नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने आधिकारिक आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अपनाया है। उन्होंने 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायु सेना के 29वें प्रमुख का पदभार संभाला था। एएनआई और राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों में उनके इस कदम को पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह ली है, जो 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। शनिवार और रविवार को सामने आए दृश्यों में नए वायु सेना प्रमुख काले रंग की इलेक्ट्रिक एसयूवी से आते-जाते दिखे। वाहन पर वायु सेना के आधिकारिक चिह्न थे। हालांकि, सार्वजनिक रूप से जारी आधिकारिक जानकारी में इसके मॉडल की पुष्टि नहीं की गई है।
9 दिसंबर 1966 को जन्मे एयर चीफ मार्शल दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को वायु सेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन मिला था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 69वें कोर्स, बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। वह प्रायोगिक परीक्षण पायलट और योग्य उड़ान प्रशिक्षक भी हैं। उनका उड़ान अनुभव 3,300–3,500 घंटे से अधिक बताया गया है। उन्होंने मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करणों, जगुआर, तेजस, हॉक और परिवहन विमानों को उड़ाया है।
अपने करियर में वह मिराज-2000 स्क्वाड्रन और वायु सेना स्टेशन बीदर की कमान संभाल चुके हैं। वह दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर, दक्षिण पश्चिमी वायु कमान में वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी, डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ और मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के अधीन चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर थे। वायु सेना प्रमुख बनने से पहले उन्होंने उप वायु सेना प्रमुख के रूप में सेवा दी। उनके अभियानगत अनुभव में करगिल संघर्ष का ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर शामिल हैं। उन्हें वायु सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
भारतीय वायु सेना कार्बन उत्सर्जन घटाने और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ा रही है। नवंबर 2022 में तत्कालीन वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने वायु भवन में टाटा नेक्सॉन ईवी के पहले बेड़े को हरी झंडी दिखाई थी। इन वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में इस्तेमाल के लिए शामिल किया गया था। इसके साथ चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार करने और पारंपरिक वाहनों की जगह अधिक इलेक्ट्रिक वाहन लाने की योजना भी थी।
वायु सेना प्रशासनिक कार्यों में टाटा नेक्सॉन ईवी का इस्तेमाल कर रही है। पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी पर्यावरण संरक्षण और सैन्य विरासत को बढ़ावा देने के लिए ‘शौर्य भारत ईवी ड्राइव’ को हरी झंडी दिखाई थी।
सशस्त्र बलों में भी शांति वाले सैन्य स्टेशनों पर गैर-लड़ाकू कार्यों के लिए इलेक्ट्रिक बसों और हल्के वाहनों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और परिचालन खर्च कम करना है। यह प्रयास भारत के दीर्घकालिक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के भी अनुरूप है।