नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: साहस, दृढ़ संकल्प और जिजीविषा की असाधारण कहानी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 31 वर्षीय सिपाही तोमन कुमार, जो पहले कोबरा कमांडो रह चुके हैं, 2022 में झारखंड में एक नक्सल-रोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट में बायां पैर खोने के बाद पुरुष कंपाउंड वर्ग में विश्व के नंबर 1 पैरा तीरंदाज बन गए हैं।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के नवागांव गांव से आने वाले कुमार ने दुर्गम जंगलों में नक्सल-रोधी अभियानों से अंतरराष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचने की उल्लेखनीय यात्रा तय की है। उनकी उपलब्धियों में 2025 विश्व तीरंदाजी पैरा चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और 2026 में कई अंतरराष्ट्रीय पदक शामिल हैं।
अब कुमार जापान में होने वाले आइची-नागोया 2026 एशियाई पैरा खेलों में भारत की पदक चुनौती का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। गंभीर रूप से घायल कमांडो से महज तीन वर्ष से भी कम समय में विश्व चैंपियन बनने तक की उनकी यात्रा भारत के सुरक्षा कर्मियों की जुझारू भावना का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।
तोमन कुमार ने 2017 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी और बाद में कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन, यानी कोबरा, में प्रशिक्षण लिया। यह एक विशिष्ट इकाई है, जो आतंकवाद-रोधी और नक्सल-रोधी अभियानों के लिए जिम्मेदार है।
फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले के जंगल और पहाड़ी इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों द्वारा लगाया गया एक आईईडी फट गया। इस विस्फोट ने कुमार को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
उन्हें इलाज के लिए निकाला गया, लेकिन अंततः डॉक्टरों को उनका बायां पैर काटना पड़ा। उस समय कुमार लगभग 26 वर्ष के थे और सीआरपीएफ में करीब पांच वर्ष सेवा कर चुके थे। इस चोट ने उनकी जिंदगी को अप्रत्याशित और बेहद कठिन मोड़ दे दिया।
शारीरिक आघात के साथ-साथ उन्हें मानसिक संघर्ष भी झेलना पड़ा। कुमार ने शुरुआती पुनर्वास के दौरान अवसाद से गुजरने की बात कही है, क्योंकि वे एक अंग खोने के सच को स्वीकार करने से जूझ रहे थे। हालांकि, दोबारा सेवा में लौटने का उनका निश्चय उन्हें इस कठिन दौर से उबारने में मददगार बना।
चोट लगने के बाद कुमार का पुनर्वास हैदराबाद में हुआ, जहां उनका उपचार हुआ और कृत्रिम अंग लगाने में सहायता दी गई। इसी दौरान उनकी मुलाकात अन्य घायल कर्मियों और दिव्यांग व्यक्तियों से हुई। उनके अनुभवों ने कुमार को फिर से आत्मविश्वास हासिल करने और अपनी चोट की सीमाओं से आगे देखने के लिए प्रेरित किया।
पैर खोने के बावजूद कुमार विस्फोट के लगभग चार महीने बाद फिर से ड्यूटी पर लौट आए, जिससे बल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता साफ झलकती है।
हैदराबाद में पुनर्वास के दौरान ही उनकी मुलाकात तीरंदाजी प्रशिक्षक पंकज सिंह से हुई, जिन्होंने उनमें एक खिलाड़ी की क्षमता पहचानी और उन्हें इस खेल को आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया।
शुरुआत में कुमार संकोच में थे। गांव में पले-बढ़े होने के कारण उन्हें प्रतिस्पर्धी खेलों का ज्यादा अनुभव नहीं था और तीरंदाजी का कोई पूर्व अनुभव भी नहीं था। वे एक शुरुआती प्रशिक्षण सत्र से लौट भी गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने खेल को एक और मौका देने का फैसला किया।
सितंबर 2023 के आसपास उन्होंने तीरंदाजी को गंभीरता से लेना शुरू किया। जो अभ्यास पहले कुछ समय की कोशिश था, वह जल्द ही गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में बदल गया और खेल के प्रति उनमें गहरी रुचि विकसित हो गई।
उनके सैन्य प्रशिक्षण के वर्षों ने इसमें अहम भूमिका निभाई। कोबरा कमांडो के रूप में विकसित अनुशासन, शारीरिक क्षमता, एकाग्रता और दबाव में शांत रहने की आदत ने उन्हें प्रतिस्पर्धी तीरंदाजी के अनुरूप तेजी से ढलने में मदद की।
तीरंदाजी में कुमार की प्रगति बेहद तेज रही। खेल में देर से आने के बावजूद उन्होंने घरेलू स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रभावशाली परिणाम देने शुरू कर दिए।
