मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश), 22 सितंबर 2026 — मुजफ्फरनगर की एक सत्र अदालत ने निलंबित सीमा सुरक्षा बल के जवान को पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे सड़क दुर्घटना दिखाने की कोशिश को भी खारिज कर दिया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार ने मनोज कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। सरकारी वकील आशीष कुमार ने बताया कि आरोपी को जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया।
अभियोजन के अनुसार, मनोज कुमार ने 3 अप्रैल 2024 को जिले के कसिमपुर गांव में अपनी पत्नी आकांक्षा, जिन्हें पूजा भी कहा जाता है, पर लोहे की रॉड से हमला किया। इसके बाद उसने परिवार को बताया कि उनकी मौत वाहन दुर्घटना में हुई है।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, मृतका के मायके पक्ष को अलग-अलग बातें बताई गईं। पहले कहा गया कि आकांक्षा को दिल का दौरा पड़ा है और उसे इलाज के लिए ले जाया जा रहा है। कुछ ही देर बाद यह बताया गया कि रास्ते में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसकी मौत हो गई। इस बयान पर संदेह होने के बाद आकांक्षा के पिता, मिवा गांव निवासी सुभाष ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में मनोज कुमार के साथ उसके पिता अजाब सिंह, मां मिथलेश और चाचा बाबू का नाम भी शामिल था। सुनवाई के दौरान अजाब सिंह की मृत्यु हो गई। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में मिथलेश और बाबू को बरी कर दिया। मनोज कुमार को बाद में सीमा सुरक्षा बल से निलंबित कर दिया गया था और वह 2024 से हिरासत में है।
आकांक्षा और मनोज कुमार का विवाह 6 फरवरी 2017 को हुआ था। अदालत के समक्ष रखे गए अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह मौत दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या थी। साक्ष्यों की जांच के बाद अदालत ने मनोज कुमार को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मायके पक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि विवाह के बाद आकांक्षा को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया। हालांकि अदालत का दोषसिद्धि आदेश भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के लिए है। नागरिक अदालत में चला आपराधिक मुकदमा और सीमा सुरक्षा बल की आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई अलग-अलग हैं। इस तरह की सजा आमतौर पर सेवा से बर्खास्तगी का कारण बनती है।