भारतीय वायु सेना के सार्जेंट आशीष जुयाल, जो उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के कोठी गांव के रहने वाले थे, तिरंगे में लिपटे अपने पैतृक घर लौटे। 37 वर्षीय वायुसैनिक दिल्ली में तैनात थे और उन्होंने अपनी छह साल की बेटी गिन्नी से 16 सितंबर को जन्मदिन मनाने के लिए घर आने का वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हो सका।
12 सितंबर को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें दिल्ली के आर्मी बेस अस्पताल, पालम में भर्ती कराया गया। 15 सितंबर की रात इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को 17 सितंबर, गुरुवार को गांव लाया गया और उसी दिन पिंडर नदी के किनारे पैतृक घाटबगड़ घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
जिस दिन परिवार ने जन्मदिन की तैयारियां की थीं, उसी दिन कोठी गांव का घर शोक में डूब गया। गिन्नी नए कपड़ों में पिता का इंतजार कर रही थी और उसे गुब्बारे तथा केक काटने की उम्मीद थी। लेकिन उससे पहले ही उसे पिछली रात पिता के निधन की खबर मिली और अगले दिन वह उनका शव घर आते देख पाई। अंतिम विदाई के समय बच्ची ने रोते हुए अपने पिता को सलामी दी, जिसे देखकर गांववाले और परिजन गहरे दुख में डूब गए।
जुयाल के परिवार में उनकी मां देवेश्वरी, पत्नी संध्या और बेटी गिन्नी हैं। वे स्वर्गीय शंभू प्रसाद जुयाल के इकलौते पुत्र और तीन बहनों के अकेले भाई थे। मां और पत्नी सदमे में हैं और बार-बार बेहोश हो रही हैं। अंतिम संस्कार के दौरान सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। भारतीय वायु सेना के कर्मियों ने सलामी दी और शोक धुन बजाई। थराली विधायक भूपाल राम टमटा, वायु सेना वारंट ऑफिसर संजय कुमार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
गांव में सन्नाटा पसरा रहा। जिस दिन एक छोटी बेटी के लिए उत्सव का दिन होना था, उसी दिन उसका पिता तिरंगे में लिपटा अंतिम बार घर लौटा।