उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से आई यह कहानी गर्व और प्रेरणा से भरी है, जहां दो बहनों ने अपने बचपन की अनुशासन, NCC प्रशिक्षण, शैक्षणिक उत्कृष्टता और पारिवारिक मूल्यों को राष्ट्रसेवा की एक असाधारण यात्रा में बदल दिया। सब-लेफ्टिनेंट आस्था त्यागी और सब-लेफ्टिनेंट आकांक्षा त्यागी दोनों भारतीय नौसेना में शामिल हुई हैं और लगातार वर्षों में प्रतिष्ठित सफेद वर्दी पहनकर अपने परिवार के लिए अपार गर्व का क्षण लेकर आई हैं।
यह उपलब्धि तब और विशेष हो गई जब छोटी बहन सब-लेफ्टिनेंट आकांक्षा त्यागी ने भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला से पास आउट किया और अपनी बड़ी बहन सब-लेफ्टिनेंट आस्था त्यागी के पदचिह्नों पर चलीं। आस्था पिछले वर्ष मई में इसी अकादमी से पास आउट हुई थीं। उनके माता-पिता, अधिवक्ता सुषमा त्यागी और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के वरिष्ठ कमांडेंट, के लिए यह क्षण केवल निजी खुशी नहीं, बल्कि संकल्प, साहस और सशक्तीकरण का सशक्त प्रतीक है।
दोनों बहनें अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जिन्होंने सशस्त्र बलों में प्रवेश किया। उनकी यात्रा उन असंख्य युवतियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है जो वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं। शिक्षा, खेल, NCC, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और स्वतंत्र निर्णय लेने को प्रोत्साहित करने वाले परिवार में पली-बढ़ी आस्था और आकांक्षा ने अनुशासन और उद्देश्य की मजबूत भावना के साथ अपना मार्ग बनाया।
सब-लेफ्टिनेंट आस्था त्यागी ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के डीएवी पब्लिक स्कूल, श्रेष्ठा विहार से पूरी की। इसके बाद उन्होंने विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज से बीए एलएलबी किया और सीएलएटी पीजी भी उत्तीर्ण की। उन्होंने राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटियाला से संवैधानिक कानून में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। विधि क्षेत्र में उनकी शैक्षणिक यात्रा अंततः भारतीय नौसेना के जेएजी संवर्ग में प्रवेश का आधार बनी।
आस्था की NCC यात्रा ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ने में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने ओटीए अटैचमेंट कैंप और संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर सहित कई शिविरों में भाग लिया। उनकी सबसे यादगार उपलब्धि 2018 के गणतंत्र दिवस शिविर में रही, जहां उन्हें दिल्ली निदेशालय से सर्वश्रेष्ठ कैडेट एसडब्ल्यू आर्मी चुना गया। बाद में उन्होंने 2018 में रूस में युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जो उनके नेतृत्व गुणों और आत्मविश्वास का दुर्लभ सम्मान था।
उन्होंने दिल्ली निदेशालय से एनसीसी सी प्रमाणपत्र ए ग्रेड के साथ भी प्राप्त किया। NCC के साथ-साथ आस्था ने एनएसएस में भी सक्रिय भागीदारी निभाई और विश्वविद्यालय की महिला फुटबॉल टीम का हिस्सा रहीं। उनका खेल जीवन स्कूल के दिनों से शुरू हुआ, जहां उन्होंने बैडमिंटन, बास्केटबॉल, एथलेटिक्स, लंबी कूद, हैंडबॉल, टचबॉल और अन्य खेलों में हिस्सा लिया। उन्होंने स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, वरिष्ठ और कनिष्ठ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तथा कई राज्य और क्षेत्रीय स्तर की स्पर्धाओं में दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया।
वर्दी तक पहुंचने की उनकी यात्रा असाधारण निरंतरता और संकल्प से भरी रही। सब-लेफ्टिनेंट आस्था त्यागी ने सात एसएसबी साक्षात्कार दिए और नौसेना तथा सेना के विभिन्न एसएसबी में सात सिफारिशें प्राप्त कीं। उन्होंने आर्मी जेएजी प्रवेश में अखिल भारतीय रैंक 4 भी हासिल की। हालांकि उनका झुकाव भारतीय नौसेना की सफेद वर्दी की ओर था और उन्होंने जेएजी संवर्ग के माध्यम से सेवा में शामिल होने का निर्णय लिया।
आस्था की सफलता जल्द ही उनकी छोटी बहन सब-लेफ्टिनेंट आकांक्षा त्यागी के लिए प्रेरणा बन गई। बड़ी बहन की यात्रा से प्रेरित होकर आकांक्षा ने भी कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के उसी मार्ग को अपनाया। वह भारतीय नौसेना में नौसैनिक आयुध निरीक्षक संवर्ग में शामिल हुईं और इस तरह सशस्त्र बलों से परिवार के गौरवशाली जुड़ाव को आगे बढ़ाया।
