राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 36 कैडेटों ने 12 से 15 सितंबर 2026 तक बेलगावी स्थित मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंटल सेंटर का दौरा किया। इस दौरान उन्हें केंद्र की रेजिमेंटीय विरासत, परंपराओं और प्रशिक्षण की कार्यसंस्कृति की जानकारी मिली।
चार दिन के इस दौरे में कैडेटों को भारतीय सेना के एक रेजिमेंटीय प्रशिक्षण संस्थान के माहौल को करीब से देखने और मराठा लाइट इन्फैंट्री से जुड़े कर्मियों से संवाद करने का अवसर मिला। यह अनुभव उनके लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ सैन्य जीवन को समझने का माध्यम बना।
इस दौरान कैडेटों की मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंटल सेंटर के कार्यवाहक कमांडेंट के साथ बातचीत भी हुई। इस संवाद में उन्हें सैन्य जीवन, रेजिमेंटीय परंपराओं और सशस्त्र बलों में करियर से जुड़ी जिम्मेदारियों पर दृष्टिकोण मिला।
कार्यवाहक कमांडेंट के साथ हुई यह बातचीत दौरे का एक महत्वपूर्ण प्रेरणादायी हिस्सा रही। इससे कैडेटों को सैन्य सेवा से जुड़े अनुभवों और संस्थागत मूल्यों को समझने का अवसर मिला।
यह दौरा केवल संस्थागत परिचय तक सीमित नहीं रहा। कैडेटों ने दांडेली में व्हाइट-वॉटर राफ्टिंग भी की, जिससे कार्यक्रम में साहसिक प्रशिक्षण का पहलू जुड़ गया।
व्हाइट-वॉटर राफ्टिंग में नदी की बदलती परिस्थितियों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता होती है। सैन्य कैडेटों के लिए ऐसी गतिविधियाँ टीमवर्क, संवाद, आत्मविश्वास और आपसी सौहार्द विकसित करने में मददगार हो सकती हैं।
दांडेली की यह गतिविधि एमएलआईआरसी में मिले रेजिमेंटीय अनुभव के पूरक के रूप में रही। इससे कैडेटों को सामूहिक प्रयास और समन्वय की जरूरत वाली बाहरी गतिविधि में भाग लेने का अवसर मिला।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी भारत की तीनों सेनाओं के लिए पूर्व-आयोगीकरण प्रशिक्षण संस्थान है। यहां भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के लिए चयनित कैडेट संयुक्त प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, जिसके बाद वे अपनी-अपनी सेवा के विशेष प्रशिक्षण संस्थानों में जाते हैं।
ऑपरेशनल, प्रशिक्षण और रेजिमेंटीय संस्थानों के दौरे कैडेटों के व्यापक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ऐसे अनुभव उन्हें सशस्त्र बलों के अलग-अलग घटकों की परंपराओं, कार्यप्रणाली और पेशेवर कार्यसंस्कृति को समझने में मदद करते हैं।
एमएलआईआरसी गए 36 एनडीए कैडेटों के लिए यह कार्यक्रम मराठा लाइट इन्फैंट्री के रेजिमेंटीय वातावरण से सीधे जुड़ने का अवसर था। केंद्र के नेतृत्व के साथ संवाद ने उन्हें अकादमी प्रशिक्षण को सेवा कर रहे सैनिकों के अनुभवों और परंपराओं से जोड़ने में मदद की।
रेजिमेंटीय विरासत भारतीय सेना की संस्थागत संस्कृति का अहम हिस्सा है। रेजिमेंटें अपनी परंपराओं, युद्ध सम्मान और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखती हैं, जो इकाई की पहचान और एकता को मजबूत करते हैं। प्रशिक्षण चरण में इन परंपराओं का अनुभव कैडेटों को सैन्य सेवा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पक्ष को समझने में सहायक होता है।
विरासत, नेतृत्व से संवाद और साहसिक गतिविधि का यह संयोजन पूरे दौरे को एक व्यापक शिक्षण अनुभव बनाता है। रेजिमेंटल सेंटर में हुई बातचीत ने सैन्य कार्यसंस्कृति और प्रेरणा पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि दांडेली में राफ्टिंग ने कैडेटों को अपरिचित और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण वातावरण में एक साथ काम करने का अवसर दिया।
टीम भावना और आपसी सौहार्द भविष्य के सैन्य अधिकारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। आगे चलकर इन्हें कर्मियों का नेतृत्व करना होगा और बड़े सैन्य गठन के साथ काम करना होगा। आपसी भरोसे और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता वाली गतिविधियाँ औपचारिक प्रशिक्षण को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ती हैं।
इस प्रकार बेलगावी का चार दिवसीय कार्यक्रम सैन्य शिक्षा, रेजिमेंटीय संस्कृति और साहसिक प्रशिक्षण का संगम रहा। इसने एनडीए कैडेटों को भारतीय सेना की परंपराएँ देखने और टीमवर्क तथा सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में भाग लेने का अवसर दिया।
कार्यक्रम 15 सितंबर को समाप्त हुआ, जब कैडेटों ने एमएलआईआरसी की रेजिमेंटीय विरासत का अनुभव किया और दांडेली में राफ्टिंग गतिविधि में हिस्सा लिया। यह यात्रा एनडीए में उनके चल रहे प्रशिक्षण में एक और व्यावहारिक और संस्थागत अनुभव जोड़ गई।
युवा कैडेटों के लिए मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंटल सेंटर और दांडेली की साहसिक गतिविधि के साथ यह जुड़ाव सामान्य अध्ययन से आगे के पाठ सिखाने वाला रहा। रेजिमेंटीय विरासत ने सैन्य परंपरा की समझ दी, नेतृत्व से बातचीत ने प्रेरणा और दृष्टिकोण दिया, जबकि व्हाइट-वॉटर राफ्टिंग ने टीमवर्क और सौहार्द के महत्व को मजबूत किया।
बेलगावी और दांडेली की यह चार दिवसीय यात्रा सैन्य अनुभव और व्यवहारिक सीख का संयोजन रही। इससे एनडीए कैडेटों के उस सफर को और बल मिला, जो उन्हें भविष्य में भारतीय सशस्त्र बलों के अधिकारी बनने की दिशा में आगे ले जाता है।