पंजाब सरकार ने शुक्रवार को 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव यादव को नियमित पुलिस महानिदेशक यानी पुलिस बल प्रमुख नियुक्त कर दिया। इस नियुक्ति के साथ ही राज्य पुलिस के शीर्ष पद पर चल रही कार्यवाहक व्यवस्था समाप्त हो गई, जिसके तहत वह चार वर्ष से अधिक समय तक कार्यभार संभाल रहे थे। उन्होंने उसी दिन पदभार भी ग्रहण कर लिया।
यह नियुक्ति 9 अक्टूबर 2026 को गृह विभाग की ओर से पंजाब के राज्यपाल के नाम जारी आदेश के जरिए की गई। आदेश पर गृह के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर के हस्ताक्षर हैं। इसमें कहा गया है कि संघ लोक सेवा आयोग से प्राप्त पैनल पर विचार करने के बाद राज्यपाल ने श्री गौरव यादव, आईपीएस (आरआर:1992), को पंजाब का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया।
उनका कार्यकाल पदभार संभालने की तारीख से न्यूनतम दो वर्ष का होगा। यह व्यवस्था 22 सितंबर 2006 और 3 जुलाई 2018 को प्रख्यापित सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है, जो प्रकाश सिंह एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में दिए गए थे। पुलिस सुधारों से जुड़े इस प्रकरण में यह सुनिश्चित किया गया था कि राज्य पुलिस प्रमुख का पद बार-बार या मनमाने तरीके से न बदला जाए।
यूपीएससी पैनल
संघ लोक सेवा आयोग ने 1 जुलाई 2026 के अपने पत्र संख्या 13/15/2026-एआईएस के माध्यम से तीन अधिकारियों को पैनल में शामिल किया था। यह सूची राज्य सरकार की ओर से भेजे गए 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से तैयार की गई थी। तीनों अधिकारी 1992 बैच के हैं।
इस पैनल में डॉ. शरद सत्या चौहान, हरप्रीत सिंह सिद्धू और गौरव यादव के नाम शामिल थे। राज्य सरकार ने इन्हीं में से गौरव यादव को चुना।
2022 से कार्यवाहक व्यवस्था
यादव को 4 जुलाई 2022 को इस पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी और अगले दिन उन्होंने कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्यभार संभाला। तब वह विशेष डीजीपी (प्रशासन) और मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष प्रधान सचिव थे। यह व्यवस्था तत्कालीन नियमित पुलिस महानिदेशक वीरेश कुमार भवर के अवकाश पर जाने के बाद की गई थी। भवर 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी थे।
सितंबर 2022 में भवर को पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि यादव कार्यवाहक रूप में बल का नेतृत्व करते रहे।
न्यायिक समीक्षा
यह नियमित नियुक्ति उस समय हुई है जब देरी को लेकर न्यायिक समीक्षा चल रही थी। 1 अक्टूबर 2026 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर शामिल थे, ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य को नियमित डीजीपी की नियुक्ति पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। यह याचिका अधिवक्ता निखिल थम्मन ने दायर की थी।
अदालत ने कहा था कि कार्यवाहक व्यवस्था अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रहनी चाहिए और मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा से 13 अक्टूबर तक अनुपालन हलफनामा मांगा था। सरकार का आदेश इस तारीख से चार दिन पहले जारी कर दिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी प्रकाश सिंह ढांचे के तहत राज्यों द्वारा नियमित डीजीपी की नियुक्ति में देरी का संज्ञान लिया था। मार्च 2026 में पंजाब को भी इन कार्यवाहियों में शामिल किया गया। राज्य का प्रस्ताव 6 अप्रैल 2026 को संघ लोक सेवा आयोग के पास पहुंचा और आयोग ने 1 जुलाई को अपना पैनल भेजा।
पदभार ग्रहण
आदेश जारी होने के बाद पंजाब पुलिस ने कहा कि यादव ने पुलिस महानिदेशक के रूप में पदभार संभाल लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात कर आंतरिक सुरक्षा स्थिति और कानून-व्यवस्था की जानकारी दी। इस दौरान मुख्य सचिव भी मौजूद थे।
एक्स पर अपने संदेश में यादव ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से भेंट कर राज्य की आंतरिक सुरक्षा स्थिति और कानून-व्यवस्था पर जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब पुलिस शांति, सद्भाव और जन-सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सुरक्षित, संरक्षित और नशामुक्त पंजाब के निर्माण में सहयोग करती रहेगी।
अधिकारी का परिचय
57 वर्षीय गौरव यादव 11 अक्टूबर 1992 को आईपीएस में शामिल हुए थे और पंजाब कैडर के सीधी भर्ती अधिकारी हैं। उन्होंने पंजाब पुलिस की खुफिया शाखा का 2016-17 में नेतृत्व किया और आधुनिकीकरण शाखा में भी सेवा दी, साथ ही कई वरिष्ठ प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ निभाईं। उन्हें 2008 में पुलिस पदक फॉर मेरिटोरियस सर्विस और 2015 में राष्ट्रपति पुलिस पदक फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस से सम्मानित किया गया था।
उन्होंने बी.ई., एम.ई., लोक प्रशासन में एम.ए., डॉक्टरेट तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर योग्यता प्राप्त की है। उनका जन्म 16 अप्रैल 1969 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बेलापार गांव में हुआ था। वे दिवंगत कर्नल भगवती प्रसाद यादव के पुत्र हैं, जो सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी थे।
यह नियमित नियुक्ति एक ऐसे बल के नेतृत्व को वैधानिक स्थिरता देती है, जो संगठित अपराध, गैंगस्टर नेटवर्क और सीमा पार मादक पदार्थ तस्करी से निपट रहा है। शीर्ष पद पर चार वर्ष से अधिक समय तक चली कार्यवाहक व्यवस्था अब समाप्त हो गई है।