लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, एवीएसएम, एसएम**, सेना कमांडर, पश्चिमी कमान ने खड़गा कोर के डीप स्ट्राइकर्स की अभियानी तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए संयुक्तता, प्रौद्योगिकीय नवाचार और सटीक क्षमता पर विशेष जोर दिया गया।
समीक्षा के दौरान सेना कमांडर ने गठन की उच्च अभियानी तत्परता और भारतीय वायु सेना के साथ सहज समन्वय बनाए रखने की सराहना की। उन्होंने उभरती युद्ध चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित विशिष्ट प्रौद्योगिकियों और नवोन्मेषी समाधानों की भी प्रशंसा की।
इन पहलों का उद्देश्य बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं को मजबूत करना है, ताकि बेहतर स्थिति की जानकारी और गहरे सटीक प्रहार की क्षमता के साथ इकाइयां लगातार जटिल और प्रौद्योगिकी-आधारित युद्धक्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने नवाचारों के एक प्रदर्शन को भी देखा, जिसमें युद्धक्षेत्र में प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए विकसित क्षेत्र-उपयुक्त समाधान शामिल थे। उन्होंने कर्मियों से चुस्त बने रहने और बदलते अभियानी तथा प्रौद्योगिकीय प्रतिमानों के अनुरूप निरंतर ढलते रहने का आग्रह किया।
एक अलग कार्यक्रम में पश्चिमी सेना कमांडर ने मुख्यालय दिल्ली क्षेत्र का दौरा किया और प्रमुख अभियानी, सुरक्षा तथा क्षमता-वृद्धि पहलों की समीक्षा की।
इस समीक्षा में संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग, ढांचे को मजबूत करने, विकास परियोजनाओं में तेजी लाने और समय पर आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि अभियानी तैयारियां और अधिक सुदृढ़ हों।
आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण उत्कृष्टता और स्टेशन सुरक्षा को भी दौरे के दौरान प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया। इससे भारतीय सेना की उस निरंतर कोशिश का संकेत मिलता है, जिसके तहत भविष्य की अभियानी आवश्यकताओं का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम गठन विकसित किए जा रहे हैं।
इन दौरों ने संयुक्तता, नवाचार, आधुनिकीकरण और मिशन-उन्मुख तैयारी पर पश्चिमी कमान के फोकस को रेखांकित किया, जबकि भारतीय सेना अधिक चुस्त, लचीले और भविष्य के लिए तैयार गठन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।