शिमला, 25 अक्टूबर 2026 (पीटीआई): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को केंद्र सरकार से अलग हिमाचल स्काउट्स बटालियन गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लद्दाख स्काउट्स, सिक्किम स्काउट्स और अरुणाचल स्काउट्स की तर्ज पर बनने वाली यह इकाई भारत-चीन सीमा और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर रक्षा तैयारियों को मजबूत करेगी।
प्रस्तावित बटालियन में सीमावर्ती जिलों किन्नौर और लाहौल-स्पीति के युवाओं की विशेष भर्ती को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। सुक्खू के मुताबिक, इन इलाकों के युवा ऊंचाई, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और कठोर मौसम से परिचित हैं। उनका यह अनुभव हिमालयी सीमा पर सैन्य अभियानों में उपयोगी होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र की स्थानीय जानकारी रखने वाले युवाओं की विशेष सैन्य इकाई सीमा सुरक्षा को बेहतर बना सकती है। इससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन जिलों के युवाओं के लिए सेना में भर्ती के अवसर भी बढ़ेंगे।
हिमाचल की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए सुक्खू ने प्रदेश को ‘देवभूमि’ के साथ ‘वीरभूमि’ भी बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के एक लाख से अधिक युवा सशस्त्र बलों में सेवारत हैं। लगभग इतनी ही संख्या में पूर्व सैनिक भी देश की रक्षा और सुरक्षा में योगदान दे चुके हैं।
सुक्खू ने याद दिलाया कि परमवीर चक्र के पहले प्राप्तकर्ता मेजर सोमनाथ शर्मा हिमाचल प्रदेश से थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के चार सैनिकों को यह सम्मान मिला है—मेजर सोमनाथ शर्मा, लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा, कैप्टन विक्रम बत्रा और राइफलमैन रहे, बाद में सूबेदार मेजर बने संजय कुमार। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे सैनिकों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने में कभी संकोच नहीं किया।”
हिमाचल स्काउट्स बटालियन के गठन की मांग लंबे समय से लंबित है। सुक्खू इससे पहले भी केंद्र के सामने यह मुद्दा उठा चुके हैं। सेना और सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बातचीत तथा दिल्ली के प्रस्तावित दौरों से पहले भी उन्होंने इस मांग को रखा था। उनका जोर सीमा की रक्षा में स्थानीय अनुभव का उपयोग करने और राष्ट्रीय सुरक्षा में प्रदेश के योगदान को मान्यता देने पर रहा है।
अन्य हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी स्काउट्स इकाइयां पहले से मौजूद हैं। वर्ष 1963 में गठित लद्दाख स्काउट्स में अब पांच बटालियन हैं। अरुणाचल स्काउट्स की पहली बटालियन 2010 और दूसरी 2013 में गठित की गई थी। सिक्किम स्काउट्स का गठन भी 2013 में हुआ था।
इन इकाइयों में मुख्य रूप से ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय लोगों की भर्ती की जाती है। ये पर्वतीय युद्ध, टोही और सीमा सुरक्षा में विशेषज्ञता रखती हैं। प्रस्तावित हिमाचल स्काउट्स बटालियन भी इसी मॉडल पर राज्य के एलएसी से लगे जिलों के युवाओं को हिमालयी परिस्थितियों के अनुकूल विशेष इन्फैंट्री भूमिका में सेवा का अवसर देगी।
रविवार शाम तक इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की सूचना नहीं थी।