रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर 2026 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), कोरापुट प्रभाग द्वारा 2,000वें एयरो-इंजन की सुपुर्दगी देखी। यह उपलब्धि उस केंद्र में प्रणोदन निर्माण और अभियांत्रिकी विशेषज्ञता के छह दशकों का प्रतीक बताई गई। इसी अवसर पर उन्होंने शक्ती इंजनों के लिए दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित किए जाने की घोषणा भी की।
राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत की विमानन यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया और उन्नत एयरो-इंजनों के अभिकल्प, विकास, परीक्षण, निर्माण और रखरखाव में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वावलंबन के लिए प्रणोदन प्रौद्योगिकी में दक्षता आवश्यक है।
उन्होंने एचएएल कोरापुट के अभियंताओं, तकनीशियनों, वैज्ञानिकों और कुशल कार्यबल को बधाई दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि 2,000 इंजनों की सुपुर्दगी सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता में 2,000 महत्वपूर्ण योगदान के समान है। साथ ही, उन्होंने 1964 में कोरापुट प्रभाग की स्थापना के बाद से एकत्र हुए अभियांत्रिकी अनुभव और प्रौद्योगिकीय दक्षता का भी उल्लेख किया।
राजनाथ सिंह ने सैन्य विमानन में एचएएल कोरापुट के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके इंजनों ने मिग-21, मिग-27, मिग-29 और सु-30एमकेआई जैसे अग्रिम पंक्ति के विमानों को शक्ति दी है। उन्होंने कहा कि उत्पादन नई क्षमता देता है, जबकि ओवरहाल मौजूदा उपकरणों के सेवा-जीवन को बढ़ाता है, इसलिए दोनों ही सैन्य तैयारी के लिए आवश्यक हैं।
रक्षा मंत्री ने बताया कि एचएएल कोरापुट ने 9,000 से अधिक इंजनों का ओवरहाल किया है। उन्होंने स्वदेशी मरम्मत और ओवरहाल क्षमताओं की सराहना करते हुए कहा कि घटकों के स्वदेशीकरण और कम टर्नअराउंड समय से परिचालन तैयारियों और महत्वपूर्ण रक्षा परिसंपत्तियों के सेवा-जीवन में वृद्धि हो रही है।
उन्होंने एयरो-इंजन को विमान का “हृदय” बताते हुए कहा कि उन्नत एयरफ्रेम, रडार, हथियार और एवियोनिक्स का प्रभावी उपयोग विश्वसनीय प्रणोदन पर निर्भर करता है। उन्होंने सटीक निर्माण, उन्नत पदार्थ, धातुकर्म, शीतलन प्रौद्योगिकी, परीक्षण और कठोर गुणवत्ता आश्वासन में विशेषज्ञता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक एयरो-इंजन प्रौद्योगिकी में उन्नत सुपरअलॉय, ताप-रोधी परतें और जटिल शीतलन प्रणालियां शामिल होती हैं, ताकि अत्यधिक परिस्थितियों में भी विश्वसनीय प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके। उनके अनुसार, प्रणोदन प्रौद्योगिकी में दक्षता दरअसल सबसे उन्नत औद्योगिक क्षमताओं में दक्षता है।
उन्होंने आत्मनिर्भरता को एयरो-इंजन क्षमता तक विस्तारित करने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेषकर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम के लिए। उन्होंने लगभग 5,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश, मिश्रा धातु निगम लिमिटेड (एमआईडीएचएएनआई) के साथ कच्चे माल के स्वदेशीकरण और भारत की पहली स्वदेशी उच्च-थ्रस्ट इंजन परीक्षण सुविधा की स्थापना का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि एक संप्रभु विमानन पारितंत्र के लिए पदार्थ, अभिकल्प, निर्माण, परीक्षण तथा रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) में स्वदेशी क्षमताएं आवश्यक हैं।
रक्षा बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने में एचएएल के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार ने 2024 में सु-30एमकेआई के लिए एचएएल को 240 एएल-31एफपी इंजनों का आदेश दिया था। वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला में व्यवधान और कच्चे माल की चुनौतियों के बावजूद एचएएल ने पहला इंजन समय से पहले दिया और दूसरे वर्ष के अंत तक 60 के लक्ष्य के मुकाबले 63 इंजन दे दिए हैं।
