नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026: भारतीय नौसेना को स्वदेश में डिजाइन और निर्मित पनडुब्बी रोधी पोत ‘अमिनी’ की डिलीवरी मिल गई है। उथले समुद्री क्षेत्रों में अभियान के लिए बने इस पोत को 5 नवंबर 2026 को तमिलनाडु के कट्टुपल्ली में सौंपा गया। इसका निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने किया है।
अमिनी तट के करीब और कम गहराई वाले समुद्री इलाकों में पनडुब्बियों तथा अन्य पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने, उन पर नजर रखने और उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसका डिजाइन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार हुआ है।
इस श्रेणी के पोतों की खासियत उनका वॉटरजेट प्रणोदन तंत्र है। ये भारतीय नौसेना के वॉटरजेट से चलने वाले सबसे बड़े युद्धपोतों में शामिल हैं। यह तकनीक उथले तटीय जल में पोत को आसानी से मोड़ने और संचालन में मदद करती है।
अमिनी में हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उन्नत सोनार सहित आधुनिक पनडुब्बी रोधी प्रणालियां लगी हैं। पनडुब्बी रोधी अभियानों के अलावा इसे तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने के काम के लिए भी तैयार किया गया है। भारत की लंबी तटरेखा, रणनीतिक रूप से अहम द्वीप क्षेत्रों और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए ऐसे विशेष पोतों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
पोत का नाम केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप पर रखा गया है। नौसेना में राष्ट्रीय और समुद्री महत्व वाले स्थानों के नाम पर युद्धपोतों का नाम रखने की पुरानी परंपरा है। नया अमिनी पूर्व आईएनएस अमिनी की विरासत को भी आगे बढ़ाता है। पेट्या-III श्रेणी का वह पनडुब्बी रोधी कॉर्वेट वर्ष 2002 में सेवा से हटा दिया गया था।
अमिनी में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है। इसके निर्माण में भारतीय शिपयार्ड, उपकरण निर्माताओं और तकनीक प्रदाताओं की भागीदारी रही है। यह परियोजना रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटाने और देश में डिजाइन, निर्माण तथा तकनीकी क्षमता बढ़ाने की आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है।
अमिनी, भारतीय नौसेना के लिए जीआरएसई द्वारा बनाए जा रहे आठ उथले जल पनडुब्बी रोधी पोतों में पांचवां है। इसकी लंबाई लगभग 77.6 मीटर है और ड्राफ्ट, यानी पानी की सतह के नीचे रहने वाले हिस्से की गहराई, करीब 2.7 मीटर है।
डीजल इंजन से संचालित इसका वॉटरजेट प्रणोदन तंत्र ऐसे कम गहराई वाले क्षेत्रों में संचालन में मदद करता है, जहां बड़े युद्धपोतों की आवाजाही सीमित हो सकती है। पोत को पानी के भीतर निगरानी, पनडुब्बियों का पता लगाने और नौसैनिक विमानों के साथ मिलकर पनडुब्बी रोधी अभियान चलाने के लिए डिजाइन किया गया है।