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डिफेन्स न्यूज़

2029 तक रक्षा उत्पादन का लक्ष्य 3 लाख करोड़ रुपये: राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के रक्षा रूपांतरण पर डाला प्रकाश

News Desk
Last updated: July 18, 2026 11:04 am
News Desk
Published: July 18, 2026
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Rajnath Singh

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की विश्वस्तरीय रक्षा तैयारियों का मजबूत प्रमाण है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की “राष्ट्र पहले” और “सशस्त्र बल पहले” की नीति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से और सशक्त हुई उपलब्धि बताया।

नई दिल्ली में 18 जुलाई 2026 को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह सफल सैन्य अभियान भारत की बदली हुई रक्षा क्षमता, तकनीकी दक्षता और रक्षा निर्माण में बढ़ती आत्मनिर्भरता का चमकदार उदाहरण है। उनके अनुसार पिछले बारह वर्षों में किए गए सतत सुधारों का परिणाम अब सामने आ रहा है।

उन्होंने आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ भारतीय सशस्त्र बलों की निर्णायक कार्रवाई का उल्लेख करते हुए सरकार की आतंकवाद के प्रति शून्य-सहनशीलता नीति को दोहराया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का संकल्प केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कहीं भी आतंकवाद पर प्रहार करने की क्षमता के रूप में सामने आया है।

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श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की अद्यतन, सटीक और मानक रक्षा तैयारियों का प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान ने भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय पराक्रम और पेशेवर दक्षता को प्रदर्शित किया, साथ ही रक्षा क्षेत्र में किए गए परिवर्तनकारी बदलावों की पुष्टि की।

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल सैन्य सफलता नहीं था, बल्कि आधुनिक युद्ध में स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के सफल समन्वय का भी उदाहरण था। इसमें आकाश तीर वायु रक्षा प्रणाली, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सहित कई अत्याधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म और तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया गया।

उन्होंने इसे तकनीकी युद्ध का उज्ज्वल उदाहरण बताते हुए कहा कि इसकी सफल निष्पादन प्रक्रिया भारतीय रक्षा उद्योगों और स्वदेशी सैन्य क्षमताओं पर सरकार के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। उनके अनुसार घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देने और आयातित रक्षा उपकरणों पर निर्भरता घटाने की नीति ने पिछले बारह वर्षों में इस आधार को मजबूत किया है।

श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सशस्त्र बलों द्वारा जारी पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों में 509 रक्षा वस्तुएं शामिल हैं, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की ओर से जारी पांच अतिरिक्त सूचियों में 5,012 वस्तुएं स्वदेशी खरीद के लिए चिन्हित की गई हैं।

उन्होंने कहा कि शीघ्र ही एक और सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची अधिसूचित की जाएगी, जिससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की यात्रा और तेज होगी। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में वार्षिक रक्षा उत्पादन लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जबकि 2014 में यह लगभग 40,000 करोड़ रुपये था।

रक्षा निर्यात में भी अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। यह वित्त वर्ष 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर आज 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में रक्षा उत्पादन 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक करने और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।

रक्षा निर्यात के 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इससे भारत उन्नत रक्षा प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों के एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरता दिख रहा है। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ये उपलब्धियां रणनीतिक सोच में मूलभूत परिवर्तन का संकेत हैं, जिसमें भारत अब केवल विदेशी उपकरणों पर निर्भर नहीं, बल्कि उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों का उत्पादक और निर्यातक बन रहा है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक रणनीतिक स्वायत्तता तभी संभव है, जब कोई राष्ट्र संकट के समय अपनी रक्षा आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर सके। इसी दिशा में रक्षा आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता को एक साथ आगे बढ़ाया गया है, और रक्षा औद्योगिक तंत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक नीतिगत सुधार किए गए हैं।

रक्षा मंत्री ने रक्षा निर्यात को सरल बनाने के लिए शुरू की गई पहलों का भी उल्लेख किया। इनमें रक्षा निर्यात-आयात पोर्टल, ऑनलाइन स्वीकृति व्यवस्था, सामान्य निर्यात लाइसेंस ढांचा, गुणवत्ता प्रमाणन प्रक्रियाओं का सरलीकरण, ग्रीन चैनल नीति और स्व-प्रमाणन प्रणाली शामिल हैं।

