यमुनानगर जिले के हथिनीकुंड बैराज पर मंगलवार को प्रशिक्षण और बाढ़-नियंत्रण बचाव अभ्यास के दौरान सेना की एक मोटरबोट में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद वह डूबने लगी। इस हादसे के बाद भारतीय सेना का एक जवान यमुना नदी में लापता हो गया, जबकि नाव पर सवार तीन अन्य जवान तैरकर सुरक्षित निकल आए। देर रात तक बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान जारी था।
मोटरबोट बैराज के ऊपरी हिस्से में तैनात थी, तभी उसमें कथित तौर पर यांत्रिक खराबी आ गई और तेज धारा में वह डूबने लगी। नाव में सवार चारों कर्मियों ने, जिनके पास जीवन रक्षक जैकेट थे, पानी में छलांग लगा दी। वे पश्चिमी यमुना नहर की ओर बह गए। तीन जवान काफी दूरी तक तैरकर सुरक्षित पहुंच गए, लेकिन चौथे जवान का पता नहीं चल सका।
पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार यह घटना बैराज पर चल रहे बहु-दिवसीय अभ्यास के अंतिम दिन देर दोपहर से शाम के बीच हुई। यह बैराज हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है। हथिनीकुंड बैराज यमुना के जल को पश्चिमी यमुना नहर में नियंत्रित करता है और अधिकारियों के अनुसार उस समय नदी में पानी का बहाव काफी अधिक था।
खोज अभियान शुरू
दुर्घटना की सूचना मिलते ही सेना के जवान, प्रताप नगर थाना पुलिस की एक टीम और हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश की बचाव इकाइयां मौके पर पहुंच गईं। सेना के गोताखोरों को भी लगाया गया और लंबी कार्रवाई के बाद डूबी हुई मोटरबोट को निकाल लिया गया। खोज अभियान में मदद के लिए सिंचाई अधिकारियों ने बैराज से पश्चिमी यमुना नहर में छोड़े जा रहे पानी की मात्रा कम कर दी। अधिकारियों ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम भी मांगी।
प्रताप नगर थाना प्रभारी रोहतास कुमार ने पुष्टि की कि यमुना में सेना का एक जवान लापता है। उन्होंने बताया कि सेना के अनुरोध पर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने नहर में जल प्रवाह कम किया और जिला प्रशासन से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की सहायता भेजने को कहा गया।
देर मंगलवार तक भारतीय सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। लापता जवान की पहचान आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गई। शुरुआती स्थानीय विवरणों में इकाई और पानी में मौजूद कर्मियों की संख्या को लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं, लेकिन बाद की कई रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि नाव में चार जवान थे और उनमें से एक का पता नहीं चल सका।
अभ्यास की पृष्ठभूमि
हथिनीकुंड को जल-आधारित प्रशिक्षण के लिए अक्सर इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यहां बैराज के फाटक, नहर में जल-मोड़ और बदलती धारा की स्थिति रहती है। स्थानीय रिपोर्टों में इस अभ्यास को बाढ़-नियंत्रण बचाव अभ्यास बताया गया। कुछ विवरणों में कहा गया कि मोटरबोट अधिक प्रवाह या ‘खतरे’ वाले क्षेत्र की ओर बह गई, जिसके बाद उसमें खराबी आई। बताया गया कि सभी कर्मियों के पास जीवन रक्षक जैकेट थे और एक स्थानीय रिपोर्ट में अभ्यास उपकरण के रूप में ऑक्सीजन सिलिंडर का भी उल्लेख किया गया।
अंधेरा होने के बाद भी खोज दल काम में जुटे रहे। इस समाचार के भेजे जाने तक लापता जवान के मिलने की कोई जानकारी नहीं थी। सेना मुख्यालय से और आधिकारिक विवरण का इंतजार किया जा रहा था।