लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, एवीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग उत्तर भारत ने कुमाऊँ कार रैली 2.0 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही उत्तराखंड के कुछ सबसे दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों से होकर एक कठिन ऊँचाई वाला सफर शुरू हुआ।
रेनॉल्ट के सहयोग से आयोजित यह रैली पिथौरागढ़ और धारचूला से होते हुए आदि कैलाश, ओम पर्वत और लिपुलेख दर्रे तक जाएगी। यह मार्ग प्रतिभागियों को दुर्गम हिमालयी भूभाग और भारत की उत्तरी सीमा के निकट स्थित सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर ले जाता है।
साहसिक और सहनशक्ति से जुड़े इस आयोजन का उद्देश्य दूरस्थ सीमावर्ती गाँवों के विकास और पुनर्जीवन की ओर ध्यान आकर्षित करना भी है। इसके जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने और सीमांत क्षेत्रों से पलायन रोकने के प्रयासों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
उत्तराखंड के सीमावर्ती गाँव लंबे समय से कठिन भूगोल, सीमित आर्थिक अवसरों और निवासियों के बड़े कस्बों तथा शहरों की ओर पलायन जैसी चुनौतियों का सामना करते रहे हैं। पर्यटन को प्रोत्साहित करने और बेहतर संपर्क व्यवस्था से इन क्षेत्रों में आजीविका के अवसर पैदा किए जा सकते हैं तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
यह रैली ऊँचे हिमालय में रहने वाले समुदायों की दृढ़ता और भारत की सीमाओं के साथ बसे जीवंत आबादी वाले क्षेत्रों को बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करती है।
पिथौरागढ़, धारचूला, आदि कैलाश, ओम पर्वत और लिपुलेख दर्रे से गुजरते हुए कुमाऊँ कार रैली 2.0 साहसिकता के साथ मजबूत सीमावर्ती समुदायों, सतत विकास और अधिक सुदृढ़ सीमा क्षेत्र का संदेश देने का प्रयास करती है।