उन्होंने सीआरपीएफ विभागीय ट्रायल में दूसरा स्थान हासिल किया और उसके बाद अखिल भारतीय पुलिस चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। उन्होंने सक्षम खिलाड़ियों के खिलाफ भी अपनी क्षमता दिखाई और राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में प्रतिस्पर्धी स्कोर दर्ज किए।
जून 2024 तक वे आंध्र प्रदेश के औरंगाबाद स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण की सुविधा में प्रशिक्षण लेने लगे, जहां उन्होंने अपनी तकनीक को और निखारा।
उनकी सबसे बड़ी सफलता दक्षिण कोरिया के ग्वांग्जू में आयोजित 2025 विश्व तीरंदाजी पैरा चैंपियनशिप में मिली। पुरुष कंपाउंड व्यक्तिगत वर्ग में खेलते हुए कुमार फाइनल तक पहुंचे, जहां उनका सामना अनुभवी भारतीय पैरा तीरंदाज और पैरालंपिक पदक विजेता राकेश कुमार से हुआ।
फाइनल राकेश के उपकरण में तकनीकी समस्या आने और उनके मुकाबले से हटने के बाद समाप्त हुआ, जिससे तोमन कुमार को स्वर्ण पदक मिला और वे विश्व चैंपियन बन गए।
उन्होंने भारत की चर्चित पैरा तीरंदाज शीतल देवी के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक भी जीता। इस शानदार प्रदर्शन के बाद कुमार पुरुष कंपाउंड पैरा तीरंदाजी वर्ग में विश्व नंबर 1 बन गए।
कुमार ने 2026 में भी अपना प्रभावशाली प्रदर्शन जारी रखा और दुनिया के कई अनुभवी पैरा तीरंदाजों के खिलाफ मजबूत नतीजे हासिल किए।
बैंकॉक में हुई हुंडई विश्व तीरंदाजी पैरा श्रृंखला में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पैरालंपिक पदक विजेता जोनाथन मिल्ने को 146-142 से हराकर पुरुष कंपाउंड व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा, उन्होंने शीतल देवी के साथ मिलकर मिश्रित टीम कंपाउंड स्वर्ण पदक भी हासिल किया और फाइनल में इंडोनेशिया को 153-146 से हराया।
अहमदाबाद चरण में कुमार ने श्याम सुंदर स्वामी के साथ मिलकर इराक को 152-139 से हराकर पुरुष कंपाउंड टीम स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने अहमदाबाद में व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में कांस्य पदक भी जीते, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय पदकों की संख्या और बढ़ गई।
चेक गणराज्य चरण में पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा में एक और कांस्य पदक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी निरंतरता को और मजबूत किया। इन उपलब्धियों ने कुमार को पैरा तीरंदाजी में भारत के प्रमुख पदक दावेदारों में शामिल कर दिया है।
अब कुमार जापान के आइची-नागोया में होने वाले पांचवें एशियाई पैरा खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जहां पैरा तीरंदाजी स्पर्धाएं 19 से 24 अक्टूबर तक ओकाज़ाकी चुओ सोगो पार्क में होंगी।
मौजूदा विश्व चैंपियन श्याम सुंदर स्वामी के साथ पुरुष कंपाउंड चुनौती की अगुवाई करेंगे। उनके शीतल देवी के साथ मिश्रित टीम वर्ग में भी उतरने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय ट्रायल में चौथे स्थान पर रहने के कारण अनुभवी भारतीय तीरंदाज राकेश कुमार के चयन से बाहर होने पर, तोमन कुमार पर भारत की मुहिम में बड़ी जिम्मेदारी होगी। उनकी तैयारी में गहन तीरंदाजी अभ्यास के साथ-साथ श्वास-व्यायाम और ध्यान भी शामिल हैं, ताकि प्रतियोगिताओं के दौरान एकाग्रता बनी रहे और दबाव को संभाला जा सके।
अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने के बावजूद कुमार अब भी सीआरपीएफ में सेवा दे रहे हैं और उस संगठन से गहराई से जुड़े हैं, जिसने उनके अनुशासन और संकल्प को आकार दिया। उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि अभियानों के दौरान गंभीर रूप से घायल होने वाले सुरक्षा कर्मियों के लिए पुनर्वास और खेल अवसर कितने महत्वपूर्ण हैं।
नक्सल प्रभावित जंगलों में कोबरा कमांडो के रूप में गश्त करने से लेकर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खड़े होने तक, कुमार ने साबित किया है कि जीवन बदल देने वाली चोट किसी की महत्वाकांक्षा का अंत नहीं होती। विश्व चैंपियन बन चुके कुमार अब 2028 लॉस एंजिलिस पैरालंपिक खेलों सहित और बड़ी उपलब्धियों की ओर देख रहे हैं।
एशियाई पैरा खेलों में भारत के अभियान की शुरुआत के साथ तोमन कुमार की कहानी साहस, धैर्य और कर्तव्य निभाते हुए पैर खो देने के बाद भी हार न मानने वाले एक सैनिक की अडिग भावना का शक्तिशाली उदाहरण बनकर सामने आती है।