नाशिक के भोंसला मिलिट्री स्कूल के 12वीं कक्षा के 60 विद्यार्थियों ने 29 अक्टूबर 2026 को सिकंदराबाद स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (एमसीईएमई) का दौरा किया। इस शैक्षणिक भ्रमण में उन्होंने भारतीय सेना की तकनीकी प्रशिक्षण सुविधाओं को देखा और ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा रोबोटिक्स जैसी उभरती सैन्य तकनीकों के बारे में जाना।
विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और उन्नत रक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में सेना की क्षमताओं से परिचित कराया गया। उन्हें बताया गया कि एमसीईएमई, कोर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों (जेसीओ) और तकनीशियनों को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण देता है।

इस दौरान संस्थान की आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, स्वदेशी क्षमताएं विकसित करने की पहलों और अत्याधुनिक सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। ये सुविधाएं सेना को अभियानों के लिए तैयार रखने में भूमिका निभाती हैं।

विद्यार्थियों ने संस्थान के विभिन्न संकायों, उत्कृष्टता केंद्रों और उन्नत तकनीकी प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया। इनमें ड्रोनालय, यंत्रालय और रचनालय शामिल थे, जहां उभरती तकनीकों और आधुनिक सैन्य अभियानों में उनके संभावित इस्तेमाल से परिचित कराया गया।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने ड्रोन, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, विमानन प्रणालियों तथा उन्नत संचार तकनीकों को करीब से जाना। उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि तकनीकी नवाचार किस तरह युद्ध के तौर-तरीकों को बदल रहे हैं और सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताएं बढ़ा रहे हैं।
एमसीईएमई भारतीय सेना के प्रमुख तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां जटिल सैन्य उपकरणों और प्रणालियों के रखरखाव, मरम्मत तथा तकनीकी सहायता के लिए जरूरी विशेषज्ञता विकसित की जाती है। संस्थान अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आधुनिक इंजीनियरिंग पद्धतियों और नई तकनीकों को शामिल कर तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को भी बढ़ावा देता है।
इस प्रेरक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय रक्षा में विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग की बढ़ती भूमिका समझाना था। साथ ही उन्हें भारतीय सशस्त्र बलों में करियर बनाने और रक्षा तकनीक, इंजीनियरिंग तथा नवाचार के क्षेत्र में अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित करना भी कार्यक्रम का हिस्सा था।