एयर मार्शल तेजिंदर सिंह, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड स्टाफ कमेटी (CISC), ने 18 जुलाई 2026 को मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE), महू का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की विशिष्ट तकनीकों, नवाचार और क्षमता विकास से जुड़ी चल रही पहलों की समीक्षा की।
दौरे में भारतीय सशस्त्र बलों की तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और अकादमिक संस्थानों, स्टार्ट-अप तथा सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग मजबूत करने पर जोर दिखा। इसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार सैन्य क्षमताओं का निर्माण करना बताया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी, कमांडेंट, MCTE ने संस्थान की पहलों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशिष्ट तकनीकों के समावेश और ऐसे नवोन्मेषी समाधानों के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया, जो समकालीन सैन्य अभियानों की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि MCTE सैन्य संचार, सूचना प्रौद्योगिकी और उभरती रक्षा तकनीकों के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। अकादमिक संस्थानों, स्टार्ट-अप और विभिन्न सरकारी संगठनों के साथ सहयोग संस्थान की प्रगति का अहम हिस्सा बना हुआ है।
यह सहयोग रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार को तेज करने में मदद कर रहा है। इसके जरिये बहुविषयी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के त्वरित विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो आत्मनिर्भरता की व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि से भी मेल खाता है।
एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों में विशिष्ट तकनीकों के समावेश से जुड़े प्रयासों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य अभियानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर क्षमता, सुरक्षित संचार प्रणालियों और नेटवर्क-केंद्रित संचालन ढाँचों का प्रभावी एकीकरण आवश्यक हो गया है।
CISC ने सहयोगात्मक नवाचार पहलों से हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की और भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीकी क्षमता को मजबूत करने में संस्थान के योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि सैन्य संस्थानों, अकादमिक जगत, स्टार्ट-अप और सरकारी एजेंसियों के बीच सार्थक साझेदारी भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए सक्षम और तकनीकी रूप से उन्नत रक्षा क्षमता बनाने के लिए अनिवार्य है।
उन्होंने MCTE के संकाय और कर्मियों की समर्पण भावना और व्यावसायिकता की भी प्रशंसा की। एयर मार्शल ने कहा कि तकनीकी उत्कृष्टता और संस्थागत नवाचार को आगे बढ़ाने के उनके निरंतर प्रयास सशस्त्र बलों की कार्यात्मक तैयारी में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने सभी कर्मियों से अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता बनाए रखने और नवाचार, अनुकूलनशीलता तथा निरंतर सीखने की प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते रणनीतिक वातावरण में ऐसे सैन्य पेशेवरों की आवश्यकता है जो तकनीकी रूप से दक्ष हों और जटिल बहु-क्षेत्रीय परिचालन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की सैन्य सफलता केवल तकनीकी बढ़त पर नहीं, बल्कि उभरती तकनीकों को तेजी से अपनाने और उन्हें परिचालन अवधारणाओं तथा सैन्य प्रशिक्षण ढाँचों में प्रभावी ढंग से शामिल करने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी। इसलिए पेशेवर सैन्य शिक्षा और नवाचार में सतत निवेश भविष्य के लिए तैयार सशस्त्र बलों के निर्माण के लिए आवश्यक है।
यह दौरा तीनों सेनाओं के बीच तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने और रक्षा तंत्र में संस्थागत उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने में सहयोग के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करता है। संयुक्तता और एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ क्षमता विकास और सैन्य रूपांतरण के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
एमसीटीई का तकनीकी नवाचार और सहयोगात्मक शोध पर जोर भारतीय सशस्त्र बलों के व्यापक परिवर्तन एजेंडे को दर्शाता है। यह एजेंडा चुस्त, अनुकूलनशील और तकनीकी रूप से सशक्त सैन्य संस्थानों के विकास पर केंद्रित है।
स्वदेशी नवाचारों को बढ़ावा देकर और रणनीतिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करके संस्थान भारत की रक्षा तैयारी और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में लगातार योगदान दे रहा है। एयर मार्शल तेजिंदर सिंह का यह दौरा सैन्य प्रौद्योगिकी परिवर्तन को अपनाने और उच्चतम व्यावसायिक तथा परिचालन मानकों को बनाए रखने की भारतीय सैन्य प्रतिबद्धता को भी दोहराता है।
जैसे-जैसे सैन्य तकनीकें अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रही हैं, विशिष्ट तकनीकों और स्वदेशी नवाचार पर मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग का ध्यान भारत की आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा शक्ति के निर्माण में इसे एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाता है।