मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (एमसीईएमई), सिकंदराबाद के प्रशिक्षणरत अधिकारी कैडेटों ने 16 सितंबर, 2026 को अपनी व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रक्रिया के हिस्से के रूप में स्कूल ऑफ आर्टिलरी का दौरा किया। यह दौरा उन्हें रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी की परिचालन क्षमताओं से परिचित कराने के उद्देश्य से किया गया।
इस अवसर पर अधिकारी कैडेटों को रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी की भूमिका और क्षमताओं की प्रत्यक्ष जानकारी मिली। उन्हें यह समझने का अवसर भी मिला कि आधुनिक तोपखाना प्रणाली, निगरानी प्रौद्योगिकी और उभरती मानवरहित क्षमताएं समकालीन सैन्य अभियानों में किस तरह जोड़ी जा रही हैं।
दौरे के दौरान कैडेटों को भारतीय सेना द्वारा उपयोग की जा रही नवीनतम सेवा में मौजूद तोपों और निगरानी प्रणालियों के बारे में जानकारी दी गई। इस संवाद से उन्हें तोपखाना प्रणालियों के तकनीकी और परिचालन पक्षों को समझने तथा युद्धक्षेत्र की मारक क्षमता में उनके योगदान को जानने का अवसर मिला।
तोपखाना थल युद्ध का एक प्रमुख घटक बना हुआ है, जो अलग-अलग दूरी पर स्थित लक्ष्यों पर केंद्रित अग्निशक्ति उपलब्ध कराता है। आधुनिक तोपखाना अभियानों की प्रभावशीलता अब केवल तोपों पर नहीं, बल्कि निगरानी, लक्ष्य प्राप्ति, संचार और अग्नि-नियंत्रण प्रणालियों पर भी निर्भर करती है, जो सटीक और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करती हैं।
कैडेटों को रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के भीतर विकसित की जा रही विशिष्ट ड्रोन युद्ध क्षमता से भी अवगत कराया गया। प्रशिक्षण अनुभव में ड्रोन से जुड़ी क्षमताओं को शामिल किया जाना समकालीन युद्धक्षेत्र में मानवरहित प्रणालियों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
ड्रोन निगरानी, टोही और लक्ष्य से जुड़ी गतिविधियों सहित कई सैन्य कार्यों में सहायक हो सकते हैं। आधुनिक संघर्षों में उनकी बढ़ती मौजूदगी के कारण मानवरहित प्रणालियों को पारंपरिक सैन्य अभियानों में जोड़ने के लिए विशेष क्षमताएं विकसित करने पर भी अधिक जोर दिया जा रहा है।
कैडेटों को दी गई यह जानकारी इस बात की समझ देती है कि पारंपरिक तोपखाना अग्निशक्ति को नई प्रौद्योगिकियों के साथ किस तरह पूरक बनाया जा रहा है। निगरानी और मानवरहित प्रणालियों का तोपखाना संसाधनों के साथ संयोजन लक्ष्यों की पहचान, निगरानी और उन पर प्रहार की व्यापक प्रक्रिया में सहायक हो सकता है।
दौरे का एक प्रमुख हिस्सा स्कूल ऑफ आर्टिलरी में कराया गया प्रत्यक्ष फायरिंग अभ्यास था। अधिकारी कैडेटों ने यह अभ्यास स्वयं देखा, जिससे उन्हें तोपखाना फायर की व्यावहारिक प्रक्रिया को समझने और निर्धारित लक्ष्य पर अग्निशक्ति पहुंचाने में शामिल चरणों को देखने का अवसर मिला।
यह प्रत्यक्ष फायरिंग प्रदर्शन सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक युद्धक्षेत्रीय प्रक्रियाओं से जोड़ने का अवसर लेकर आया। फायरिंग क्रम को देखने से कैडेटों को उस समन्वय और सटीकता का अंदाजा मिला, जो तोपखाना अग्नि को प्रभावी ढंग से प्रयोग करने के लिए आवश्यक होती है।
तकनीकी और सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अधिकारी कैडेटों के लिए ऐसा अनुभव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि अभियानों के दौरान विभिन्न सैन्य क्षमताएं किस तरह एक साथ काम करती हैं। तोपखाने की प्रभावशीलता निगरानी, लक्ष्य पहचान, फायर योजना, संचार और हथियार के प्रयोग से जुड़ी एक समन्वित श्रृंखला पर निर्भर करती है।
स्कूल ऑफ आर्टिलरी का यह दौरा एमसीईएमई में कैडेटों के तकनीकी उन्मुख प्रशिक्षण को भी पूरक बना गया। भावी सैन्य अधिकारियों के रूप में विभिन्न अंगों और सेवाओं से परिचय उन्हें यह व्यापक समझ देने में मदद करता है कि विशिष्ट क्षमताएं समग्र परिचालन प्रभावशीलता में कैसे योगदान देती हैं।
अंततः एमसीईएमई के अधिकारी कैडेटों की स्कूल ऑफ आर्टिलरी यात्रा एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक परिचय कार्यक्रम साबित हुई। ब्रीफिंग, प्रदर्शनों और प्रत्यक्ष फायरिंग के माध्यम से कैडेटों ने रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी की परिचालन क्षमताओं और आधुनिक अग्निशक्ति को आकार देने वाली तकनीकी प्रगतियों की समझ हासिल की।