राजकोट शहर पुलिस ने 33 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिस पर भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक्स टीम के स्क्वाड्रन लीडर के रूप में खुद को पेश करने और एक महिला से नौकरी दिलाने का झांसा देकर 1.95 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है।
आरोपी की पहचान राजकोट निवासी प्रतीक भारद्वाज के रूप में हुई है, जो एक स्थानीय यात्रा एजेंसी में काम करता है। गहन तकनीकी विश्लेषण के बाद उसे शुक्रवार, 11 सितंबर को गांधीग्राम-2 (विश्वविद्यालय) थाना पुलिस की टीम ने हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार वह नानावटी चौक के पास डी-32, शांतिनिकेतन पार्क-4 में किराए के मकान में रह रहा था। गिरफ्तारी के दौरान दो मोबाइल फोन बरामद किए गए।
ठगी का तरीका
पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता राजकोट की रहने वाली एक महिला है, जो फिलहाल गांधीनगर में काम करती है। उसने भारद्वाज से उसके इंस्टाग्राम प्रोफाइल को देखकर संपर्क किया था। प्रोफाइल तस्वीर में वह भारतीय वायु सेना की वर्दी पहने दिख रहा था। खाते पर भारतीय वायु सेना के विमानों और सूर्यकिरण एरोबेटिक्स टीम के कई वीडियो भी थे, जिनमें 26 मई, 2026 को यूनिट के 30वें स्थापना दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और एयर शो के प्रदर्शन की फुटेज शामिल थी। इस खाते पर फरवरी 2025 से पोस्ट डाली जा रही थीं।
आरोप है कि भारद्वाज ने महिला से कहा कि वह स्क्वाड्रन 52 की उड़ान शाखा में स्क्वाड्रन लीडर है और कर्नाटक के बिदर वायुसेना स्टेशन पर तैनात है, जो वास्तव में सूर्यकिरण एरोबेटिक्स टीम का वास्तविक आधार है। उसका विश्वास जीतने के बाद उसने भारतीय वायु सेना में भर्ती कराने का भरोसा दिया और दस्तावेज़ सत्यापन, चिकित्सकीय परीक्षण, प्रशिक्षण तथा वर्दी शुल्क जैसे कथित खर्चों के नाम पर किश्तों में ऑनलाइन रकम भेजने के लिए कहा। कुल भुगतान 1.95 लाख रुपये तक पहुंच गया। बाद में जब कोई नियुक्ति नहीं हुई, तो महिला को ठगी का एहसास हुआ।
शिकायत और जांच
महिला ने 4 सितंबर को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 के जरिए शिकायत दर्ज कराई थी। यह मामला पहले गुजरात पुलिस की हाल ही में शुरू की गई साइबर रिपोर्टिंग व्यवस्था के तहत ई-जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज किया गया और फिर राजकोट के गांधीग्राम-2 (विश्वविद्यालय) थाने को भेज दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह राजकोट शहर पुलिस को भेजी गई शुरुआती ई-जीरो एफआईआर में से एक है।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 319(2) और 204 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पश्चिम के सहायक पुलिस आयुक्त आर. एस. बारिया ने कहा कि भारद्वाज भारतीय वायु सेना का अधिकारी नहीं है और राजकोट की यात्रा एजेंसी में काम करता है। उन्होंने बताया कि आरोपी ने इंस्टाग्राम पर सूर्यकिरण एरोबेटिक्स टीम के कई वीडियो अपलोड किए थे, ताकि अपनी पहचान को वैध दिखाया जा सके। गांधीग्राम-2 थाना निरीक्षक के. के. गोहिल ने कहा कि भारद्वाज ने अपनी असली पहचान या मोबाइल नंबर छिपाने की बहुत कोशिश नहीं की, जिससे यह पहली ऐसी भर्ती ठगी का मामला हो सकता है। हालांकि जांचकर्ताओं ने उसके खिलाफ गुजरात के निषेध अधिनियम के तहत पहले के दो मामले भी दर्ज पाए हैं।
पुलिस ने बताया कि जांच निरीक्षक गोहिल की निगरानी में हुई, जिसमें सहायक उप निरीक्षक संजयभाई ठाकुर, प्रधान आरक्षक राहुल ठाकुर, आरक्षक सवानभाई वसोया और अन्य कर्मी शामिल थे। तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपी की पहचान की पुष्टि हुई। आगे यह पता लगाने के लिए जांच जारी है कि क्या अन्य नौकरी तलाशने वालों को निशाना बनाया गया, पैसे का इस्तेमाल कैसे किया गया और क्या इसमें कोई और आरोपी शामिल था। वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय वायु सेना की स्क्वाड्रन 52, जिसे सूर्यकिरण एरोबेटिक्स टीम के नाम से जाना जाता है, बिदर वायुसेना स्टेशन पर आधारित है। अधिकारियों ने जोर दिया कि भारतीय वायु सेना में भर्ती निर्धारित आधिकारिक प्रक्रियाओं के अनुसार होती है और निजी सोशल-मीडिया संपर्कों या अनौपचारिक आंतरिक व्यवस्था के जरिए नहीं कराई जाती।
अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि इंस्टाग्राम या इसी तरह के मंचों पर खुद को रक्षा अधिकारी बताकर नौकरी का प्रस्ताव देने वालों से सावधान रहें, पहचान की पुष्टि आधिकारिक माध्यमों से करें और संदेहास्पद साइबर ठगी की तुरंत 1930 पर सूचना दें।