियों में साहस, सहानुभूति, अनुकूलनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी भी विकसित करती हैं। उन्होंने स्कूल में किए गए महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा विकास का भी उल्लेख किया, जिसके तहत शैक्षणिक सुविधाओं, खेल अवसंरचना और प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण वातावरण को सुदृढ़ किया गया है।

आरएमएस धौलपुर में खेल, शारीरिक फिटनेस और बाह्य प्रशिक्षण पर भी मजबूत जोर दिया जाता है, जो संस्थान के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। इन सुविधाओं से कैडेट प्रतिस्पर्धी खेलों में भाग लेने के साथ-साथ सहनशक्ति, आत्मविश्वास और टीम भावना भी विकसित करते हैं।

प्रधानाचार्य ने अकादमिक, खेल और प्रतियोगी परीक्षाओं में स्कूल की हालिया उपलब्धियों को भी सामने रखा। आरएमएस धौलपुर के कैडेटों ने राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, जिससे उनके अनुशासन, एकाग्रता और तकनीकी दक्षता का परिचय मिलता है।

स्कूल ने स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया बॉक्सिंग चैंपियनशिप और इंटर राष्ट्र्रीय सैन्य स्कूल पेंटैंगुलर मीट में भी पहचान हासिल की है। इन प्रतियोगिताओं में कैडेटों की निरंतर सफलता संस्थान द्वारा दिए जाने वाले सुनियोजित प्रशिक्षण, पेशेवर कोचिंग और समर्पित मार्गदर्शन को दर्शाती है।

आरएमएस धौलपुर ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी लिखित परीक्षा और सेवाएं चयन बोर्ड प्रक्रिया में भी मजबूत प्रदर्शन जारी रखा है। संकाय सदस्य विद्यार्थियों को अधिकारी चयन के लिए आवश्यक गुण विकसित करने में शैक्षणिक मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास सहयोग और सुनियोजित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

स्कूल में तैयारी केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। कैडेटों को नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, परिस्थितिजन्य जागरूकता, शारीरिक फिटनेस और जिम्मेदारी की मजबूत भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाता है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और सेवाएं चयन बोर्ड में स्कूल के लगातार परिणाम भविष्य के सैन्य नेतृत्वकर्ता तैयार करने के उसके संस्थापक उद्देश्य को दर्शाते हैं।

1962 में स्थापित राष्ट्र्रीय सैन्य स्कूल, धौलपुर, रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय (सेना) के अधीन श्रेणी ‘ए’ संस्थान है। वर्षों में यह भारत के प्रमुख आवासीय पब्लिक स्कूलों में से एक के रूप में विकसित हुआ है।

इस संस्थान की स्थापना अनुशासित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और सशस्त्र बलों तथा राष्ट्रीय जीवन के अन्य क्षेत्रों में नेतृत्व भूमिकाओं के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। आरएमएस धौलपुर के 500 से अधिक पूर्व छात्र भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त कर चुके हैं, जबकि कई अन्य सिविल सेवाओं, शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, व्यवसाय और कई अन्य क्षेत्रों में विशिष्ट सेवा दे रहे हैं।

राष्ट्र्रीय सैन्य स्कूल, धौलपुर युवा पुरुषों और महिलाओं को जिम्मेदारी के पदों के लिए तैयार करने के अपने मिशन को आगे भी बनाए हुए है। इसकी शिक्षा पद्धति अकादमिक शिक्षण के साथ सैन्य मूल्यों, शारीरिक प्रशिक्षण, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ती है।

यह संस्थान अनुशासन और रचनात्मकता, परंपरा और नवाचार, व्यक्तिगत उपलब्धि और सामूहिक जिम्मेदारी—इन सभी को समान महत्व देता है। विकसित हो रहे पाठ्यक्रम और आधुनिक अवसंरचना के माध्यम से स्कूल 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बने रहने का प्रयास कर रहा है, बिना अपनी मूल भावना से समझौता किए।

64वें स्थापना दिवस समारोह का समापन उन मूल्यों और परंपराओं को बनाए रखने के नये संकल्प के साथ हुआ, जिन्होंने छह दशकों से अधिक समय से राष्ट्र्रीय सैन्य स्कूल, धौलपुर को परिभाषित किया है। यह अवसर स्कूल के गौरवशाली अतीत, उसकी निरंतर उपलब्धियों और राष्ट्रीय सेवा के लिए भावी पीढ़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला रहा।

जब कैडेट, शिक्षक और पूर्व छात्र इस उपलब्धि का साथ मिलकर उत्सव मना रहे थे, तब संस्थान ने अनुशासित, सक्षम और संवेदनशील नेतृत्व तैयार करने के अपने संकल्प को दोहराया। स्थापना दिवस स्कूल के इतिहास का उत्सव भर नहीं था, बल्कि युवा मनों को आकार देने, चरित्र को मजबूत करने और राष्ट्र की सेवा की प्रेरणा देने के उसके निरंतर मिशन का प्रतिबिंब भी था।

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