लेफ्टिनेंट जनरल हर्ष छिब्बर, महानिदेशक सूचना प्रणाली (DG IS), ने लखनऊ स्थित केंद्रीय कमान मुख्यालय का दौरा किया और लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेंगुप्ता, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, केंद्रीय कमान से मुलाकात की।
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल हर्ष छिब्बर ने केंद्रीय कमान मुख्यालय के अधिकारियों और विभिन्न संरचनाओं के अधिकारियों को मिश्रित माध्यम से “भारतीय सेना में डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता रूपांतरण” विषय पर संबोधित किया। इस बातचीत में भविष्य के युद्धक्षेत्र को आकार देने में डिजिटल प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल छिब्बर ने उभरती प्रौद्योगिकियों की रूपांतरकारी क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि ये सैन्य प्रभावशीलता बढ़ाने और निर्णय-निर्माण की गति तथा गुणवत्ता को मजबूत करने में सहायक हैं। उन्होंने जोर दिया कि डेटा की बढ़ती उपलब्धता, उन्नत डिजिटल प्रणालियाँ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता-समर्थित उपकरण बेहतर स्थिति-समझ और मिशन तैयारी में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
महानिदेशक सूचना प्रणाली ने आधुनिक युद्ध में सूचना प्रभुत्व के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे युद्धक्षेत्र अधिक प्रौद्योगिकी-आधारित और सूचना-प्रधान होते जा रहे हैं, सूचना को एकत्र करने, संसाधित करने, विश्लेषित करने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता परिचालन बढ़त का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।
बातचीत में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारतीय सेना को अपने परिचालन और संगठनात्मक दोनों क्षेत्रों में नवाचार और डिजिटलकरण को अपनाना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता-समर्थित क्षमताएँ, उभरती प्रौद्योगिकियाँ और डिजिटल रूप से एकीकृत प्रणालियाँ कमांडरों और संरचनाओं को जटिल तथा तेजी से बदलती परिचालन चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने में मदद कर सकती हैं।
यह संवाद इस बात को भी पुष्ट करता है कि कार्मिकों में प्रौद्योगिकी-उन्मुख सोच विकसित करना आवश्यक है। निरंतर अनुकूलन, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों से परिचित होना भविष्य में भी जरूरी रहेगा, क्योंकि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और उसमें स्वायत्त प्रणालियाँ, डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण तथा उन्नत डिजिटल नेटवर्क तेजी से शामिल हो रहे हैं।
यह दौरा और संवाद भारतीय सेना के तकनीकी रूपांतरण तथा भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के विकास पर उसके जोर की पुष्टि करता है। डिजिटलकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर ध्यान एक ऐसी तकनीकी रूप से सक्षम सेना के निर्माण के व्यापक उद्देश्य को दर्शाता है, जो उभरते युद्धक्षेत्र में परिचालन प्रभावशीलता और तत्परता बनाए रख सके।