उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने शनिवार को दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद-रोधी तंत्र की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में तैनात बलों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और अभियानगत तैयारियों का जायजा लिया।
समीक्षा के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा को क्षेत्र की वर्तमान सुरक्षा स्थिति तथा आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए जिम्मेदार संरचनाओं की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी गई।
सेना कमांडर ने खुफिया-आधारित अभियानों की सफलता के लिए अनुकूलन क्षमता, सटीकता, सतत सतर्कता और समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ये तत्व आवश्यक हैं।
इस बल पर दिए गए जोर से दक्षिण कश्मीर में मजबूत आतंकवाद-रोधी तंत्र बनाए रखने और बदलते खतरों के लिए तैयार रहने की सेना की निरंतर कोशिश झलकती है।
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने क्षेत्र में तैनात जवानों से भी मुलाकात की और सुरक्षा बनाए रखने के प्रति उनके अदम्य उत्साह और समर्पण की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्त रखने और शांति तथा स्थिरता में योगदान के लिए कर्मियों की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।
यह ताज़ा आकलन दक्षिण कश्मीर में अभियानगत तैयारियों की लगातार हो रही समीक्षाओं के बीच सामने आया है। इससे पहले इसी महीने लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने क्षेत्र में पिछली पंक्ति की इकाइयों का दौरा किया था और बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सतत चौकसी, मिशन-तैयारी और हितधारकों के बीच घनिष्ठ समन्वय पर जोर दिया था।
उत्तरी कमान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की देखरेख करती है। इसकी अभियानगत स्थिति में आतंकवाद-रोधी तैयारी, खुफिया-आधारित अभियान और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण तत्व बने हुए हैं।