भारतीय सेना की 1 पैरा (विशेष बल) के पैराट्रूपर अजय भगत की हरियाणा के यमुनानगर जिले में हथिनीकुंड बैराज पर उच्च जोखिम वाले जल प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान यमुना नदी में बह जाने से मौत हो गई। उनका शव 2 सितंबर की रात उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बर्था गांव के पास बरामद किया गया, जो बैराज से लगभग 14 से 15 किलोमीटर नीचे की ओर था।
जम्मू के अखनूर निवासी भगत 1 सितंबर, मंगलवार को हुए अभ्यास में 1 पैरा एसएफ के पांच सैनिकों में शामिल थे। स्थानीय रिपोर्टों और पुलिस सूत्रों ने उनकी पहचान अजय भगत के रूप में की। लेखन के समय तक भारतीय सेना ने व्यक्तिगत पहचान को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।
दूसरे लापता सैनिक, महाराष्ट्र के पैराट्रूपर आर्यन पाटिल, का शव गुरुवार सुबह जींद में अमरेहड़ी गांव के पास हिंडन ब्रांच नहर में लगभग 200 किलोमीटर नीचे की ओर मिला। जींद में रहने वाले 1 पैरा एसएफ के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने दूसरे शव की पहचान की।
कैसे हुआ हादसा
चंडीगढ़ स्थित रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के बयान के अनुसार, पांच कर्मी सेना की नाव में प्रशिक्षण अभ्यास कर रहे थे, तभी उसमें तकनीकी खराबी आ गई। तेज बहाव नाव को बैराज के निचले हिस्से की ओर ले गया। बचाव दल ने नाव को निकालने की कोशिश की, लेकिन वह स्लुईस गेटों के पास तेज भंवरों में फंस गई और पलट गई। चालक दल बह गया। तीन सैनिक तैरकर सुरक्षित निकल आए, जबकि दो नीचे की ओर बह गए और बाद में मृत पाए गए।
स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया कि सैनिकों ने हवाई से जल आधारित या बाढ़ बचाव अभ्यास के तहत चिनूक हेलीकॉप्टर से यमुना में रखी मोटरबोट पर छलांग लगाई थी। नाव के शुरू न होने और डूबने लगने के बाद सभी पांचों सैनिक गोताखोरी किट और लाइफ जैकेट पहनकर नदी में उतर गए। तीन सैनिक तैरकर पश्चिमी यमुना नहर के गेट तक लगभग 600 मीटर पहुंच गए, लेकिन भगत और पाटिल का पता नहीं चल सका।
बताया गया कि यह अभ्यास सिंचाई विभाग की अनुमति से किया गया था। कुछ विवरणों में कहा गया कि टीम हिमाचल प्रदेश के नाहन क्षेत्र में स्थित विशेष बल प्रशिक्षण प्रतिष्ठान से आई थी।
तलाशी और बरामदगी
इसके बाद तुरंत बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान शुरू किया गया। भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य आपदा मोचन बल इकाइयाँ, स्थानीय पुलिस और नागरिक प्रशासन इसमें शामिल हुए। हवाई निगरानी के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का उपयोग किया गया। बचाव में मदद के लिए बैराज और पश्चिमी यमुना नहर में पानी का प्रवाह घटाया गया। सेना के जवानों ने नहर में मानव शृंखला बनाई। दादूपुर हेड, जो स्थल से लगभग 15 किलोमीटर दूर है, से लाइफ जैकेट और एक गोताखोरी किट बरामद की गई।
भगत का शव पहले बुधवार रात उत्तर प्रदेश में यमुना किनारे से बरामद किया गया। पाटिल का शव गुरुवार को नहर प्रणाली में अधिक दूर तक बह जाने के बाद मिला।
इकाई और पृष्ठभूमि
1 पैरा (विशेष बल) पैरा रेजिमेंट की सबसे पुरानी विशेष बल बटालियनों में शामिल है। मूल रूप से 1 पंजाब से परिवर्तित इस इकाई को 1978 में सेना की पहली समर्पित विशेष बल इकाई बनाया गया था और तब से इसे आतंकवाद-रोधी, उग्रवाद-रोधी और उच्च जोखिम वाले अभियानों में लगाया जाता रहा है। जल, नाव और हेलीकॉप्टर से प्रवेश अभ्यास इस इकाई की बाढ़ बचाव, नदी पार गतिशीलता और विशेष अभियानों की नियमित तैयारी का हिस्सा हैं।
इस तरह का प्रशिक्षण स्वभाव से ही खतरनाक होता है। हथिनीकुंड के पास यमुना का यह हिस्सा बैराज के गेटों के पास अचानक तेज धाराओं और उथल-पुथल के लिए जाना जाता है, खासकर जब जलस्तर और पानी का प्रवाह अधिक हो।
आधिकारिक स्थिति
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी ने नाव पलटने की परिस्थितियों और दो कर्मियों के लापता होने की पुष्टि की। बाद में स्थानीय प्रशासन, पुलिस सूत्रों और निवासियों ने बरामदगी की जानकारी दी। मृतकों के नाम और अंतिम संस्कार सहित आगे की व्यवस्थाओं पर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार था।
भगत और पाटिल की मौत कर्तव्य पालन के दौरान स्वीकृत प्रशिक्षण अभ्यास में हुई। दोनों सैनिक सेना की सबसे कठिन संरचनाओं में से एक से थे। सेवा विवरण, पारिवारिक जानकारी और अंतिम संस्कार की व्यवस्था से जुड़ी आगे की जानकारी उस समय सेना ने जारी नहीं की थी।