लखनऊ, 6 नवंबर 2026: कमांड हॉस्पिटल (मध्य कमान), लखनऊ ने नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा से पीड़ित 57 वर्षीय महिला को सफलतापूर्वक सीएआर टी-सेल थेरेपी दी है। भारतीय सेना की मध्य कमान में इस थेरेपी के सफल इस्तेमाल का यह पहला मामला है।
इलाज के बाद महिला की हालत स्थिर बताई गई है और वह अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के लिए तैयार हैं। इस उपचार के साथ कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ उत्तर प्रदेश का दूसरा सरकारी अस्पताल बन गया है, जहां सीएआर टी-सेल थेरेपी सफलतापूर्वक दी गई है। इससे पहले संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में यह उपचार किया जा चुका है।
काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर (सीएआर) टी-सेल थेरेपी कैंसर के इलाज की एक उन्नत इम्यूनोथेरेपी है। इसमें मरीज की टी-कोशिकाएं लेकर प्रयोगशाला में उनमें आनुवंशिक बदलाव किए जाते हैं, ताकि वे कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद खास प्रोटीन को पहचान सकें। इसके बाद इन बदली हुई कोशिकाओं को मरीज के शरीर में वापस डाला जाता है, जहां वे कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाकर नष्ट करती हैं।
यह थेरेपी कुछ प्रकार के रक्त कैंसर, खासकर चुनिंदा ल्यूकेमिया और लिम्फोमा के इलाज में एक अतिरिक्त विकल्प है। इसका इस्तेमाल उपयुक्त मरीजों में किया जाता है, जिनमें कुछ ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिनका कैंसर पारंपरिक उपचारों से पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं हुआ हो।
नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा उन कैंसरों का समूह है जो लसीका तंत्र को प्रभावित करते हैं। यह तंत्र शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली का अहम हिस्सा है। बीमारी के प्रकार और चरण के आधार पर इलाज में कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, लक्षित दवाएं, रेडिएशन थेरेपी या सीएआर टी-सेल जैसी उन्नत कोशिका-आधारित थेरेपी शामिल हो सकती हैं।
कमांड हॉस्पिटल में यह उपचार सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) की चिकित्सा टीम ने किया। इसके साथ अस्पताल में उपलब्ध जटिल कैंसर उपचारों में सीएआर टी-सेल थेरेपी भी शामिल हो गई है।