उत्तर दिल्ली जिले की साइबर प्रकोष्ठ में तैनात दिल्ली पुलिस के एक सिपाही को एक दुकानदार के अपहरण और फिरौती मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।
आरोपी की पहचान 29 वर्षीय मुईन अली के रूप में हुई है, जो 2024 बैच का सिपाही है और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना का रहने वाला है। उसे रविवार, 19 अक्टूबर 2026 को उत्तर जिले की कोतवाली थाने की टीम ने कम से कम एक सहयोगी के साथ गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे सेवा से निलंबित कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा तब हुआ जब अपहरण और फिरौती की मांग की सूचना मिली। जांच के दौरान तकनीकी खुफिया जानकारी और अन्य इनपुट की मदद से साइबर प्रकोष्ठ के सिपाही की संलिप्तता का पता चला। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस इस मामले से जुड़े दो और संदिग्धों की तलाश कर रही है और सभी आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।
बताया गया कि कथित घटना पुरानी दिल्ली के लाल किला और जामा मस्जिद क्षेत्र में, खासतौर पर घड़ी बाजार के आसपास हुई। पुलिस के मुताबिक, अली ने अपने बचपन के मित्र सोनू और एक अन्य सहयोगी अख्तर के साथ मिलकर एक स्थानीय दुकानदार को निशाना बनाया। सोनू उसी बाजार में दुकान चलाता है।
पुलिस का कहना है कि सोनू को पता था कि पीड़ित की हाल में बिक्री अच्छी हुई है, इसलिए उसने उससे पैसे ऐंठने की योजना बनाई। रविवार सुबह आरोपियों ने दुकानदार के पास जाकर उसे कार के पास बुलाया और जबरन उसमें बैठा लिया। इसके बाद उसे अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया और इस दौरान उसके परिवार या परिचितों से फिरौती की मांग की गई।
हिंदी मीडिया रिपोर्टों में पीड़ित का नाम रवि या रवि दुबे बताया गया है। उसे कहीं घड़ी विक्रेता और कहीं सड़क पर सामान बेचने वाला बताया गया है। इन रिपोर्टों में फिरौती की रकम लगभग 1.5 लाख रुपये बताई गई है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में 5 लाख रुपये मांगने की योजना थी, जिसे बाद में फोन पर बातचीत के दौरान कम कर दिया गया।
पीड़ित के एक मित्र ने भुगतान करने से इनकार कर दिया और रविवार शाम पीसीआर के जरिए पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाया। आरोपियों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास पैसे लेने के लिए बुलाया गया, जहां अली और एक सहयोगी को रविवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। तब तक पीड़ित को छोड़ दिया गया था और वह सुरक्षित घर पहुंच चुका था।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें साइबर प्रकोष्ठ में तैनात एक सेवारत पुलिसकर्मी का नाम सामने आया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जांच में अपहरण की पूरी परिस्थितियों और सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद निलंबन और न्यायिक हिरासत की कार्रवाई नियमानुसार की गई।
यह घटना दिल्ली पुलिस कर्मियों से जुड़े हाल के अन्य आपराधिक मामलों के बाद सामने आई है। इससे पहले मई में भी एक मामले में बारा हिंदू राव इलाके में हुई डकैती के आरोप में एक सिपाही सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने गिरफ्तारी, निलंबन और चल रही जांच की पुष्टि के अलावा कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया है।