दिल्ली पुलिस की हेड कांस्टेबल चंचल ने एक साल में 119 लापता बच्चों को तलाशकर उनके परिवारों से मिलाया है। दक्षिण-पूर्व जिले के जैतपुर थाने में तैनात चंचल इस काम के आधार पर तय बारी से पहले पदोन्नति पाने की पात्र हो गई हैं।
नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच तलाशे गए इन बच्चों में 41 की उम्र 14 साल से कम थी। इनमें करीब तीन साल का एक बच्चा भी शामिल था। बाकी 78 बच्चे 14 से 18 साल के आयु वर्ग के थे। इसी अवधि में चंचल ने 16 अन्य लापता व्यक्तियों को भी ढूंढा। इस तरह उन्होंने कुल 135 लापता लोगों का पता लगाया।
दक्षिण-पूर्व जिले के पुलिस उपायुक्त उत्कर्ष ने बताया कि यह काम करीब सात से आठ राज्यों तक फैला था। इनमें बिहार, झारखंड, असम, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं। दिल्ली पुलिस के स्थायी आदेश, 2024 के तहत एक साल में कम से कम 80 लापता बच्चों को तलाशने वाले पुलिसकर्मी तय बारी से पहले पदोन्नति के पात्र होते हैं। इनमें कम से कम 40 बच्चों की उम्र 14 साल से कम होनी चाहिए। चंचल ने दोनों मानक पूरे कर लिए हैं।
एएनआई से बातचीत में चंचल ने बताया कि वह करीब डेढ़ साल से जैतपुर थाने में तैनात हैं। वहां आने पर उन्होंने लापता बच्चों को ढूंढ रहे माता-पिता की तकलीफ और बेबसी देखी। खुद आठ साल की बेटी की मां होने के कारण वह उनका दर्द समझ सकीं। इसी अनुभव ने उन्हें लापता बच्चों की तलाश कर उन्हें परिवारों से मिलाने की जिम्मेदारी उठाने के लिए प्रेरित किया।
चंचल ने इस काम में थाना प्रभारी, वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस उपायुक्त के सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खास तौर पर तकनीकी सहायता और जरूरी जानकारियां मिलने से लापता बच्चों और अन्य लोगों का पता लगाने में मदद मिली।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन मामलों में सुराग जुटाने, तकनीकी साधनों का इस्तेमाल करने, जांच की योजना बनाने और लगातार प्रयास जारी रखने की जरूरत पड़ी। दिल्ली-एनसीआर और दूसरे राज्यों के बाल देखभाल गृहों, गैर-सरकारी संगठनों तथा बाल कल्याण समितियों के साथ भी समन्वय किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने चंचल के जांच कौशल, बारीकी से की गई योजना और विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल की सराहना की।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस ने उनके काम को मानवीय पुलिसिंग का उदाहरण और जिले के लिए गर्व की बात बताया। 14 साल से कम उम्र के बच्चों की तलाश खास अहमियत रखती है, क्योंकि इस आयु वर्ग के बच्चों को शोषण और मानव तस्करी का खतरा अधिक होता है।