लेफ्टिनेंट जनरल उल्हास किरपेकर, एवीएसएम, एसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), दक्षिण भारत क्षेत्र ने हैदराबाद में स्थित मुख्यालय तेलंगाना एवं आंध्र उप क्षेत्र तथा विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने परिचालन तैयारियों, प्रशिक्षण मानकों और क्षमता विकास पहलों की समीक्षा की।
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल किरपेकर ने संरचनाओं की परिचालन तत्परता का आकलन किया और सैनिकों से बातचीत की। उन्होंने उनके पेशेवर कौशल, समर्पण और ऊँचे मनोबल की सराहना की तथा कठोर प्रशिक्षण मानकों को बनाए रखने और बदलती परिचालन चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर बल दिया।
उन्होंने हैदराबाद के प्रशिक्षण तंत्र की भी समीक्षा की और कर्मियों की क्षमताओं को मजबूत करने तथा समग्र प्रभावशीलता बढ़ाने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया।
अपने दौरे के हिस्से के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल किरपेकर ने हैदराबाद के बढ़ते रक्षा नवाचार परिदृश्य को भी देखा। उन्होंने टी-हब और टी-वर्क्स का दौरा किया और स्वदेशी तकनीकी प्रगति तथा ऐसी उभरती समाधानों के बारे में जानकारी ली, जिनका सशस्त्र बलों में उपयोग संभव है।
प्रदर्शित नवाचारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव रहित हवाई वाहन, रोबोटिक्स और क्वांटम तकनीक से जुड़े विकास शामिल थे। इनसे भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में स्वदेशी अत्याधुनिक तकनीक की बढ़ती भूमिका झलकती है।
लेफ्टिनेंट जनरल किरपेकर ने हैदराबाद के नवाचार तंत्र के योगदान को मान्यता दी और तकनीकी रूप से उन्नत तथा भविष्य के लिए तैयार बल के निर्माण में “भारत में डिज़ाइन और निर्माण” दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया।
यह दौरा इस बात को रेखांकित करता है कि भारतीय सेना भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च परिचालन तैयारी और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण को स्वदेशी नवाचार तथा उभरती तकनीकों के साथ जोड़ने पर ध्यान दे रही है।