लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. कुशवाह, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा क्षेत्र (एमजी एंड जी क्षेत्र), ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक श्री सदानंद दाते से मुलाकात की। इस दौरान सैन्य और नागरिक सहयोग को मजबूत करने तथा आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में समन्वय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई।
यह बातचीत सैन्य-नागरिक एकीकरण की अवधारणा को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने भारतीय सेना और महाराष्ट्र पुलिस के बीच संस्थागत सहयोग को बेहतर बनाने के तरीकों पर विचार किया। चर्चा में उभरती आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और किसी भी संभावित खतरे पर त्वरित, संयुक्त प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के बीच निकट समन्वय के महत्व पर जोर दिया गया।
बैठक में दोनों अधिकारियों ने संयुक्त तैयारी, सूचना साझा करने और समन्वित योजना को मजबूत करने पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इसके साथ ही आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा हुई, ताकि बदलते सुरक्षा वातावरण में सैन्य और नागरिक सुरक्षा संगठनों के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
इस मुलाकात ने राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा और आंतरिक स्थिरता बनाए रखने के लिए भारतीय सेना और महाराष्ट्र पुलिस की निकट साझेदारी की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। दोनों संगठनों ने निरंतर संवाद, प्रभावी संचार और एकीकृत परिचालन योजना की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न स्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. कुशवाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण के तहत नागरिक प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मजबूत साझेदारी बनाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी सैन्य-नागरिक सहयोग तैयारियों को बढ़ाता है, मजबूती को सुदृढ़ करता है और जटिल तथा बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर अधिक समन्वित प्रतिक्रिया संभव बनाता है।
यह बैठक सुरक्षा प्रबंधन में अंतर-एजेंसी सहयोग और संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण पर बढ़ते जोर को भी दर्शाती है। सशस्त्र बलों और राज्य पुलिस संगठनों के बीच मजबूत संबंधों को प्रोत्साहित करके दोनों पक्ष एक ऐसी एकीकृत सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ करना चाहते हैं, जो पारंपरिक और उभरते दोनों तरह के खतरों का सामना कर सके।
बैठक इस साझा संकल्प के साथ समाप्त हुई कि सहयोग को और मजबूत किया जाएगा, पारस्परिक कार्यक्षमता बढ़ाई जाएगी और समन्वय तंत्र को गहराया जाएगा। इससे भारतीय सेना और महाराष्ट्र पुलिस की शांति, सुरक्षा और जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।