नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: भारत ने बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस मनाया। चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शोकपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जहां खुफिया ब्यूरो के निदेशक डॉ. महेश दीक्षित ने बताया कि पिछले एक वर्ष में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राण न्यौछावर किए। इसके साथ ही स्वतंत्रता के बाद पुलिस शहीदों की कुल संख्या 36,852 हो गई है।
राष्ट्रीय समारोह में सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड, असम राइफल्स, रेलवे सुरक्षा बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और दिल्ली पुलिस के जवानों की संयुक्त स्मृति परेड शामिल रही। डॉ. दीक्षित ने 154 शहीद कर्मियों के नाम पढ़कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर दिया।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. दीक्षित ने इस दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को याद किया। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर 1959 को खुफिया ब्यूरो के डीसीआईओ करम सिंह के नेतृत्व में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दस वीर जवानों ने लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में भारत-चीन सीमा पर एक सशस्त्र चीनी सैन्य दल का सामना करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। तभी से हर वर्ष यह दिन पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से 36,852 कर्मियों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को तीर्थस्थल बताया। उन्होंने कहा कि 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने इस राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन उन सभी पुलिसकर्मियों की स्मृति में किया था, जो देशभर में कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए हैं।
शाह ने कहा कि इसका उद्देश्य यह है कि आने वाली पीढ़ियों के पुलिसकर्मी यहां से प्रेरणा लें, अपने दायित्वों के प्रति सदैव सजग रहें और कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने के लिए तैयार रहें।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष शौर्य की दीवार पर 154 नए नाम जोड़े गए हैं और शहीदों को नमन किया। शाह ने सीमाओं पर और देशभर में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को बिना किसी जान-माल के नुकसान के संपन्न कराने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की सराहना की और इसे उस राज्य में, जो ऐतिहासिक रूप से चुनावी हिंसा से जुड़ा रहा है, एक नई कसौटी बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि पुलिस स्मृति दिवस उन पुलिसकर्मियों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो कानून-व्यवस्था बनाए रखने से लेकर अपराध से निपटने और आपात स्थितियों में मदद करने तक, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण समर्पण के साथ सेवा करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र की स्मृति में सदा अंकित रहेगा। देशभर में 21 अक्टूबर को राज्य राजधानियों, जिलों और पुलिस थानों में कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने 21 अक्टूबर 2018 को किया था। इसमें 30 फुट ऊंची काले ग्रेनाइट की केंद्रीय संरचना, शहीदों के नामों से अंकित शौर्य की दीवार और भारत में पुलिसिंग के इतिहास को दर्ज करने वाला भूमिगत संग्रहालय शामिल है।
2019 के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों के सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार, 22 से 30 अक्टूबर तक स्मारक पर शहीदों के परिवारों की भागीदारी सहित आगे के स्मृति कार्यक्रम केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों द्वारा आयोजित किए जाएंगे।
यह दिन देश की सुरक्षा और एकता की रक्षा में राज्य एवं केंद्रीय पुलिस बलों द्वारा किए जाने वाले निरंतर बलिदानों की राष्ट्रीय याद दिलाता है।