भारतीय सेना की पश्चिमी कमान के 80वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक ऐसी उपलब्धि भी सामने आई, जिसने इस समारोह को और विशेष बना दिया। ब्रिगेडियर केआई कुमार, एएससी (सेवानिवृत्त) ने अपना 100वां जन्मदिन मनाया और उनके जीवन का यह शतक सैन्य सेवा, सम्मान और राष्ट्र के प्रति समर्पण की मिसाल बन गया।
ब्रिगेडियर केआई कुमार के 100वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर उन्हें केक और गुलदस्ता भेंट किया गया। यह भेंट पश्चिमी कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की ओर से दी गई, जो भारतीय सेना और देश के प्रति उनके लंबे सेवाकाल के सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक थी।
ब्रिगेडियर केआई कुमार का जीवन एक ऐसे असाधारण सैन्य परिवार से भी जुड़ा रहा है, जिसमें चार भाइयों ने सशस्त्र बलों में करियर चुना और राष्ट्र की सेवा को अपना जीवन समर्पित किया। इस परिवार की परंपरा ने पीढ़ियों तक साहस, अनुशासन और बलिदान की भावना को आगे बढ़ाया।
इनमें मेजर देवेंद्र कुमार भी शामिल थे, जो कोर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स यानी ईएमई में थे और 1971 के अभियानों के दौरान 144 वायु रक्षा रेजिमेंट के साथ सेवा में रहे। उनकी भूमिका भी इस परिवार की सैन्य विरासत का हिस्सा रही।
एक अन्य भाई कर्नल नरेंद्र “बुल” कुमार, पीवीएसएम, केसी, एवीएसएम, पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित, कुमाऊं रेजिमेंट के दिग्गज सैनिक और पर्वतारोही थे। उच्च हिमालय में उनके अग्रणी अभियानों और टोही कार्यों ने सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र को लेकर भारत की जानकारी और रणनीतिक समझ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चौथे भाई मेजर केआई कुमार, एसएम, 9 PARA (Commando) के थे और उन्होंने 1985 के भारतीय सेना के एवरेस्ट अभियान के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके बलिदान ने परिवार की सैन्य विरासत में साहस और त्याग का एक और अध्याय जोड़ा।
ब्रिगेडियर केआई कुमार का 100वां जन्मदिन और पश्चिमी कमान का 80वां स्थापना दिवस एक साथ आना इस अवसर को और भी महत्वपूर्ण बना गया। जहां पश्चिमी कमान आठ दशकों की सेवा, संचालनगत तत्परता और राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान का स्मरण कर रही थी, वहीं ब्रिगेडियर कुमार का शतायु जीवन उन पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व कर रहा था, जिन्होंने इस विरासत को गढ़ा।
चार भाई, एक वर्दी की साझा परंपरा और राष्ट्र के प्रति एक जैसा समर्पण—कुमार परिवार की यह कहानी सैन्य सेवा का ऐसा उदाहरण है, जिसमें साहस, साथ, उपलब्धि और बलिदान एक साथ दिखाई देते हैं।
100 वर्ष की आयु में ब्रिगेडियर केआई कुमार भारतीय सेना की एक पुरानी पीढ़ी से जीवंत संबंध के रूप में सामने आते हैं। उनका जीवन और उनके परिवार का योगदान सशस्त्र बलों के इतिहास में गहराई से दर्ज है।
एक सैनिक के जीवन के 100 वर्ष और पश्चिमी कमान के 80 वर्ष—देश सेवा और ऐसी विरासत का यह संगम एक प्रेरक स्मरण बन गया है, जो आगे भी प्रेरणा देता रहेगा।