पुणे में पेंशन के लिए जीवन प्रमाणपत्र जमा कराने का झांसा देकर साइबर ठगों ने भारतीय वायुसेना के 84 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी से 4.5 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस के मुताबिक, ठगों ने खुद को सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक का कर्मचारी बताकर उनसे फर्जी ऑनलाइन फॉर्म भरवाया था।
कोंढवा में रहने वाले अधिकारी के साथ यह धोखाधड़ी 8 से 9 अक्टूबर के बीच हुई। केंद्र और राज्य सरकार के अन्य पेंशनभोगियों की तरह उन्हें भी पेंशन जारी रखने के लिए हर साल जीवन प्रमाणपत्र जमा करना होता है।
वरिष्ठ निरीक्षक संतोष खेतमलस ने बताया कि ठगों ने अधिकारी को वीडियो कॉल कर दावा किया कि वे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को जीवन प्रमाणपत्र भरने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारी घर बैठे यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं और बाकी औपचारिकताएं बैंक संभाल लेगा।
इसके बाद ठगों ने एक मैसेजिंग ऐप पर ऑनलाइन फॉर्म भेजा। अधिकारी ने उसे डाउनलोड किया और अपनी निजी जानकारी, पहचानपत्र तथा बैंक खाते का विवरण भरकर जमा कर दिया। पुलिस के अनुसार, फॉर्म में डिवाइस को दूर से नियंत्रित करने वाले सॉफ्टवेयर का लिंक था। इस प्रक्रिया में अनजाने में उनके बैंक खाते की जानकारी ठगों तक पहुंच गई, जिसके बाद खाते से 4.5 लाख रुपये निकाल लिए गए।
खेतमलस ने बताया कि पुलिस रकम के लेनदेन की जांच कर रही है और उन बैंक खातों की पहचान की जा रही है, जिनमें पैसे भेजे गए थे। मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।
जीवन प्रमाणपत्र अपडेट कराने के नाम पर पूर्व सैन्यकर्मियों समेत पेंशनभोगियों को निशाना बनाने वाली साइबर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं। प्रशासन और बैंक बार-बार सलाह देते रहे हैं कि जीवन प्रमाणपत्र केवल आधिकारिक माध्यमों से जमा किया जाए। इनमें जीवन प्रमाण पोर्टल jeevanpramaan.gov.in, रक्षा पेंशनभोगियों के लिए स्पर्श प्रणाली, अधिकृत बैंक शाखाएं, डाकघर और निर्धारित केंद्र शामिल हैं।
बिना अनुरोध आए फोन या वीडियो कॉल और मैसेजिंग ऐप पर भेजे गए फॉर्म या एप्लिकेशन डाउनलोड करने के आग्रह को संदिग्ध मानें। अनजान कॉल करने वालों को बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या अपने डिवाइस का रिमोट एक्सेस न दें। ठगी के किसी भी प्रयास की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।