रक्षा मंत्री ने घोषणा की कि एचएएल अपनी वार्षिक एएल-31एफपी उत्पादन क्षमता 30 से बढ़ाकर 50 इंजन करेगा, जिसके लिए 335 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। उन्होंने 218 करोड़ रुपये के निवेश के साथ शक्ती इंजनों के लिए दूसरी उत्पादन लाइन की भी घोषणा की। यह नई लाइन सालाना 100 तक इंजन बनाएगी और इसके 2028-29 तक पूरी तरह स्थापित होने की योजना है।
शक्ती इंजन उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी से ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) जैसे स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की जरूरतें पूरी होंगी।
भारत के हेलीकॉप्टर पारितंत्र के लिए विश्वसनीय स्वदेशी प्रणोदन की आवश्यकता पर जोर देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा बलों को ऐसे इंजन चाहिए जो जरूरत के समय उपलब्ध हों, अपने पूरे जीवनचक्र में सहायता पाएँ और बदलती प्रौद्योगिकी के साथ उन्नत किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि एयरो-इंजन विकास एक दीर्घकालिक प्रयास है, जिसके लिए निरंतर निवेश, विशेष परीक्षण, कुशल मानवशक्ति और मजबूत औद्योगिक पारितंत्र की आवश्यकता होती है। उन्होंने अभिकल्प, महत्वपूर्ण पदार्थों, सुपरअलॉय तथा दोहराने योग्य, विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता के महत्व पर भी बल दिया।
रक्षा मंत्री ने एमएसएमई, स्टार्टअप, निजी उद्योग, शिक्षाविदों और शोध संस्थानों को प्रणोदन पारितंत्र से जोड़ने की भी बात कही। उन्होंने एचएएल से आग्रह किया कि वह कोरापुट को केवल एक इंजन उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि एक व्यापक विमानन प्रणोदन पारितंत्र के रूप में विकसित करे।
उन्होंने कहा कि इसके तहत आपूर्तिकर्ताओं को विकसित करना, एमएसएमई को मार्गदर्शन देना, स्टार्टअप और युवाओं को सहयोग देना, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ काम करना तथा महत्वपूर्ण घटकों के लिए क्षमताएं विकसित करना शामिल होगा।
ओडिशा के रक्षा और विमानन पारितंत्र में बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने राज्य की रणनीतिक स्थिति, लंबा समुद्री तट, बंदरगाह, खनिज संसाधन, औद्योगिक बुनियादी ढांचे और कुशल मानवशक्ति की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने चांदीपुर में डीआरडीओ के एकीकृत परीक्षण रेंज तथा ओडिशा सरकार की हालिया पहलों को इस क्षेत्र के विकास की मजबूत नींव बताया।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में ओडिशा सरकार की पहलों की सराहना की, जिनमें गजमारा, ढेंकानाल में एयरोस्पेस और रक्षा उपकरण विनिर्माण परिसर को स्वीकृति देना शामिल है।
राजनाथ सिंह ने एचएएल से कहा कि वह कोरापुट को आपूर्तिकर्ताओं के विकास, एमएसएमई के मार्गदर्शन, उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में युवाओं और स्टार्टअप को अवसर देने, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ सहयोग करने, स्थानीय युवाओं के लिए अवसर पैदा करने और महत्वपूर्ण इंजन घटकों के लिए स्वदेशी विनिर्माण क्षमताएं विकसित करने के माध्यम से व्यापक विमानन प्रणोदन पारितंत्र का केंद्र बनाए।
उन्होंने एचएएल कोरापुट टीम से गुणवत्ता, उत्पादकता, स्वदेशीकरण, नवाचार और आपूर्ति समय-सीमा में मानकों को और ऊपर उठाने का आग्रह किया। रक्षा मंत्री ने 2,000वें इंजन को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इसे ऐसे भारतीय विमानन उद्योग की नींव बनाने का आह्वान किया, जो उन्नत प्रणोदन प्रणालियों का अभिकल्प, विकास, निर्माण और समर्थन कर सके।
उन्होंने इस उपलब्धि पर एचएएल कोरापुट टीम, भारतीय वायु सेना, उद्योग सहयोगियों, एमएसएमई, वैज्ञानिकों, अभियंताओं, तकनीशियनों और ओडिशा के लोगों को बधाई दी।
कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल तेजपाल सिंह, एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवि के, एमआईडीएचएएनआई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एस.वी.एस. नारायण मूर्ति तथा संयुक्त सचिव (एयरोस्पेस विंग एवं डॉमडब्ल्यू) मनीषा चंद्रा उपस्थित थे।