उन्होंने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना को स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने की सरकार की सबसे परिवर्तनकारी पहलों में से एक बताया। इन दोनों गलियारों में लगभग 70,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावित हैं, जिनमें से करीब 10,000 करोड़ रुपये पहले ही निवेश किए जा चुके हैं।

इन परियोजनाओं से रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर बने हैं और भारतीय उद्योगों को वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ा गया है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का सफल उदाहरण बनकर उभरा है, जिसने उन्नत रक्षा निर्माण को बढ़ावा दिया और भारत की स्वदेशी औद्योगिक क्षमता को मजबूत किया है।

रक्षा अधिग्रहण के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि रक्षा आधुनिकीकरण के लिए आवंटित बजट का 75 प्रतिशत भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए निर्धारित किया गया है। इस वर्ष जारी होने वाली नई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया घरेलू रक्षा उत्पादन को और मजबूत करेगी तथा “भारत में खरीदें-स्वदेशी रूप से अभिकल्पित, विकसित और निर्मित” जैसी खरीद व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देगी।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नवाचार और प्रौद्योगिकी उन्नति भारत के रक्षा परिवर्तन की आधारशिला हैं। इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस, आईडीईएक्स प्राइम और एडीआईटीआई योजना के तहत स्टार्ट-अप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद स्वीकृतियां दी गई हैं।

उन्होंने बताया कि उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। मार्च 2026 तक 676 स्टार्ट-अप्स और नवप्रवर्तक आईडीईएक्स ढांचे के तहत सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे, जिसके परिणामस्वरूप 551 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए।

आज 2,000 से अधिक स्टार्ट-अप्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और अन्य अत्याधुनिक सैन्य अनुप्रयोगों के क्षेत्रों में भारत के रक्षा तंत्र में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में अब रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, निजी उद्योग, 17,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और देशभर की हजारों आपूर्ति इकाइयां शामिल हैं।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन भी वैज्ञानिकों, उद्योग, शिक्षा जगत और उभरती प्रौद्योगिकी इकाइयों के बीच सार्थक सहयोग को बढ़ावा देने वाले एक राष्ट्रीय नवाचार मंच के रूप में विकसित हुआ है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल घरेलू जरूरतों के लिए रक्षा उपकरण बनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि एक विश्वसनीय वैश्विक सुरक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें रक्षा कूटनीति, औद्योगिक सहयोग और तकनीकी साझेदारियां भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्राओं को उन्होंने भारत के विस्तारित रणनीतिक प्रभाव के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि इन कूटनीतिक पहलों से ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, यूरेनियम आपूर्ति, व्यापार साझेदारियों और सांस्कृतिक पहलों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत हुआ है। रक्षा मंत्री के अनुसार भारत की रक्षा कूटनीति अब केवल रणनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखलाओं में एकीकरण तक फैल गई है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सैनिकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, नवप्रवर्तकों, उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और सबसे बढ़कर देश के युवाओं के सामूहिक योगदान से यह परिवर्तन संभव हुआ है। उन्होंने एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, जो सुरक्षित और प्रौद्योगिकीय रूप से सशक्त हो।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नए भारत की परिकल्पना ऐसे सैनिकों की है जो स्वदेशी हथियारों और प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित हों, ऐसे वैज्ञानिकों की है जिन्हें नए अवसरों से सशक्त किया जाए, ऐसे युवाओं की है जो नवाचार से प्रेरित हों और ऐसे उद्योगों की है जो वैश्विक स्तर पर सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर सकें।

उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 में भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक दुनिया भारत को केवल सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक अत्यंत विश्वसनीय, आधुनिक और आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति के रूप में पहचानेगी। उनके अनुसार नवाचार, स्वदेशी क्षमताओं और सैन्य आधुनिकीकरण में निरंतर निवेश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करेगा।

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SSBCrack की संपादकीय टीम में अनुभवी पत्रकार, पेशेवर कंटेंट लेखक और समर्पित रक्षा अभ्यर्थी शामिल हैं, जिन्हें सैन्य मामलों, राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति का गहरा ज्ञान है।
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