सिकंदराबाद स्थित कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट में “क्षेत्रों का संगम: भविष्य के युद्ध का उदय” विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, रक्षा वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और प्रयोक्ताओं ने तेजी से बदलते आधुनिक युद्ध के स्वरूप और भविष्य के युद्धक्षेत्रों को आकार देने वाले तकनीकी बदलावों पर विचार-विमर्श किया।
इस संगोष्ठी का उद्घाटन एयर मार्शल यल्ला उमेश, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, मेनटेनेंस कमांड ने किया। उन्होंने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए सशस्त्र बलों को तैयार करने में उभरती प्रौद्योगिकियों को सैन्य रणनीति के साथ जोड़ने के बढ़ते महत्व पर बल दिया। कार्यक्रम ने अभियानिक क्षेत्रों के संगम और आधुनिक संघर्षों की बढ़ती जटिलता पर संयुक्त चर्चा के लिए मंच उपलब्ध कराया।
चर्चाओं का मुख्य केंद्र यह रहा कि तकनीकी प्रगति किस तरह युद्ध की प्रकृति को मूल रूप से बदल रही है। इस कारण सशस्त्र बलों को भूमि, वायु, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्रों में क्षमताओं को जोड़ने वाली समन्वित पद्धतियां अपनानी होंगी। प्रतिभागियों ने ऐसे लचीले और अनुकूलनीय अभियानिक सिद्धांत विकसित करने की जरूरत पर भी विचार किया, जो बहुआयामी और प्रौद्योगिकी-आधारित खतरों का जवाब दे सकें।
संगोष्ठी में बहु-क्षेत्रीय अभियानों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने विश्लेषण किया कि भविष्य के सैन्य अभियान कई अभियानिक परिवेशों में क्षमताओं के निर्बाध एकीकरण पर निर्भर होंगे। वक्ताओं ने पारंपरिक सैन्य शक्ति के साथ साइबर क्षमताओं, अंतरिक्ष संसाधनों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सूचना अभियानों के समन्वय को अभियानिक श्रेष्ठता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उभरती प्रौद्योगिकियों के रूपांतरकारी प्रभाव पर भी विचार किया गया, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियां, मानवरहित प्लेटफॉर्म और उन्नत निर्णय-सहायता उपकरण शामिल हैं। प्रतिभागियों ने चर्चा की कि ये तकनीकें कमान और नियंत्रण, खुफिया जानकारी एकत्र करने, निगरानी, रसद और युद्धक्षेत्र में निर्णय लेने की प्रक्रिया को कैसे बदल रही हैं। साथ ही, इनसे सैन्य योजनाकारों के लिए नई संभावनाएं और चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवरहित प्रणालियां भविष्य के संघर्षों में अधिक तेज निर्णय लेने, स्थिति की बेहतर समझ और सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगी। चर्चाओं में आत्मनिर्भर तकनीकी क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, ताकि रणनीतिक स्वायत्तता और दीर्घकालिक रक्षा तैयारी सुनिश्चित की जा सके।
इस कार्यक्रम में तीनों सेनाओं, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन तथा प्रमुख रक्षा उद्योग भागीदारों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास प्रतिष्ठान तथा सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स के वैज्ञानिकों ने चल रहे तकनीकी विकास और भविष्य की उन रक्षा क्षमताओं पर जानकारी दी, जिन्हें भारत के सैन्य आधुनिकीकरण प्रयासों को समर्थन देने के लिए विकसित किया जा रहा है।
रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी नवाचार, अनुकरण प्रौद्योगिकियों, स्वायत्त प्रणालियों, नौवहन समाधानों और उभरते रक्षा अनुप्रयोगों पर अपने विचार साझा किए। इनमें जुप्पा जियो नाव, जेन टेक्नोलॉजीज़, टेक्नोट्रोव सिस्टम्स और ट्रैक्ट्रिक्स ऑप्टो डायनेमिक्स शामिल थे। उनकी भागीदारी ने रक्षा नवाचार को गति देने में सशस्त्र बलों, अनुसंधान संगठनों और निजी उद्योग के बीच सहयोग के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।
पूरी संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार किया कि बदलते अभियानिक परिवेश तकनीकी विकास, रणनीतिक योजना और सैन्य सिद्धांत के बीच अधिक घनिष्ठ एकीकरण की मांग करते हैं। चर्चाओं में इस बात पर सहमति बनी कि भविष्य के संघर्षों के लिए उपयुक्त क्षमताएं विकसित करने हेतु तीनों सेनाओं, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग को मिलाकर समग्र पारितंत्र-आधारित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
अंत में यह साझा समझ बनी कि भविष्य के युद्ध तेजी से रणनीति और तकनीक के संगम पर लड़े जाएंगे। प्रतिभागियों ने माना कि आने वाले युद्धक्षेत्रों में सफलता केवल उन्नत सैन्य प्लेटफार्मों पर नहीं, बल्कि उभरती प्रौद्योगिकियों, सूचना श्रेष्ठता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बहु-क्षेत्रीय अभियानिक अवधारणाओं को एक सुसंगत युद्ध-लड़ाई ढांचे में जोड़ने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी।
इस संगोष्ठी ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट की उच्च रक्षा प्रबंधन शिक्षा और रणनीतिक चिंतन के लिए एक प्रमुख संस्थान के रूप में भूमिका को फिर से रेखांकित किया। साथ ही, इसने नवाचार, संयुक्तता और प्रौद्योगिकी-आधारित क्षमता विकास के माध्यम से युद्ध की बदलती प्रकृति के लिए तैयार रहने की भारतीय सशस्त्र बलों की निरंतर प्रतिबद्धता को भी दर्शाया।