दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में शुक्रवार शाम आतंकियों ने दो गैर-स्थानीय श्रमिकों पर गोलीबारी कर दी, जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, यह हमला कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों ने दोनों मजदूरों को निशाना बनाया। दोनों को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में एक ने दम तोड़ दिया। दूसरे घायल को आगे के उपचार के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज, अनंतनाग भेज दिया गया।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और हमलावरों की तलाश के लिए अभियान शुरू कर दिया। शुरुआती रिपोर्टों के समय पीड़ितों की पहचान की पुष्टि नहीं हुई थी। हमले के सही क्रम, इस्तेमाल किए गए हथियारों और जिम्मेदारी के दावे से जुड़ी जानकारी भी तत्काल उपलब्ध नहीं थी।
आधिकारिक पुष्टि और तत्काल प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आधिकारिक माध्यमों से इस घटना की पुष्टि की। एशियन न्यूज इंटरनेशनल के हवाले से पुलिस ने कहा कि केलम इलाके में आतंकियों की गोलीबारी में एक गैर-स्थानीय श्रमिक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है।
डेली एक्सेलसियर ने भी बताया कि केलम में हुए हमले में दोनों श्रमिक घायल हुए थे, जिन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया। वहां एक की मौत हो गई, जबकि दूसरे को सरकारी मेडिकल कॉलेज, अनंतनाग भेज दिया गया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र को सील कर व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया।
यह घटना शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 की शाम हुई। तत्काल बाद किसी भी समूह ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली। क्षेत्र में हाल के कई नागरिक लक्षित हमलों की तरह इस मामले में भी शुरुआत में किसी संगठन की ओर से दावा सामने नहीं आया।
गैर-स्थानीय श्रमिकों पर हमलों का संदर्भ
जम्मू-कश्मीर, विशेषकर दक्षिण कश्मीर के कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग जैसे जिलों में गैर-स्थानीय मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाकर की जाने वाली हत्याएं आतंकवादी समूहों की एक पुरानी रणनीति रही हैं। ये श्रमिक बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों से आते हैं और बागानों, निर्माण कार्यों, ईंट भट्टों तथा अन्य मौसमी और अकुशल कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे हमलों का उद्देश्य डर पैदा करना, आर्थिक गतिविधि को बाधित करना और घाटी में बाहर से आने वाले कामगारों को हतोत्साहित करना रहा है। पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 2019 का कुलगाम नरसंहार शामिल है, जब पश्चिम बंगाल के पांच प्रवासी मजदूरों को कतार में खड़ा कर केलम से जुड़े किटरसू इलाके में गोली मार दी गई थी। इसके बाद के वर्षों में भी कुलगाम और आसपास के जिलों में छोटे-बड़े कई हमलों में गैर-स्थानीय श्रमिक मारे गए या घायल हुए।
2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कई चरणों में यह प्रवृत्ति और तेज हुई। लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और द रेजिस्टेंस फ्रंट से जुड़े समूह अक्सर प्रवासी मजदूरों, ट्रक चालकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं जैसे असुरक्षित नागरिक लक्ष्यों को निशाना बनाते रहे हैं।
दक्षिण कश्मीर की सुरक्षा स्थिति
कुलगाम जिला आतंकवाद-रोधी अभियानों का केंद्र बना हुआ है। हाल के हफ्तों में जिले में सुरक्षा पहले से और कड़ी कर दी गई थी, क्योंकि 22 जुलाई 2026 को अनंतनाग में लक्षित हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी गई थी। उस घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग सहित प्रमुख मार्गों पर कई चौकियां और तलाशी अभियान जारी थे।
शुक्रवार को मजदूरों पर हुआ हमला नागरिकों को निशाना बनाकर की गई हिंसा की सूची में एक और घटना जोड़ता है। साथ ही सुरक्षा बल दक्षिण कश्मीर में बचे हुए आतंकवादी मॉड्यूलों और भूमिगत कार्यकर्ताओं के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए हैं।
वर्तमान स्थिति
31 जुलाई 2026 की शाम तक उपलब्ध नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, एक गैर-स्थानीय मजदूर की मौत की पुष्टि हो चुकी थी। दूसरा सरकारी मेडिकल कॉलेज, अनंतनाग में उपचाराधीन था और शुरुआती जानकारियों में उसकी हालत गंभीर बताई गई थी।
दोनों पीड़ितों की पहचान आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई थी। केलम और आसपास के क्षेत्रों में घेराबंदी और तलाशी अभियान जारी था, जबकि इस विशेष हमले से जुड़े किसी गिरफ्तारी या मुठभेड़ की तत्काल सूचना नहीं थी।
पुलिस और अस्पताल अधिकारियों से आगे की जानकारी की प्रतीक्षा है। जांच आगे बढ़ने के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा सकती है। अधिकारियों ने अपुष्ट सूचनाओं को फैलाने से बचने की अपील की है।