काउंटर इंसर्जेंसी और जंगल वारफेयर स्कूल, वैरेंग्टे में आयोजित लो इंटेंसिटी कॉन्फ्लिक्ट ऑपरेशंस पाठ्यक्रम 16 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ। इस पाठ्यक्रम में मराठा लाइट इन्फैंट्री के हवलदार पलवे अजय को सर्वश्रेष्ठ छात्र घोषित किया गया।
यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय सेना के कर्मियों के साथ-साथ छह मित्र देशों के 10 प्रशिक्षुओं के लिए भी आयोजित किया गया। इनमें आइवरी कोस्ट, बांग्लादेश, पेरू, मॉरीशस, बेनिन और गुयाना के प्रशिक्षु शामिल थे।
समापन समारोह में सीआईजेडब्ल्यूएस के कमांडेंट मेजर जनरल कुलवीर सिंह, एसएम**, ने आतंकवाद-रोधी वातावरण में सफलता के लिए आवश्यक प्रमुख सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने खुफिया-आधारित सटीक अभियानों, आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग और स्थानीय आबादी का विश्वास जीतने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पाठ्यक्रम का मुख्य फोकस कम तीव्रता वाले संघर्ष और आतंकवाद-रोधी अभियानों से जुड़ी परिचालन चुनौतियों पर था। इसके माध्यम से प्रशिक्षुओं को जटिल सुरक्षा परिस्थितियों में आवश्यक कौशल और तरीकों का विशेष अनुभव प्रदान किया गया।
विदेशी प्रशिक्षुओं की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय आयाम भी दिया। इससे पेशेवर संवाद और सैन्य अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर मिला।
हवलदार पलवे अजय का सर्वश्रेष्ठ छात्र चुना जाना प्रशिक्षण की समाप्ति का प्रमुख क्षण रहा। मराठा लाइट इन्फैंट्री के सदस्य के रूप में उनकी उपलब्धि ने ऐसे विशेष प्रशिक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया, जो कर्मियों को कठिन परिचालन परिस्थितियों के लिए तैयार करता है।
अपने समापन संबोधन में मेजर जनरल कुलवीर सिंह ने कहा कि आतंकवाद-रोधी अभियानों में केवल पारंपरिक सैन्य क्षमताएं पर्याप्त नहीं होतीं। खतरों की पहचान और सटीक कार्रवाई के लिए विश्वसनीय खुफिया जानकारी आवश्यक होती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सशस्त्र तत्व नागरिक आबादी के बीच सक्रिय हो सकते हैं।
उन्होंने आधुनिक प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी बल दिया। उनके अनुसार तकनीकी क्षमताएं निगरानी, खुफिया संग्रह, संचार और स्थिति की समझ को बेहतर बनाती हैं, जिससे सैनिक उभरते खतरों का अधिक सटीक ढंग से जवाब दे सकते हैं।
कमांडेंट ने स्थानीय आबादी के साथ संवाद को आतंकवाद-रोधी अभियानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनका कहना था कि स्थानीय समुदायों का विश्वास और सहयोग बेहतर सूचना प्रवाह में मदद करता है तथा दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है।
कुल मिलाकर, खुफिया-आधारित अभियानों, प्रौद्योगिकी और स्थानीय समुदायों से जुड़ाव ने इस प्रशिक्षण की बहुआयामी प्रकृति को सामने रखा। ऐसे वातावरण में तैनात कर्मियों को भूभाग, खुफिया इनपुट और खतरे की प्रकृति के अनुसार अपने तरीके ढालने में सक्षम होना चाहिए।
वैरेंग्टे स्थित यह स्कूल भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण विशेषीकृत प्रशिक्षण संस्थान बना हुआ है। इसका प्रशिक्षण वातावरण कर्मियों को आतंकवाद-रोधी और जंगल युद्ध से जुड़ी परिचालन जटिलताओं से परिचित कराने के लिए तैयार किया गया है।
पाठ्यक्रम के सफल समापन के साथ प्रतिभागी कर्मियों ने विशेष प्रशिक्षण और सीआईजेडब्ल्यूएस नेतृत्व द्वारा रेखांकित परिचालन सिद्धांतों का अनुभव अपने साथ लिया। हवलदार पलवे अजय को सर्वश्रेष्ठ छात्र के रूप में मिला सम्मान इस विशेष प्रशिक्षण की उपलब्धियों में एक उल्लेखनीय उपलब्धि बन गया।