गुवाहाटी, 4 अक्टूबर: असम मंत्रिमंडल ने अग्निपथ योजना के तहत सेवा कर रहे या सेवा दे चुके असम के स्थायी निवासियों के लिए सिपाही और समकक्ष पदों पर 12 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है। यह बैठक मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई।
मंत्रिमंडल के जारी बयान के अनुसार यह आरक्षण असम पुलिस, कमांडो बटालियन, जेल, अग्निशमन सेवा, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, वन रक्षक और आबकारी विभाग में सिपाही और समकक्ष पदों पर लागू होगा। लाभ केवल अग्निपथ योजना के अंतर्गत आने वाले असम के स्थायी निवासियों तक सीमित रहेगा।
अग्निपथ योजना का उद्देश्य देशभक्त और प्रेरित युवाओं को चार वर्ष के लिए सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर देना, सेवाओं में युवा स्वरूप बनाए रखना और प्रशिक्षित, अनुशासित तथा प्रेरित जनशक्ति को नागरिक जीवन में लौटाना बताया गया है। राज्य सरकार का यह निर्णय उस सेवा अवधि के बाद वर्दीधारी राज्य पदों तक पहुंच का मार्ग बनाने के रूप में रखा गया है।
योजना शुरू होने के बाद जून 2022 में शामिल हुए पहले अग्निवीर बैच अब चार वर्ष की सेवा अवधि के अंत के करीब हैं। योजना के तहत अधिकतम 25 प्रतिशत को नियमित संवर्ग में रखा जा सकता है, जबकि शेष चार वर्ष बाद सेवा से बाहर हो जाते हैं।
केंद्र में गृह मंत्रालय पहले ही पूर्व-अग्निवीर श्रेणी बना चुका है, जिसके तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सिपाही (सामान्य ड्यूटी) पदों और असम राइफल्स में राइफलमैन पदों पर 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसके साथ आयु में छूट और शारीरिक मानक परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण तथा लिखित परीक्षा से छूट भी दी गई है।
असम सरकार का निर्णय इससे अलग है और केवल उन्हीं राज्य पदों पर लागू होगा जिनका उल्लेख किया गया है। इसे लागू करने से पहले भर्ती नियमों में आवश्यक बदलाव करने होंगे। जारी बयान में राज्य पदों के लिए आयु में छूट, शारीरिक परीक्षण से छूट या लिखित परीक्षा में छूट का उल्लेख नहीं किया गया है।
इसी बैठक में लोक निर्माण विभाग (सड़कें–राष्ट्रीय राजमार्ग) के लिए एक अलग आयुक्त पद, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद और दीमा हसाओ स्वायत्त परिषद में जल जीवन मिशन कार्यों के लिए मसौदा ज्ञापन, डलमिया भारत का 10,200 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, असम रेजिमेंट के आधारभूत ढांचे के लिए 10 करोड़ रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता और माधुपुर सत्र के लिए प्रति माह 1 लाख रुपये का अनुदान भी मंजूर किया गया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कचारी बाजार से कामाख्या तक ब्रह्मपुत्र नदी तट के विस्तार के लिए परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने का काम टाटा कंसल्टेंसी को सौंपा गया है।