सब-लेफ्टिनेंट आकांक्षा त्यागी ने भी अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के डीएवी पब्लिक स्कूल, श्रेष्ठा विहार से पूरी की। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान में बीटेक किया, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन अधिगम में विशेषता थी। नौसैनिक आयुध निरीक्षक संवर्ग में उनका चयन आधुनिक भारतीय नौसेना में प्रौद्योगिकी, नवाचार और तकनीकी विशेषज्ञता के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
अपनी बड़ी बहन की तरह आकांक्षा का भी NCC से मजबूत संबंध रहा। उन्होंने CATC और Pre-RDC सहित विभिन्न शिविरों में भाग लिया और एनसीसी सी प्रमाणपत्र ए ग्रेड के साथ सफलतापूर्वक प्राप्त किया। उनकी NCC यात्रा ने उन्हें आत्मविश्वास, नेतृत्व, अनुशासन और वर्दी में देश की सेवा करने की गहरी इच्छा विकसित करने में मदद की।
आकांक्षा ने भी बचपन से ही खेलों में उत्कृष्टता दिखाई। बैडमिंटन में उनकी रुचि विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसे उन्होंने पूरे समर्पण और दृढ़ता के साथ अपनाया। उन्होंने बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीता और एसजीएफआई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी प्रतिनिधित्व किया। बैडमिंटन के अलावा उन्होंने एसजीएफआई और कनिष्ठ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में टचबॉल खेला, जिससे अनुशासन, जुझारूपन और टीम भावना के साथ प्रतिस्पर्धा करने की उनकी क्षमता सामने आई।
त्यागी बहनों की इस प्रेरक सफलता के पीछे एक ऐसा परिवार है जिसने बेटियों को सशक्त बनाने में विश्वास रखा। उनकी मां सुषमा त्यागी पिछले 25 वर्षों से दिल्ली उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रही हैं और एक योग्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ भी हैं। वे स्वयं NCC कैडेट रही हैं, गणतंत्र दिवस शिविर में शामिल हुईं, एनसीसी सी प्रमाणपत्र ए ग्रेड के साथ प्राप्त किया, और राष्ट्रीय स्तर की नेटबॉल खिलाड़ी तथा राज्य स्तर की क्रिकेट खिलाड़ी भी रहीं। वे एनएसएस से भी सक्रिय रूप से जुड़ी रहीं।
उनके पिता, जो CISF में वरिष्ठ कमांडेंट हैं, वर्दी में एक प्रतिष्ठित करियर रखते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड में सेवा दी है और राष्ट्रपति पुरस्कार तथा डीजी डिस्क प्राप्त कर चुके हैं। अनुशासन, लोकसेवा और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के ऐसे वातावरण में पालन-पोषण ने स्वाभाविक रूप से दोनों बेटियों की सोच को आकार दिया।
त्यागी परिवार उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का रहने वाला है। आस्था और आकांक्षा अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जिन्होंने सशस्त्र बलों में प्रवेश किया, लेकिन सेवा, देशभक्ति और धैर्य के मूल्य उनके पालन-पोषण में गहराई से रचे-बसे थे। उनके माता-पिता ने सुनिश्चित किया कि दोनों बेटियों को पढ़ाई, खेल, NCC, एनएसएस और नेतृत्व गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, साथ ही अनुशासन और संतुलन का महत्व भी सिखाया जाए।
इस कहानी को और खास बनाता है दोनों बहनों के बीच का रिश्ता। आस्था की बार-बार मिली एसएसबी सिफारिशें, उनका मजबूत शैक्षणिक रिकॉर्ड और अंततः भारतीय नौसेना में शामिल होने का निर्णय आकांक्षा के लिए प्रेरणा बना। बड़ी बहन की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रही, बल्कि छोटी बहन के लिए मार्गदर्शक प्रकाश बन गई।
आज जब दोनों बहनें भारतीय नौसेना की सफेद वर्दी पहनती हैं, उनकी यात्रा देशभर के युवा रक्षा अभ्यर्थियों को एक सशक्त संदेश देती है। यह साबित करती है कि सशस्त्र बलों में सफलता वर्षों की तैयारी, धैर्य, मेहनत, असफलताओं, प्रयासों, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और अडिग विश्वास से बनती है।
NCC कैडेट से नौसैनिक अधिकारी बनने तक का उनका सफर कई युवाओं को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और सम्मान के साथ राष्ट्र की सेवा करने की प्रेरणा देता रहेगा। दो बहनें, एक सपना और एक गर्वीली वर्दी—आस्था और आकांक्षा त्यागी की कहानी साहस, समर्पण और नए भारत की भावना का चमकता उदाहरण है।