देहरादून, 16 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अग्निपथ योजना के पहले बैच के दो अग्निवीरों को प्रांतीय सशस्त्र पुलिस बल (पीएसी) की 40वीं बटालियन में शामिल करने की मंजूरी दे दी है। इन दोनों कर्मियों का भारतीय सेना में चार साल का कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा होने वाला है और इसके बाद उन्हें सेवा से मुक्त किया जाएगा। यह नियुक्ति बटालियन में उपलब्ध रिक्त पदों के विरुद्ध की जाएगी।
यह निर्णय भारत सरकार के एक संयुक्त सचिव की ओर से भेजे गए आधिकारिक पत्र के बाद लिया गया। पत्र में उत्तराखंड सरकार को बताया गया था कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती पहले बैच के अग्निवीर नवंबर 2026 में अपनी सेवा पूरी करेंगे और विशेष रूप से उत्तराखंड के दो अग्निवीरों को समायोजित करने का अनुरोध किया गया था। इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें 40वीं पीएसी बटालियन में तैनात करने की अनुमति दी।
यह राज्य सरकार की वर्दीधारी सेवाओं में अग्निवीरों की पहली नियुक्ति है। यह कदम अग्निपथ योजना के उस सेवा-पश्चात रोजगार ढांचे के अनुरूप है, जिसे जून 2022 में सशस्त्र बलों में निश्चित अवधि की भर्ती के लिए शुरू किया गया था।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अग्निपथ योजना देश के युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा की भावना विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में सेवा के दौरान अग्निवीर जो कौशल, अनुभव और अनुशासन अर्जित करते हैं, वह राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार इन अग्निवीरों के योगदान और क्षमता का गहरा सम्मान करती है और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि जिन्होंने देश की सेवा की है, उन्हें राज्य की सेवा में आगे भी अवसर मिलें। इससे उत्तराखंड को उनके सैन्य अनुभव, अनुशासन और दक्षता का लाभ मिल सकेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में हरिद्वार में हुई बैठक में यह निर्णय लिया था कि वर्दीधारी समूह ‘ग’ पदों की सीधी भर्ती में अग्निवीरों के लिए आरक्षित 10 प्रतिशत सीटों पर नियुक्ति के लिए सेवानिवृत्त अग्निवीरों को लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षण से छूट दी जाएगी। इन पदों में पुलिस, पीएसी, वन रक्षक और जेल वार्ड के पद शामिल हैं।
यह मंजूरी केंद्र और राज्य सरकार के बीच उस समन्वय को दर्शाती है, जिसके तहत निश्चित अवधि की सैन्य सेवा पूरी करने वाले कर्मियों को आगे सेवा के अवसर दिए जा रहे हैं। यह नियुक्ति उपलब्ध रिक्तियों और लागू सेवा आवश्यकताओं पर निर्भर रहेगी। राज्य सरकार ने युवाओं के समर्थन और राष्ट्रसेवा करने वालों के योगदान को मान्यता देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।