भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने जापान स्थित अत्सुगी नौसैनिक वायु केंद्र का दौरा किया। वह बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास मालाबार 2026 के सिलसिले में जापान में हैं। इस अभ्यास में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
अभ्यास का उद्देश्य चारों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग और साथ मिलकर अभियान चलाने की क्षमता बढ़ाना है। इसके तहत आपसी समझ, पेशेवर संबंधों और अभियान संबंधी तालमेल को मजबूत करने के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
मालाबार 2026 की शुरुआत 5 नवंबर को जापान के योकोसुका में हुई। जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स की मेजबानी में आयोजित उद्घाटन समारोह में वाइस एडमिरल प्रमोद के साथ अन्य तीन देशों के वरिष्ठ नौसैनिक कमांडर भी शामिल हुए। शुरुआती बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और मालाबार अभ्यास के भविष्य पर चर्चा हुई।

इन कार्यक्रमों में जापान के सेल्फ डिफेंस फ्लीट के कमांडर वाइस एडमिरल ओमाची कात्सुशी, ऑस्ट्रेलियाई बेड़े की कमांडर रियर एडमिरल अनीता विलियम्स और अमेरिकी सातवें बेड़े के कमांडर वाइस एडमिरल पैट्रिक जे. हैनिफिन ने भाग लिया।
भारतीय नौसेना की ओर से पूर्वी बेड़े का युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि अभ्यास में हिस्सा ले रहा है। स्वदेश में निर्मित यह निर्देशित मिसाइलों से लैस स्टेल्थ फ्रिगेट है। सह्याद्रि 4 नवंबर को योकोसुका नौसैनिक अड्डे पहुंचा था, जहां जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स ने उसका औपचारिक स्वागत किया।

अभ्यास में पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त अभियान की योजना और समुद्री प्रशिक्षण शामिल हैं। इन गतिविधियों के जरिए जटिल सुरक्षा परिस्थितियों में चारों नौसेनाओं की साथ काम करने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
बंदरगाह चरण में भाग लेने वाले नौसैनिकों के बीच संवाद और मेलजोल की गतिविधियां शामिल हैं। समुद्री चरण में चारों देशों के युद्धपोत और अन्य समुद्री सैन्य संसाधन समन्वित अभियानों में भाग लेंगे।

अत्सुगी का दौरा इसी सहयोग के बीच हुआ है। संयुक्त समुद्री अभ्यासों को सहयोग देने में नौसैनिक विमानन के बुनियादी ढांचे की भी अहम भूमिका रहती है।
मालाबार अभ्यास की शुरुआत 1992 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में हुई थी। बाद में जापान और ऑस्ट्रेलिया के जुड़ने से यह चार देशों का बहुपक्षीय अभ्यास बन गया।
मालाबार 2026 का एक प्रमुख उद्देश्य स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को समर्थन देना है। इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री गतिविधियों, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता तथा नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था पर जोर है। भारत के लिए साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटना और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा में साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाना भी इस भागीदारी का हिस्सा है।
यह अभ्यास भारत के ‘महासागर’ दृष्टिकोण के अनुरूप भी है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक तथा समग्र प्रगति पर जोर दिया गया है।