सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नैयर, पूर्व महानिदेशक, असम राइफल्स ने कॉलेज ऑफ डिफेन्स मैनेजमेंट, इंटीग्रेटेड डिफेन्स स्टाफ में उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम-22 के प्रतिभागियों को भारत के पूर्वोत्तर में बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर संबोधित किया।
अपने संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नैयर ने बांग्लादेश और म्यांमार के साथ भारत की सीमाओं पर विकसित हो रही सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों और देश की पूर्वी सीमाओं पर उभर रही सुरक्षा चिंताओं पर प्रकाश डाला।
असम राइफल्स के पूर्व महानिदेशक ने पूर्वोत्तर के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए इस क्षेत्र के समकालीन सुरक्षा वातावरण के लिए संदर्भ प्रस्तुत किया। उन्होंने इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाली भू-राजनीतिक और सुरक्षागत परिस्थितियों की भी समीक्षा की।
इस संबोधन ने उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम-22 के प्रतिभागियों को उन कारकों की समझ दी, जो पूर्वोत्तर की सुरक्षा स्थिति को आकार दे रहे हैं। चर्चा में क्षेत्र के ऐतिहासिक संबंधों के साथ-साथ बांग्लादेश और म्यांमार के साथ भारत की सीमाओं पर सक्रिय भू-राजनीतिक और सुरक्षागत परिस्थितियाँ शामिल रहीं।
लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नैयर ने बदलते सुरक्षा वातावरण के प्रति भारत की भावी रणनीतिक प्रतिक्रियाओं पर भी दृष्टिकोण रखा। उनका संबोधन उन बदलते प्रतिमानों को समझने की आवश्यकता पर केंद्रित रहा, जो इस क्षेत्र और भारत की रणनीतिक सोच को प्रभावित कर रहे हैं।
कॉलेज ऑफ डिफेन्स मैनेजमेंट, इंटीग्रेटेड डिफेन्स स्टाफ में हुई इस बातचीत में पूर्वोत्तर की बदलती सुरक्षा स्थिति पर एक पूर्व वरिष्ठ असम राइफल्स अधिकारी के अनुभव और उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम-22 के प्रतिभागियों की चर्चा एक साथ आई।
बांग्लादेश और म्यांमार के साथ भारत की सीमाओं पर केंद्रित यह चर्चा पूर्वोत्तर के व्यापक सुरक्षा परिवेश में पूर्वी पड़ोस के महत्व को भी सामने लाती है। संबोधन में उठाए गए ऐतिहासिक संबंधों और भू-राजनीतिक कारकों ने क्षेत्र की बदलती सुरक्षा गतिशीलता को समझने के लिए संदर्भ प्रदान किया।
लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नैयर का संबोधन भारत की रणनीतिक प्रतिक्रियाओं पर एक दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ समाप्त हुआ। इससे उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम-22 के प्रतिभागियों को बदलते सुरक्षा प्रतिमानों और क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों की समझ मिली।