एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के प्रमुख पद से सेवानिवृत्त हो गए। देश के 28वें वायुसेना प्रमुख का सेवाकाल 21 दिसंबर 1984 से शुरू हुआ था। करीब 42 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने लड़ाकू पायलट, परीक्षण पायलट और वरिष्ठ कमांडर के रूप में जिम्मेदारियां संभालीं।
नई दिल्ली में 27 अक्टूबर 1964 को जन्मे अमर प्रीत सिंह ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, डुंडीगल स्थित वायुसेना अकादमी, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्हें वायुसेना की लड़ाकू शाखा में कमीशन मिला था। वह योग्य उड़ान प्रशिक्षक और प्रायोगिक परीक्षण पायलट भी हैं।
उन्हें विमानों और हेलीकॉप्टरों पर 5,000 घंटे से अधिक की परिचालन उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिग-21, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस और एचजेटी-16 किरण सहित कई प्रकार के विमान उड़ाए।
अपने सेवाकाल में उन्होंने मिग-27 से लैस नंबर 22 स्क्वाड्रन की कमान संभाली और मॉस्को में मिग-29 उन्नयन परियोजना प्रबंधन दल का नेतृत्व किया। वह एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट में मुख्य परीक्षण पायलट भी रहे। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में परियोजना निदेशक (उड़ान परीक्षण) के तौर पर उन्होंने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के उड़ान परीक्षणों में योगदान दिया।
बाद में वह पूर्वी वायु कमान के वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी और मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे। उन्होंने 1 फरवरी 2023 से 30 सितंबर 2024 तक वायुसेना के 47वें उपप्रमुख के रूप में सेवा दी। इसके बाद 30 सितंबर 2024 को एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी से वायुसेना प्रमुख का कार्यभार संभाला।
वायुसेना प्रमुख रहते हुए उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बल का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में परिचालन तैयारियों, आधुनिकीकरण और रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर जारी रहा। इससे पहले वह कारगिल युद्ध और ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग ले चुके थे। उन्हें 2019 में अति विशिष्ट सेवा पदक और 2023 में परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया।
सेवानिवृत्ति से पहले 20 अक्टूबर 2026 को उन्होंने एचजेटी-16 किरण एमके-1 प्रशिक्षण विमान में प्रतीकात्मक अंतिम उड़ान भरी। इसी प्रकार के विमान पर उन्होंने 28 जनवरी 1984 को वायुसेना अकादमी में अपनी पहली उड़ान भरी थी। इस बार उनके साथ उनके पहले उड़ान प्रशिक्षक, सेवानिवृत्त विंग कमांडर वी.एस. कोचर थे। सिंह ने इस अनुभव को “सपना सच होने” जैसा बताया, जिससे उनके उड़ान करियर का एक चक्र पूरा हुआ। उन्होंने अभ्यास तरंग शक्ति के दौरान स्वदेशी तेजस में अपनी अंतिम लड़ाकू उड़ान भी भरी थी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 अक्टूबर को उन्हें विदाई दी और उनकी 42 वर्षों की सेवा तथा वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूत बनाने में योगदान को सराहा। वायुसेना मुख्यालय और वरिष्ठ कमांडरों ने भी विदाई कार्यक्रम आयोजित किए। सेवा के अंतिम दिन उनका राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करने और नई दिल्ली स्थित वायुसेना स्टेशन पर औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करने का कार्यक्रम निर्धारित था।

उनके उत्तराधिकारी एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर 2026 की दोपहर देश के 29वें वायुसेना प्रमुख का कार्यभार संभाला। इससे पहले वह वायुसेना उपप्रमुख थे। वह परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, वायु सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित हैं।
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की पत्नी का नाम सरिता सिंह है।