नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2026: सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने भारतीय नौसेना के लिए आठ अगली पीढ़ी के कॉर्वेट युद्धपोत बनाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस पर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।
सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने एएनआई को बताया कि इन युद्धपोतों के निर्माण के लिए अगले कुछ दिनों में कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) के साथ अनुबंध किए जाएंगे। जीआरएसई पांच कॉर्वेट बनाएगा, जबकि बाकी तीन का निर्माण जीएसएल करेगा।
मई 2025 में वाणिज्यिक बोलियां खुलने पर जीआरएसई सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी एल1 बनी थी। जीएसएल भी प्रति युद्धपोत उसी लागत पर निर्माण करेगा। नौसेना को पहला पोत 2030 तक मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों शिपयार्ड निर्माण में तेजी लाकर तय समय से पहले आपूर्ति की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
निगरानी से लेकर तटीय रक्षा तक की भूमिका
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये कॉर्वेट निगरानी, अन्य पोतों की सुरक्षा में एस्कॉर्ट ड्यूटी, प्रतिरोधक भूमिका, सतही युद्धपोत समूह के अभियान, लक्ष्य की तलाश कर उस पर हमला करने और तटीय रक्षा जैसे कार्य कर सकेंगे। इनका निर्माण भारतीय नौसेना की ओर से विकसित नए डिजाइन पर होगा, जिसमें नवीनतम पोत निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
हालिया रिपोर्टों में इन युद्धपोतों का विस्थापन लगभग 2,000 टन और अधिकतम गति करीब 30 नॉट बताई गई है। इन्हें सेवा में मौजूद पुराने खुकरी श्रेणी और कोरा श्रेणी के कॉर्वेट की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा है। परियोजना से हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की तैनाती और अभियान संबंधी विकल्प बढ़ने की उम्मीद है। यह सरकार की ‘सागर’ पहल—क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास—को भी आगे बढ़ाएगी।
2022 में मिली थी शुरुआती मंजूरी
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने जून 2022 में आठ अगली पीढ़ी के कॉर्वेट की खरीद की आवश्यकता को मंजूरी दी थी। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 36,000 करोड़ रुपये थी। मई 2025 में जीआरएसई के एल1 घोषित होने के बाद 2026 में कीमतों पर बातचीत पूरी हुई।
नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) ने युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो के साथ मिलकर इनके मॉडल का जलगतिकीय परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। सीसीएस की मंजूरी के साथ अनुबंधों पर हस्ताक्षर से पहले की अंतिम बड़ी बाधा दूर हो गई है।
इन अनुबंधों से जीआरएसई और जीएसएल, दोनों के पास निर्माण के लिए उपलब्ध ऑर्डर बढ़ेंगे। रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर भारत के तहत बनने वाले ये बहुउद्देशीय युद्धपोत तट के निकट और खुले समुद्र, दोनों में अभियानों के लिए नौसेना के बेड़े का हिस्सा होंगे।